मंगलवार, 6 अक्टूबर 2026

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20:27 IST

सरकारी तिजोरी में टैक्स से रिकॉर्ड कमाई, जानिए जनता का पैसा कहां-कहां खर्च होता है

17 सितंबर तक सरकार ने डायरेक्ट टैक्स से 12.12 लाख करोड़ रुपये कमाए, जो पिछले साल से 13 प्रतिशत ज्यादा है। यह पैसा राज्यों के हिस्से से लेकर डिफेंस और पेंशन तक अलग-अलग मदों में बंटता है।

सरकारी तिजोरी में टैक्स से रिकॉर्ड कमाई, जानिए जनता का पैसा कहां-कहां खर्च होता है
एआई से बनाई गई प्रतीकात्मक तस्वीर; यह घटना का वास्तविक फोटो नहीं है | PT24

कमाई चाहे किसी बिजनेसमैन की हो या किसी नौकरीपेशा वाले की, उसकी इनकम का एक हिस्सा टैक्स के रूप में सरकार के पास जमा होता है। सवाल यह है कि सरकार की तिजोरी में जमा हुआ यह पैसा आखिर जाता कहां है और किन कामों में खर्च होता है।

यह समझना जरूरी है कि टैक्स से मिलने वाला पैसा किसी एक ही काम पर खर्च नहीं होता, बल्कि कई अलग-अलग जरूरी कामों में बंटता है। इनकम टैक्स और कॉरपोरेट टैक्स से सरकार को जो पैसा मिलता है, वह किसी एक जगह नहीं रखा जाता, बल्कि भारत के कंसॉलिडेटेड फंड में जमा होता है। इसके बाद सरकार इस पैसे को देश की अलग-अलग जरूरतों पर खर्च करती है। सरकार के बजट के हिसाब से यह पूरा खर्च अलग-अलग मदों में बंटा होता है और इन सबका जोड़ मिलाकर 100 प्रतिशत होता है।

अब बात करें कि यह पैसा किन-किन मदों में खर्च होता है, तो कुल खर्च का 22 प्रतिशत हिस्सा राज्यों को उनके टैक्स का हिस्सा देने में खर्च होता है। इसके बाद बचे हुए 20 प्रतिशत पैसे का इस्तेमाल ब्याज या कर्ज की किश्तें चुकाने में होता है। वहीं 17 प्रतिशत रकम सेंट्रल सेक्टर की स्कीमों पर खर्च की जाती है।

11 प्रतिशत पैसा डिफेंस पर यानी बॉर्डर की सिक्योरिटी और हथियार खरीदने पर लगता है। इसके अलावा मनरेगा और पीएम आवास योजना जैसी सेंट्रली स्पॉन्सर्ड स्कीमों पर 8 प्रतिशत रकम खर्च होती है। फाइनेंस कमीशन के ग्रांट और दूसरे ट्रांसफर पर 7 प्रतिशत पैसा जाता है।

बाकी बचे हिस्से में 7 प्रतिशत अन्य प्रशासनिक खर्चों के लिए, 6 प्रतिशत सब्सिडी के लिए और करीब 2 प्रतिशत पेंशन के लिए रखा जाता है। इस तरह इन सारे जरूरी कामों को मिलाकर पूरे खर्च का 100 प्रतिशत हिस्सा बन जाता है।

अब बात करें डायरेक्ट टैक्स रेवेन्यू की, तो 17 सितंबर तक सरकार ने डायरेक्ट टैक्स से 12.12 लाख करोड़ रुपये कमाए हैं। गौर करने वाली बात यह है कि यह रेवेन्यू पिछले साल के मुकाबले 13 प्रतिशत ज्यादा है। लेकिन सरकार इस पूरे रेवेन्यू को किसी एक सेक्टर में नहीं, बल्कि देश की जरूरत के हिसाब से कई अहम सेक्टरों में बांटकर खर्च करती है।

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