मंगलवार, 6 अक्टूबर 2026

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19:47 IST

सरकारी योजनाओं के विज्ञापन पर 54.5 करोड़ रुपये खर्च, RTI और राज्यसभा के जवाब से आया आंकड़ा

RTI के जवाबों और राज्यसभा में दी गई जानकारी से सामने आया कि 10 प्रमुख योजनाओं और उपक्रमों के प्रचार पर सरकार ने कुल 54.5 करोड़ रुपये खर्च किए।

सरकारी योजनाओं के विज्ञापन पर 54.5 करोड़ रुपये खर्च, RTI और राज्यसभा के जवाब से आया आंकड़ा
एआई से बनाई गई प्रतीकात्मक तस्वीर; यह घटना का वास्तविक फोटो नहीं है | PT24

सरकार गरीब और जरूरतमंद लोगों के लिए तरह-तरह की कल्याणकारी योजनाएं चलाती है। सरकार चाहती है कि इन योजनाओं का फायदा ज्यादा से ज्यादा और सही लोग उठाएं। इसी वजह से योजनाओं की जानकारी लोगों तक पहुंचाने के लिए कई रास्ते अपनाए जाते हैं, और उनमें एक अहम रास्ता विज्ञापन का है। अब सवाल यह है कि इन विज्ञापनों पर सरकार का कितना पैसा लगा।

इसका ब्योरा RTI के तहत मिले जवाबों और राज्यसभा में दी गई जानकारी से सामने आया है। इस जानकारी के मुताबिक वित्त वर्ष 2023-24 और 2025-26 में 10 प्रमुख योजनाएं और उपक्रम बड़े पैमाने पर चलाए गए। इनके विज्ञापन भी बड़े पैमाने पर किए गए, और उन पर कुल 54.5 करोड़ रुपये खर्च हुए।

अब देखते हैं कि किस योजना पर कितना खर्च हुआ। जानकारी में दो प्रमुख योजनाओं का जिक्र है, PM Vishwakarma Scheme और PM Internship Scheme। PM Vishwakarma Scheme के प्रचार पर 7.4 करोड़ रुपये खर्च हुए, जबकि PM Internship Scheme के प्रचार पर 12.6 करोड़ रुपये लगे।

सबसे ज्यादा पैसा GST Bachat Utsav पर खर्च हुआ। इस पर अंदाजन 27.1 करोड़ रुपये लगे। यानी विज्ञापन के खर्च के मामले में यह योजना बाकी सब से आगे रही।

सरकार अपनी योजनाओं का प्रचार टीवी, रेडियो, सिनेमाघर, सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म, होर्डिंग और पोस्टर जैसे कई माध्यमों से करती है। विज्ञापन कई अलग-अलग जगहों पर दिए गए, लेकिन सबसे बड़ा हिस्सा एक ही माध्यम पर गया।

वह माध्यम प्रिंट मीडिया है। कुल खर्च में प्रिंट मीडिया का हिस्सा 58.8 प्रतिशत रहा। इलेक्ट्रॉनिक माध्यमों का हिस्सा 19.5 प्रतिशत था, और उसके बाद इलेक्ट्रॉनिक मीडिया का हिस्सा 14.6 प्रतिशत रहा। आउटडोर विज्ञापनों का हिस्सा 7.2 प्रतिशत था।

कुल मिलाकर RTI के जवाबों और राज्यसभा में दी गई जानकारी से यह तस्वीर बनी है कि 2023-24 और 2025-26 वित्त वर्षों में 10 प्रमुख योजनाओं और उपक्रमों के प्रचार पर 54.5 करोड़ रुपये का खर्च हुआ। इसमें GST Bachat Utsav पर सबसे ज्यादा, अंदाजन 27.1 करोड़ रुपये, और माध्यमों में प्रिंट मीडिया पर सबसे ज्यादा खर्च हुआ।

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