सातारा बैंक के फैसले के बाद सांगली में चर्चा, चार निदेशकों की उम्मीदवारी पर सवाल
सातारा जिला मध्यवर्ती सहकारी बैंक के चुनाव में दस साल का कार्यकाल पूरा कर चुके निदेशकों के नामांकन अवैध ठहराए गए। इस फैसले के बाद सांगली बैंक चुनाव में भी चर्चा तेज हो गई है।
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सातारा जिला मध्यवर्ती सहकारी बैंक के चुनाव में उन निदेशकों के उम्मीदवारी आवेदन अवैध ठहराए गए हैं, जिनका निदेशक पद का दस साल का कार्यकाल पूरा हो चुका है। इस फैसले के बाद सांगली जिला मध्यवर्ती सहकारी बैंक के चुनाव में भी चर्चा जोरों पर है।
कोल्हापुर सर्किट बेंच के फैसले के बाद सांगली के चार निदेशकों की उम्मीदवारी को लेकर सवाल उठ रहे हैं। लेकिन सातारा के फैसले का सांगली की उम्मीदवारी पर सीधा असर पड़ेगा या नहीं, इस पर अभी कोई स्पष्टता नहीं है। इसलिए सहकारिता क्षेत्र की नजर अब कानूनी घटनाक्रम पर टिकी है।
सातारा जिला बैंक के चुनाव में दस साल का कार्यकाल पूरा कर चुके निदेशकों के उम्मीदवारी आवेदन को लेकर संजय मोरे ने अदालत में गुहार लगाई थी। इस मामले में कोल्हापुर सर्किट बेंच ने संबंधित निदेशकों के आवेदन अवैध ठहराने का फैसला दिया। इसके बाद सवाल उठा है कि क्या ऐसी ही स्थिति सांगली जिला बैंक में भी बन सकती है।
सांगली जिला मध्यवर्ती सहकारी बैंक के चुनाव के लिए उम्मीदवारी आवेदनों की जांच 5 अक्टूबर को हुई थी। उसके बाद 6 अक्टूबर को निर्वाचन निर्णय अधिकारी ने आधिकारिक फैसला जाहिर किया। इस प्रक्रिया में दस साल का निदेशक कार्यकाल पूरा कर चुके कुछ निदेशकों के आवेदन अवैध ठहराए गए थे। जानकारी है कि इस फैसले के खिलाफ संबंधित लोगों की ओर से न तो आपत्ति दर्ज की गई और न ही अदालत में गुहार लगाई गई।
सांगली जिला बैंक में दस साल का कार्यकाल पूरा होने के बावजूद उम्मीदवारी आवेदन दाखिल करने वाले निदेशकों में सांसद विशाल पाटील, संग्रामसिंह देशमुख, बालासाहेब होनमोरे और महेंद्र लाड शामिल हैं। सातारा बैंक के फैसले के बाद इन चारों की उम्मीदवारी को लेकर राजनीतिक और सहकारिता क्षेत्र में चर्चा शुरू हो गई है।
हालांकि सातारा और सांगली बैंक के मामले अलग-अलग हैं। इसलिए एक फैसले का दूसरे चुनाव पर अपने आप असर पड़ेगा ही, ऐसा नहीं है। संबंधित कानूनी प्रावधानों और आगे के अदालती घटनाक्रम से ही इस मामले की तस्वीर साफ होने की संभावना है।
इस बीच सातारा जिला बैंक के मामले में आए फैसले की पृष्ठभूमि में विधायक सदाभाऊ खोत ने भी इस विषय पर अपनी बात रखी है। खोत ने बताया कि सांगली जिला बैंक में उम्मीदवारी आवेदनों की जांच और सातारा बैंक का मामला भले अलग-अलग बातें हों, लेकिन इस विषय पर वे पहले ही अदालत जा चुके हैं।
इसलिए निर्वाचन निर्णय अधिकारी द्वारा लिए गए फैसले, उससे जुड़े कानूनी प्रावधानों और अदालती घटनाक्रम की अहमियत बढ़ गई है। सातारा बैंक के फैसले का सांगली की उम्मीदवारी पर आखिर क्या असर पड़ता है, इस पर अब सबकी नजर है।