सूखे में अरहर-हल्दी बचाने के लिए बांधों से पानी मिले, तुपकर ने कलेक्टर से की मांग
किसान नेता रविकांत तुपकर ने बुलढाणा के जिलाधिकारी से मिलकर खड़ी फसलों के लिए बांधों का पानी देने, बिजली कटौती रोकने और भूमिहीन मजदूरों को मदद देने की मांग रखी।
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बुलढाणा जिले में सूखे का साया गहरा होता जा रहा है। ऐसे में किसान नेता रविकांत तुपकर ने गुरुवार को जिलाधिकारी डॉ. प्रवीणकुमार देवरे से मुलाकात की और किसानों की कई मांगें उनके सामने रखीं। उनका कहना था कि खेतों में खड़ी अरहर और हल्दी जैसी फसलों को बचाने का आखिरी मौका किसानों से छीना न जाए।
तुपकर की सबसे बड़ी मांग यह है कि जिले के जिन बांधों में 70 प्रतिशत से ज्यादा पानी जमा है, उनके आसपास के किसानों को कम से कम दो बार ड्रिप सिंचाई या स्प्रिंकलर से पानी देने की इजाज़त दी जाए। उन्होंने यह भी कहा कि सिर्फ खड़ी फसल बचाने के लिए नहीं, बल्कि सूखे में जानवरों के लिए जिले में ही चारा उगाने का मौका भी किसानों को मिलना चाहिए। उन्होंने यह मांग काफी आक्रामक अंदाज़ में रखी।
तुपकर ने हालात समझाते हुए कहा कि सूखे की वजह से खरीफ सीज़न में किसानों का बड़ा नुकसान हो चुका है। बारिश नहीं हुई और पानी की किल्लत है, इसलिए आने वाले रबी सीज़न की उम्मीद भी धुंधली पड़ गई है। ऐसे में खेत में अभी जो अरहर, हल्दी और दूसरी फसलें खड़ी हैं, वे बच जाएं तो किसानों के हाथ कुछ तो उपज लगेगी। लेकिन बांधों में अच्छा पानी होने के बावजूद अगर किसानों को उसे इस्तेमाल करने का मौका नहीं मिला, तो खड़ी फसल भी खराब होने का डर है।
तुपकर ने साफ किया कि वे बांध का पूरा पानी खेती के लिए छोड़ने की मांग नहीं कर रहे हैं। उनका कहना है कि मौजूद पानी का हिसाब देखकर सीमित पानी इस्तेमाल करने की छूट मिले, ताकि खड़ी फसलों में जान बनी रहे। यही इस मांग के पीछे की सोच है।
इस मौके पर देविदास कनखर, विनायक सरनाईक, एकनाथ पाटील, अमोल मोरे, हरिदास उबरहन्डे, राजू थुट्टे, मधुकर धुट्टे, अवचितराव धुट्टे और कडुबा मोरे समेत कई लोग मौजूद थे।
बिजली को लेकर भी तुपकर ने मांग रखी। उनका कहना था कि सूखे से पहले ही परेशान किसानों को बिजली सप्लाई के सवाल पर और तंग न किया जाए। खेतों में खड़ी फसल बचाने के लिए पानी देने की ज़रूरत है, इसलिए बिना भेदभाव सबके बिजली कनेक्शन काटने की कार्रवाई रोकी जाए। साथ ही जले हुए ट्रांसफॉर्मर को तुरंत ठीक करके लगाया जाए, यह मांग भी की गई।
सूखे की मार सिर्फ जमीन वाले किसानों तक सीमित नहीं है। खेत मजदूर और भूमिहीन परिवार भी इसकी चपेट में हैं। खेती के काम कम हो गए हैं, जिससे इन परिवारों की कमाई पर भी असर पड़ रहा है। इसलिए तुपकर ने मांग की कि भूमिहीन खेत मजदूरों को एक लाख रुपये की आर्थिक मदद दी जाए।
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