शनि देव की पूजा घर में क्यों नहीं, मंदिर में क्यों: पत्नी के श्राप की कथा और पूजा के नियम
धार्मिक मान्यता के मुताबिक शनि देव की मूर्ति घर में नहीं रखी जाती और पूजा मंदिर में होती है। इसके पीछे उनकी पत्नी के श्राप की पौराणिक कथा बताई जाती है।
शनि देव का नाम सुनते ही कई लोगों के मन में डर बैठ जाता है। उन्हें सबसे कठोर देवता माना जाता है। वे न्याय के देवता हैं। ज्योतिष शास्त्र में कहा गया है कि इंसान के अच्छे और बुरे कर्मों का हिसाब करके वे फल देते हैं। इसीलिए उनकी पूजा में काफी सावधानी रखनी पड़ती है और नियम मानने पड़ते हैं।
इन नियमों में सबसे बड़ा नियम यह है कि शनि देव की पूजा घर में नहीं करनी चाहिए और उनकी मूर्ति भी घर में नहीं रखनी चाहिए। सवाल यह है कि ऐसा क्यों। इसका कारण समझते हैं।
हिंदू धर्म में हर देवता की पूजा का अपना अलग तरीका है। सिर्फ भक्ति काफी नहीं होती, नियम भी निभाने पड़ते हैं। मान्यता है कि नियम से की गई पूजा फल देती है, जबकि नियम तोड़ने पर बुरे नतीजे भी भुगतने पड़ सकते हैं। इसलिए जो लोग शनि जयंती पर या शनिवार को शनि देव की पूजा करने वाले हैं, उन्हें पहले यह नियम जान लेना चाहिए कि पूजा घर में क्यों नहीं होती।
इसके पीछे एक पौराणिक कथा बताई जाती है। कथा के मुताबिक शनि देव को उनकी पत्नी ने श्राप दिया था। श्राप यह था कि शनि देव जिसकी तरफ देखेंगे, उसका बुरा होगा। उनकी दृष्टि बहुत कठोर है और जिस पर पड़ेगी, उसे तकलीफ झेलनी पड़ेगी।
पूजा के वक्त हम देवता की आंखों में देखते हैं, मूर्ति की तरफ देखते हैं। अगर घर में शनि देव की मूर्ति हो और रोज उसे देखा जाए, तो माना जाता है कि उनकी उस श्रापित नजर से घर में नेगेटिव एनर्जी आती है।
कहा जाता है कि घर में नेगेटिव एनर्जी आए तो शांति चली जाती है, झगड़े होते हैं और खुशी निकल जाती है। घर के लोगों के कामों में रुकावट आती है और पैसे की तंगी रहती है। इसी वजह से मूर्ति घर में न रखने को कहा जाता है। इसकी जगह शनि मंदिर जाकर पूजा करना ज्यादा शुभ माना जाता है। शनिवार को लोग मंदिर जाकर ही पूजा करते हैं।
शनि जयंती या शनिवार को पूजा करनी हो तो सुबह जल्दी उठें, नहाकर साफ कपड़े पहनें और फिर मंदिर जाएं। शनि देव का पंचामृत या पंचगव्य से अभिषेक करें। उनकी मूर्ति को कुमकुम और काजल लगाएं। सरसों के तेल का दिया जलाएं और धूप लगाएं। शनि देव को काले फूल और तेल से बनी मिठाइयां चढ़ाना शुभ माना जाता है। काले तिल भी चढ़ाए जाते हैं।
इसके बाद मन से शनि देव के मंत्रों का जाप करें। 'ओम शं शनैश्चराय नमः' मंत्र का जाप करें, शनि चालीसा पढ़ें और आखिर में आरती करें। पूजा में कोई चूक हुई हो तो शनि देव से माफी मांगें, क्योंकि शनि देव माफ करने वाले भी हैं, बस आपके कर्म अच्छे होने चाहिए।
शनि देव से डरने की जरूरत नहीं है। वे सिर्फ बुरे कर्म करने वालों को सजा देते हैं। अगर आपके कर्म अच्छे हैं और आप किसी का बुरा नहीं करते, तो शनि देव आपका कभी बुरा नहीं करेंगे, बल्कि अच्छा फल देंगे। इसलिए घर में मूर्ति रखने की जगह मंदिर जाकर उनके दर्शन करें। हमेशा अच्छा बर्ताव करें, यही शनि देव को प्रसन्न करने का सबसे आसान रास्ता है।