मंगलवार, 6 अक्टूबर 2026

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18:59 IST

सुबह उठते ही हाथ-पैर सुन्न पड़ते हैं? ये हो सकते हैं शरीर के संकेत

सुबह उठते ही हाथ-पैर सुन्न पड़ना कभी सोने की गलत पोजीशन की वजह से होता है तो कभी यह किसी और बीमारी का संकेत भी हो सकता है, डॉक्टरों के मुताबिक कब यह गंभीर हो सकता है।

सुबह उठते ही हाथ-पैर सुन्न पड़ते हैं? ये हो सकते हैं शरीर के संकेत
एआई से बनाई गई प्रतीकात्मक तस्वीर; यह घटना का वास्तविक फोटो नहीं है | PT24

बहुत लोगों को सुबह उठते ही एक अजीब सा अनुभव होता है। हाथ सुन्न लगता है, उंगलियों में झनझनाहट होती है, पैर भारी लगता है और शुरू के दो-चार कदम चलना भी मुश्किल हो जाता है। अक्सर यह सोने की गलत पोजीशन की वजह से होता है। कई बार हम नींद में हाथ पर सिर रखकर सो जाते हैं, या एक ही करवट पर बहुत देर तक पड़े रहते हैं। इससे नसों पर दबाव पड़ता है और हाथ-पैर सुन्न हो जाते हैं। थोड़ी देर हाथ-पैर हिलाने से यह ठीक हो जाता है। लेकिन अगर रोज ऐसा हो रहा हो, तो ध्यान देने की जरूरत है क्योंकि यह सिर्फ नींद की दिक्कत नहीं, किसी और बीमारी का लक्षण भी हो सकता है।

शरीर में नसें बिल्कुल लाइट की वायर जैसी होती हैं, जो दिमाग से पूरे शरीर तक मैसेज पहुंचाती हैं। गहरी नींद में जब एक ही जगह पर हाथ दबा रहता है, तो कोहनी के पास की अल्नर नर्व या बांह की रेडियल नर्व दब जाती है, जिससे दिमाग तक जाने वाला मैसेज रुक जाता है। सुबह उठकर जब पोजीशन बदलते हैं तो दबाव कम होता है और नसें फिर से चालू हो जाती हैं, तभी झनझनाहट, चुभन या गर्माहट महसूस होती है। थोड़ा चलने-फिरने और हाथ-पैर हिलाने से खून का दौरा ठीक हो जाता है और सब नॉर्मल हो जाता है।

अगर यह तकलीफ रोज सुबह हो रही हो, तो इसके पीछे अलग वजहें हो सकती हैं। रीढ़ की हड्डी की दिक्कत में अगर गर्दन की हड्डी में नस दब जाए तो कंधे से लेकर उंगलियों तक झनझनाहट होती है, और कमर की हड्डी में दिक्कत हो तो कमर से पैर तक सुन्नपन महसूस होता है। कार्पल टनल की समस्या तब होती है जब कलाई की नसें दबती हैं, रात में सोते वक्त कलाई मुड़ जाने से यह तकलीफ ज्यादा होती है, और जो लोग दिनभर कंप्यूटर पर काम करते हैं उन्हें यह ज्यादा होती है। शुगर और बी12 की कमी भी एक वजह है, जिन्हें डायबिटीज है उनके हाथ-पैर की नसें धीरे-धीरे खराब होने लगती हैं जिसे न्यूरोपैथी कहते हैं, और शरीर में विटामिन बी12 कम होने पर भी नसें ठीक से काम नहीं करतीं। कई बार लोग सुन्नपन और अकड़न को एक ही समझ लेते हैं, जबकि रातभर एक ही पोजीशन में सोने से जोड़ों का तेल कम हो जाता है और मांसपेशियां अकड़ जाती हैं, जिससे सुबह पहला कदम रखते वक्त दर्द होता है। यह गठिया या एड़ी दर्द की वजह से भी हो सकता है।

घर पर कुछ आसान तरीके अपनाए जा सकते हैं, जैसे सोते वक्त हाथ पर सिर रखकर न सोएं, गर्दन के नीचे सही तकिया रखें ताकि पीठ सीधी रहे, सुन्न होने पर हाथ-पैर को जोर से न झटकें बल्कि धीरे-धीरे उंगलियां हिलाएं और स्ट्रेचिंग करें, दिनभर खूब पानी पिएं और एक ही जगह बैठे न रहें, थोड़ा टहलते रहें। रात में पैरों में ऐंठन आना भी कम पानी पीने से हो सकता है।

ज्यादातर मामलों में यह तकलीफ थोड़ी देर में ठीक हो जाती है, लेकिन कभी-कभी यह स्ट्रोक का भी संकेत हो सकती है। अगर अचानक एक तरफ का हाथ-पैर सुन्न पड़ जाए, चेहरा टेढ़ा हो जाए, बोलते वक्त जीभ लड़खड़ाने लगे, अचानक दिखना बंद हो जाए या चक्कर आए, तो एक सेकंड भी रुके बिना तुरंत अस्पताल जाना चाहिए, क्योंकि यह स्ट्रोक का अटैक हो सकता है। इसके अलावा पेशाब पर कंट्रोल न रहना, कमर में बहुत दर्द होकर पैरों की ताकत कम होना, हाथ-पैर ठंडे और नीले पड़ जाना, और हिलाने पर भी सुन्नपन न जाना, ये भी खतरे के लक्षण हैं।

अगर रोज पैर अकड़ रहा हो या दर्द हो रहा हो, तो फिजियोथेरेपी से फायदा होता है। रोज के स्ट्रेचिंग एक्सरसाइज और मांसपेशियां मजबूत करने वाली एक्सरसाइज से सिर्फ दर्द कम नहीं होता बल्कि दिक्कत जड़ से ठीक होती है। इसलिए अगर सुबह उठने के बाद सुन्नपन ज्यादा देर तक रहे, चीजें पकड़ने में दिक्कत हो या चलने में तकलीफ हो, तो घर पर बैठे न रहें, अच्छे डॉक्टर को दिखाएं। समय पर इलाज लेने से बड़ी परेशानी टल सकती है।

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