शरद पूर्णिमा की रात लड्डू गोपाल की पूजा क्यों है खास, जानिए विधि और भोग
कोजागिरी पूर्णिमा रविवार, 25 अक्टूबर को मनाई जाएगी। इस दिन लड्डू गोपाल की पूजा, खीर का भोग और चंद्रमा की रोशनी का खास महत्व माना जाता है।
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हिंदू धर्म में कोजागिरी पूर्णिमा का खास धार्मिक महत्व है। यह त्योहार अश्विन महीने के शुक्ल पक्ष की पूर्णिमा को मनाया जाता है। इसे कोजागरी पूर्णिमा और रास पूर्णिमा भी कहा जाता है। इस साल कोजागिरी पूर्णिमा रविवार, 25 अक्टूबर को मनाई जाएगी।
यह त्योहार भगवान कृष्ण की महारस लीला से भी जुड़ा है। ब्रज की परंपरा के मुताबिक शरद पूर्णिमा की रात बहुत खास मानी जाती है। इसी वजह से भगवान कृष्ण के बाल रूप लड्डू गोपाल की पूजा करने वाले भक्त इस दिन उनकी पूजा खास श्रद्धा से करते हैं।
शरद पूर्णिमा को रास पूर्णिमा कहने की वजह भी यही धार्मिक मान्यता है। ब्रज परंपरा के अनुसार इसी पूर्णिमा की रात भगवान कृष्ण ने वृंदावन में गोपियों के साथ महारस लीला की थी। इस लीला को प्रेम, भक्ति और भगवान और उनके भक्तों के बीच आध्यात्मिक रिश्ते की निशानी माना जाता है।
लड्डू गोपाल भगवान कृष्ण का बाल रूप हैं। भक्त उन्हें अपने परिवार का ही एक हिस्सा मानते हैं और छोटे बच्चे की तरह उनकी सेवा करते हैं। इसलिए शरद पूर्णिमा जैसे खास मौके पर कई भक्त घर में शांति, प्यार और समृद्धि बनी रहे, इसके लिए उनसे प्रार्थना करते हैं। इस दिन कृष्ण मंदिरों में भजन और कीर्तन जैसे धार्मिक आयोजन होते हैं। साथ ही खास सजावट की जाती है और भोग चढ़ाया जाता है।
कोजागिरी पूर्णिमा पर खीर बनाकर उसे चांदनी में रखने की परंपरा बहुत लोकप्रिय है। धार्मिक मान्यता है कि इस रात की चंद्रकिरणें अमृत जैसी होती हैं। खीर दूध और चावल से बनती है और बाद में प्रसाद के तौर पर खाई जाती है। भक्त अपनी श्रद्धा के मुताबिक लड्डू गोपाल को भी खीर चढ़ा सकते हैं।
खीर के अलावा मक्खन और खड़ी शक्कर, दूध, फल और दूसरी सात्विक मिठाइयों का भोग भी लगाया जा सकता है। माना जाता है कि भगवान कृष्ण को मक्खन पसंद है, इसलिए कई भक्त खास मौकों पर उन्हें मक्खन और खड़ी शक्कर चढ़ाते हैं।
इस रात चंद्रमा और उसकी रोशनी की पूजा भी खास मानी जाती है। धार्मिक मान्यता के अनुसार इस रात चंद्रमा अपनी सोलहों कलाओं से पूरा होता है और उसकी किरणों में अमृत के गुण होते हैं। इसी वजह से कई लोग खीर को रात भर चांदनी में रखते हैं और अगले दिन प्रसाद के तौर पर खाते हैं। महारस लीला से जुड़ी श्रद्धा के कारण भी यह रात खास मानी जाती है, इसलिए कुछ भक्त चंद्रमा की पूजा के साथ भगवान कृष्ण और लड्डू गोपाल की भी पूजा करते हैं।
पूजा की विधि यह है कि कोजागिरी पूर्णिमा की सुबह नहाकर घर का देवघर साफ करें। फिर लड्डू गोपाल को साफ कपड़े पहनाकर अपनी परंपरा के हिसाब से सजाएं। मूर्ति के सामने दीया जलाएं, फूल चढ़ाएं और श्रद्धा से पूजा करें। इस दिन लड्डू गोपाल को खीर, माखन-मिश्री, फल या दूसरी सात्विक मिठाई चढ़ाई जा सकती है।
इसके बाद भगवान श्रीकृष्ण के मंत्रों का जाप करें, स्तोत्र गाएं और परिवार की सुख-समृद्धि के लिए प्रार्थना करें। पूजा पूरी होने पर भोग को परिवार के सदस्यों में प्रसाद के तौर पर बांट दें।
(धर्म, ज्योतिष, वास्तु, फेंगशुई जैसे विषयों के लेख और खबरें सिर्फ पाठकों की जानकारी के लिए हैं। इनसे जुड़ा कोई भी प्रयोग करने से पहले जानकारों की सलाह जरूरी है।)
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