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20:19 IST

शिवसेना चिन्ह विवाद: शिंदे गुट का दावा, जीते विधायकों के 76% वोट हमारे साथ

सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई के दौरान शिंदे गुट के वकील ने 2019 के चुनावी आंकड़े पेश किए और चुनाव आयोग के अधिकारों पर जोर दिया।

शिवसेना चिन्ह विवाद: शिंदे गुट का दावा, जीते विधायकों के 76% वोट हमारे साथ
एआई से बनाई गई प्रतीकात्मक तस्वीर; यह घटना का वास्तविक फोटो नहीं है | PT24

शिवसेना पार्टी और धनुष्यबाण चिन्ह को लेकर सुप्रीम कोर्ट में चल रही सुनवाई में आज शिंदे गुट की तरफ से सीनियर वकील नीरज किशन कौल ने अहम दलीलें रखीं। कौल ने 2019 की विधानसभा और लोकसभा चुनाव की वोटिंग का डेटा कोर्ट के सामने रखते हुए एकनाथ शिंदे के नेतृत्व वाले गुट का पक्ष रखा।

कौल ने बताया कि 2019 के महाराष्ट्र विधानसभा चुनाव में शिवसेना के जीते हुए 55 विधायकों को मिले कुल वोटों में से 76 प्रतिशत वोट उन 40 विधायकों के हलकों से आए थे जो एकनाथ शिंदे को सपोर्ट करते हैं। वहीं याचिकाकर्ताओं का साथ देने वाले 15 विधायकों के वोटों की हिस्सेदारी सिर्फ 23.5 प्रतिशत रही, यह बात उन्होंने कोर्ट में साफ कही।

इसके बाद कौल ने लोकसभा चुनाव के आंकड़े भी पेश किए। उन्होंने बताया कि शिवसेना के जीते हुए 18 सांसदों को मिले कुल वोटों में से 73 प्रतिशत वोट शिंदे को समर्थन देने वाले 13 सांसदों के हलकों से मिले। बाकी सांसदों के वोटों का हिस्सा सिर्फ 27 प्रतिशत रहा, यह आंकड़ा भी उन्होंने कोर्ट में रखा।

सुनवाई के दौरान कौल ने एक और अहम मुद्दा उठाया कि अपात्रता की कार्यवाही और चुनाव आयोग की तरफ से पार्टी और चिन्ह को लेकर लिया जाने वाला फैसला, ये दोनों बिल्कुल अलग अलग प्रक्रियाएं हैं। उनका कहना था कि दोनों प्रक्रियाओं के मकसद और उनमें देखे जाने वाले मुद्दे भी अलग अलग हैं। इसे साबित करने के लिए उन्होंने 'सुभाष देसाई' मामले में सुप्रीम कोर्ट के फैसले का हवाला दिया और कहा कि अपात्रता की कार्यवाही पेंडिंग रहने के दौरान चुनाव आयोग की कार्यवाही रोकना जरूरी नहीं है।

एकनाथ शिंदे के नेतृत्व वाली शिवसेना पर चल रही अपात्रता की कार्यवाही को लेकर भी कौल ने अपनी बात रखी। उन्होंने कोर्ट को बताया कि संबंधित अपात्रता के मामले पहले ही खारिज किए जा चुके हैं और उस आदेश पर कोई रोक नहीं लगाई गई है। कौल ने कोर्ट के सामने यह बात भी रखी कि सुप्रीम कोर्ट ने स्पेशल लीव पिटीशन पर नोटिस जरूर जारी किया है, लेकिन उस आदेश पर स्टे नहीं दिया गया है।

आगे कौल ने पार्टी और चुनाव चिन्ह को लेकर फैसला लेने के चुनाव आयोग के संवैधानिक अधिकारों पर भी जोर दिया। उनकी दलील थी कि 'चिन्ह आदेश' के तहत पार्टी के अंदर के विवाद और चुनाव चिन्ह से जुड़े सवालों को हैंडल करने का अधिकार आयोग के पास है।

इस मामले में अगली सुनवाई अगले हफ्ते मंगलवार या बुधवार को होगी। ऐसे में अगली सुनवाई में दोनों पक्षों की तरफ से कौन से मुद्दे उठाए जाते हैं और कोर्ट इस पर क्या टिप्पणी करता है, इस पर राजनीतिक हलकों की नजर टिकी हुई है।

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