सुबह उठकर 'ॐ' का जप: तनाव और नींद के लिए मददगार हो सकता है
ज्योतिषियों के मुताबिक सुबह कुछ मिनट 'ओम' का जप और सांस पर ध्यान कई लोगों को ध्यान जैसा लग सकता है।
सुबह बिस्तर से उठते ही फोन देखने की जगह कुछ मिनट खुद को दिए जाएं तो फर्क महसूस हो सकता है। 'ओम' का जप एक आसान अभ्यास है, जिसके लिए किसी खास तैयारी या जगह की जरूरत नहीं पड़ती। ज्योतिषियों के मुताबिक कुछ देर शांत बैठकर 'ओम' का जप करना और अपनी सांस पर ध्यान टिकाना कई लोगों को ध्यान जैसा लग सकता है।
खासकर तब, जब दिन की शुरुआत से ही काम, घर के काम और दूसरी जिम्मेदारियों की लिस्ट दिमाग में घूमने लगती है। ऐसे में 5 से 10 मिनट का यह ठहराव मन को रुकने का मौका दे सकता है। हालांकि 'ओम' का जप किसी बीमारी का इलाज नहीं है। इसे आराम के एक अभ्यास की तरह रोजमर्रा की जिंदगी में शामिल किया जा सकता है।
सुबह का वक्त अक्सर बाकी दिन की दिशा तय करता है। उठते ही जब मन फोन कॉल, मैसेज और काम की चिंताओं से घिर जाता है, तब शांत होने का वक्त मिलने की गुंजाइश कम रहती है। ऐसे में कुछ मिनट एक जगह स्थिर बैठकर 'ओम' का जप करना ध्यान लगाने का आसान तरीका हो सकता है। जप के दौरान अपनी आवाज, सांस और शरीर की स्थिति पर ध्यान रखें। इससे दूसरे विचारों से कुछ देर दूर रहने में मदद मिल सकती है। शुरुआत में पांच मिनट काफी हो सकते हैं। आदत बन जाए तो इसे 10 मिनट तक बढ़ाया जा सकता है।
व्यस्त दिन में मन में अनगिनत विचार आ सकते हैं। कभी ऑफिस का काम, कभी घर की जिम्मेदारियां, तो कभी अगले दिन की फिक्र। ऐसे वक्त शांत बैठने से थोड़ी राहत मिल सकती है। जप करते हुए आवाज और सांस पर लगातार ध्यान देने से मन कुछ देर एक ही बात पर टिका रहता है। यह तनाव का इलाज नहीं है, लेकिन आराम की दिनचर्या में इसे जरूर शामिल किया जा सकता है।
जप के वक्त सांस अंदर लेकर धीरे से उसका उच्चारण किया जाता है। इससे कुछ देर के लिए सांस पर ध्यान जाता है। धीमी और सहज सांस का अभ्यास करने से कई लोगों को शांति महसूस हो सकती है। जिन्हें सांस लेने में तकलीफ है या दूसरी सेहत की समस्याएं हैं, वे सिर्फ इसी अभ्यास के भरोसे न रहें। जरूरत पड़े तो डॉक्टर की सलाह लेना बेहद जरूरी है।
आजकल लगातार आते नोटिफिकेशन और स्क्रीन के सामने बिताए वक्त की वजह से ध्यान लगाना मुश्किल हो जाता है। कुछ मिनट फोन किनारे रखकर 'ओम' का जप करते हुए सिर्फ आवाज और सांस पर ध्यान देने से मन को एक चीज पर टिकाने का अभ्यास होता है। सुबह पढ़ाई या काम शुरू करने से पहले यह अभ्यास करने पर दिन की शुरुआत शांत हो सकती है।
'ओम' का जप सिर्फ सुबह तक सीमित नहीं है। जिन्हें सोने से पहले मन शांत करना मुश्किल लगता है, वे इसे अपनी आराम की दिनचर्या में रख सकते हैं। कुछ मिनट शांत बैठकर धीमी सांस के साथ जप करने से सोने से पहले स्क्रीन और दिनभर की भागदौड़ से दूर रहने का मौका मिल सकता है। नींद की दिक्कत बनी रहे तो उसकी असली वजह समझना जरूरी है। ऐसे में सिर्फ 'ओम' के जप पर निर्भर रहना सही उपाय नहीं है।
जप का आसान तरीका यह है कि सुबह उठकर किसी शांत जगह आंखें बंद करके बैठें। फिर धीरे से सांस छोड़ें और 'ओम' का जप करें। आवाज पर ध्यान रखने की कोशिश करें और मन भटके तो उसे वापस सांस और जप पर ले आएं। पांच मिनट से शुरू करें और सहज लगे तो धीरे-धीरे समय 10 मिनट तक बढ़ाएं। अभ्यास के दौरान फोन दूर रखें और जल्दबाजी न करें।