सिंधुदुर्ग के पांच तहसीलों के 198 गांव पश्चिम घाट पर्यावरण संवेदनशील क्षेत्र में शामिल करने का प्रस्ताव
केंद्रीय पर्यावरण मंत्रालय के मसौदे में सिंधुदुर्ग जिले के 198 गांवों को पश्चिम घाट पर्यावरण संवेदनशील क्षेत्र में शामिल करने की बात कही गई है, 60 दिन में आपत्ति दर्ज कराई जा सकती है।
पश्चिम घाट के पर्यावरण संरक्षण को लेकर केंद्र सरकार ने एक बड़ा कदम उठाया है। सिंधुदुर्ग जिले के पांच तहसीलों के कुल 198 गांवों को पश्चिम घाट पर्यावरण संवेदनशील क्षेत्र में शामिल करने का प्रस्ताव रखा गया है। केंद्रीय पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय ने इस बारे में मसौदा अधिसूचना जारी की है। इस अधिसूचना के बाद संबंधित गांवों के नागरिकों, स्थानीय संस्थाओं और अन्य जुड़े लोगों को अपनी राय, सुझाव और आपत्ति दर्ज कराने का मौका मिला है।
केंद्र सरकार के इस मसौदे के मुताबिक महाराष्ट्र के पश्चिम घाट इलाके के 13 जिलों के 56 तहसीलों के 2 हजार 515 गांवों को पर्यावरण संवेदनशील क्षेत्र में शामिल करने का प्रस्ताव है। पश्चिम घाट को जैव विविधता के लिहाज से बेहद अहम इलाका माना जाता है, इसीलिए इस क्षेत्र के पर्यावरण की दृष्टि से संवेदनशील हिस्सों को सुरक्षित रखने के मकसद से यह पूरी प्रक्रिया चलाई जा रही है।
इस प्रस्ताव में सिंधुदुर्ग जिले का बड़ा हिस्सा शामिल है। जिले के सावंतवाडी, कुडाल, कणकवली, देवगड और वैभववाडी, इन पांच तहसीलों के कुल 198 गांव इसमें शामिल किए गए हैं। इसके चलते इन गांवों में प्रस्तावित पर्यावरण संवेदनशील क्षेत्र को लेकर स्थानीय स्तर पर उत्सुकता और चर्चा शुरू होने की संभावना जताई जा रही है।
मसौदा अधिसूचना जारी होने की तारीख से 60 दिन के भीतर आपत्ति, सुझाव और हरकतें केंद्र सरकार के पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय के पास जमा करानी जरूरी हैं। आपत्ति और सुझाव es-z-mef@nic.in इस ईमेल पर भेजे जा सकते हैं, या फिर केंद्र सरकार के पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय, इंदिरा पर्यावरण भवन, जोरबाग रोड, नई दिल्ली-110003 इस पते पर भी लिखित रूप में आपत्ति भेजी जा सकती है।
सिंधुदुर्ग जिले के पांच तहसीलों के 198 गांवों का इस प्रस्ताव में समावेश होने की वजह से इस अधिसूचना को स्थानीय स्तर पर खासा महत्व मिला है। पर्यावरण संरक्षण और स्थानीय नागरिकों के हित के बीच संतुलन बनाने के लिहाज से इस मसौदे पर लोगों की राय और आपत्तियां अहम साबित होंगी। संबंधित गांवों के नागरिकों, ग्रामीणों, स्थानीय संस्थाओं और बाकी जुड़े लोगों से तय समय सीमा के भीतर अपनी बात दर्ज कराने की अपील की गई है।