श्रीवर्धन में सड़क किनारे पाइपलाइन फटी, सूखे के खतरे के बीच हजारों लीटर पानी बहा
श्रीवर्धन तालुका में सूखे का साया गहरा रहा है और उसी बीच मुख्य सड़क के किनारे जमीन के नीचे की पानी की पाइपलाइन फट गई है।
तस्वीरें सत्यापित नहीं हैं
श्रीवर्धन तालुका पर सूखे का साया गहराता जा रहा है, और ऐसे वक्त में पानी की बड़े पैमाने पर बर्बादी की तस्वीर सामने आई है। श्रीवर्धन को जोड़ने वाली मुख्य और भीड़भाड़ वाली सड़क के किनारे जमीन के नीचे से गुजरने वाली पानी की पाइपलाइन फट गई है। इससे हजारों लीटर पानी बह रहा है।
एक तरफ आने वाले दिनों में पानी की किल्लत की चिंता सता रही है, दूसरी तरफ कीमती पानी इस तरह बेकार जा रहा है। इसी वजह से प्रशासन के कामकाज के तरीके पर सवाल उठ रहे हैं।
इस साल बारिश अनियमित रही और सूखे जैसे हालात बन गए हैं। इसके चलते श्रीवर्धन तालुका के लोगों को आगे पानी की कमी का सामना करना पड़ सकता है। ऐसे में पानी की हर बूंद बचाना जरूरी है, लेकिन मुख्य सड़क के किनारे ही पाइपलाइन फटकर पानी बह रहा है। यह घटना प्रशासन की अनदेखी की तरफ ध्यान खींच रही है।
खास बात यह है कि यह घटना किसी दूर-दराज के इलाके में नहीं हुई है। यह श्रीवर्धन को जोड़ने वाली प्रमुख सड़क के किनारे हुई है, जिस पर दिन भर सैकड़ों गाड़ियां दौड़ती हैं।
आम लोगों के साथ अलग-अलग सरकारी विभागों के अधिकारी और कर्मचारी भी इसी रास्ते से आते-जाते हैं। फिर भी फटी पाइपलाइन से इतना पानी बह रहा है और यह बात संबंधित महकमे की नजर में कैसे नहीं आई, यह सवाल उठाया जा रहा है।
इस मुख्य सड़क के नीचे स्थानीय 'आरती' ग्रामपंचायत, श्रीवर्धन नगर परिषद और ग्रामीण नल पानी आपूर्ति योजनाओं की पाइपलाइनें बिछी हुई हैं। इसलिए अभी तक साफ नहीं है कि फटी हुई पाइपलाइन आखिर किस विभाग के अधीन आती है। संबंधित महकमे को यह पाइपलाइन फौरन ठीक करनी चाहिए।
सरकार की तरफ से एक ओर पानी बचाने की अपील की जा रही है और सूखे से निपटने के लिए अलग-अलग उपायों की जरूरत बताई जा रही है। दूसरी ओर हकीकत में पानी की खुलेआम बर्बादी हो रही है, जो चिंताजनक है। आज जो पानी बह रहा है, वह आगे किल्लत के दिनों में लोगों के काम आ सकता था। इसलिए इस घटना को सिर्फ मामूली तकनीकी खराबी मानकर नहीं छोड़ना चाहिए, इसे गंभीरता से लेना जरूरी है। संबंधित विभाग किसी लिखित शिकायत का इंतजार किए बिना तुरंत मौके पर जाकर जांच करे।
लोगों की मांग है कि पहले यह पता किया जाए कि पाइपलाइन किस विभाग के अधिकार में आती है, फिर उसकी जल्द मरम्मत हो और पानी की बर्बादी रोकी जाए। सूखे की पृष्ठभूमि में लोगों को उम्मीद है कि प्रशासन पानी बचाने पर सिर्फ अपील न करे, बल्कि असल कार्रवाई से अपनी जिम्मेदारी दिखाए।
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