सीईटी कक्ष की चेतावनी: परीक्षा पर गलत जानकारी फैलाई तो होगी कानूनी कार्रवाई
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सीईटी कक्ष ने सोशल मीडिया पर गलत जानकारी फैलाने वालों पर कानूनी कार्रवाई के लिए टास्क फोर्स बनाई है और एक यूट्यूबर को नोटिस भेजा है।
पुणे: राज्य सामायिक प्रवेश परीक्षा कक्ष, यानी सीईटी कक्ष, अलग-अलग व्यावसायिक स्नातक और स्नातकोत्तर कोर्सेस में दाखिले के लिए प्रवेश परीक्षा और प्रवेश प्रक्रिया चलाता है। अब कक्ष ने सोशल मीडिया पर गलत जानकारी फैलाने वालों के खिलाफ सख्ती का फैसला किया है।
कक्ष के ध्यान में आया है कि हाल के दिनों में उसकी प्रवेश परीक्षाओं, परीक्षा की समय-सारणी यानी शेड्यूल, परीक्षा के नतीजों और केंद्रीकृत प्रवेश प्रक्रिया को लेकर कई बार गुमराह करने वाली, अधूरी और झूठी जानकारी या दावे छापे जा रहे हैं। ऐसी बातों से विद्यार्थियों में उलझन पैदा होती है और सीईटी कक्ष की छवि को भी नुकसान पहुंचता है।
इसी वजह से कक्ष ने तय किया है कि वह निगरानी रखेगा। एक्स, फेसबुक, यूट्यूब और व्हाट्सऐप जैसे सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर गलत जानकारी फैलाने वाले अकाउंट चलाने वालों पर कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
इस काम के लिए सीईटी कक्ष ने एक टास्क फोर्स बनाई है। यह टास्क फोर्स सोशल मीडिया पर नजर रखेगी और गलत या गुमराह करने वाली जानकारी फैलाने वालों पर कानूनी कार्रवाई करेगी।
कक्ष ने विद्यार्थियों और पालकों से भी अपील की है। अगर सोशल मीडिया पर सीईटी से जुड़ी कोई गलत जानकारी, पोस्ट, रील, पॉडकास्ट, वीडियो या आपत्तिजनक कंटेंट दिखे, तो उसकी शिकायत की जाए। परीक्षा केंद्र बदलवा देने का दावा हो या पर्सेंटाइल मार्क्स बढ़वा देने का दावा, ऐसी शिकायतें socialmedia.complaints@mahacet.org इसी ईमेल पर भेजनी हैं। कक्ष शिकायत की सच्चाई जांचेगा और उसके बाद उस पर कानूनी कार्रवाई होगी।
एक यूट्यूबर को नोटिस भी जा चुका है। डिजिटल मास्टर नाम के यूट्यूब चैनल पर शिवा नाम के यूट्यूबर ने एमएचटी सीईटी २०२७ की दोनों परीक्षाओं की तारीखें, उनके लिए आवेदन रजिस्ट्रेशन की तारीखें और नतीजों की तारीखें पॉडकास्ट में बता दी थीं। इससे विद्यार्थियों और पालकों में उलझन फैल गई थी और इसकी शिकायतें सीईटी कक्ष तक पहुंची थीं।
कक्ष का कहना है कि उसने २०२७ की प्रवेश परीक्षाओं की तारीखें अभी घोषित ही नहीं की हैं। इसलिए डिजिटल मास्टर यूट्यूब चैनल को कानूनी नोटिस भेजा गया है। नोटिस में वह वीडियो यूट्यूब से फौरन हटाने को कहा गया है। साथ ही चैनल पर इसका स्पष्टीकरण प्रसारित करने और सबूतों के साथ लिखित स्पष्टीकरण सीईटी कक्ष को सौंपने के निर्देश भी दिए गए हैं।
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