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रोहित पवार का आरोप: SIR का फैसला किसका, चुनाव आयोग के RTI जवाब पर उठाए सवाल

एनसीपी (शरद पवार गुट) के विधायक रोहित पवार ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में स्लाइड दिखाकर SIR प्रक्रिया और मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार पर सवाल उठाए।

रोहित पवार का आरोप: SIR का फैसला किसका, चुनाव आयोग के RTI जवाब पर उठाए सवाल तस्वीरें सत्यापित नहीं हैं

केंद्रीय चुनाव आयोग के मुख्य आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ माहौल गरमाता जा रहा है। कॉकरोच जनता पार्टी और राष्ट्रीय कॉंग्रेस ने उनके इस्तीफे की मांग पर आक्रामक रुख अपनाया है। इसी बीच राष्ट्रवादी काँग्रेस के शरद पवार गुट के विधायक रोहित पवार ने भी ज्ञानेश कुमार के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। उन्होंने आज प्रेस कॉन्फ्रेंस बुलाकर सीधे मीडिया से बात की।

"SIR - चुनाव आयोग के कारनामे" शीर्षक के तहत रोहित पवार ने कुछ स्लाइड्स दिखाईं और एक बार फिर गंभीर आरोप लगाए। उनका सवाल था कि SIR का फैसला आखिर किसका था। उन्होंने बताया कि सूचना के अधिकार (RTI) के तहत इस बारे में जानकारी मांगी गई थी और आयोग ने जो जवाब दिया, उसमें कुछ चौंकाने वाली बातें सामने आई हैं।

रोहित पवार ने एक अखबार की रिपोर्ट का हवाला देते हुए कई सवाल रखे। उनका कहना है कि देशभर में इतना बड़ा SIR अभियान चलाने का फैसला किसने लिया, कब लिया और किन अध्ययनों के आधार पर लिया गया। RTI के जवाब में कहा गया है कि चुनाव आयोग ने SIR प्रक्रिया शुरू करने का फैसला लिया ही नहीं। इस बारे में हुई बैठक के मिनट्स, बैठक में क्या चर्चा हुई, कब हुई और SIR की मंजूरी के रिकॉर्ड भी उपलब्ध नहीं हैं। रोहित पवार के दावे के मुताबिक कैबिनेट सचिव ने यह भी बताया है कि सरकार ने भी SIR को लेकर कोई फैसला नहीं लिया है। इसी आधार पर उन्होंने आयोग के जवाब पर सवालिया निशान लगाया।

मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) पर सवाल उठाते हुए रोहित पवार ने आरोप लगाया कि देश में बिना किसी ठोस सबूत के मनमाने ढंग से 13 करोड़ मतदाताओं को सूची से बाहर किया गया। उन्होंने नाम हटाने के तरीके पर आपत्ति जताई और चुनाव आयोग के कामकाज पर भी सवाल उठाए।

प्रेस कॉन्फ्रेंस में रोहित पवार ने चुनाव आयोग से मिले आंकड़े पेश किए। इनके मुताबिक देश में स्थायी रूप से दूसरी जगह जा चुके मतदाताओं की संख्या 6.30 करोड़ है, जिसमें महाराष्ट्र का आंकड़ा 76.76 लाख है। गैरहाजिर या जिनका पता नहीं मिल रहा, ऐसे मतदाता देश में 3.01 करोड़ हैं, जबकि महाराष्ट्र में 75.41 लाख। देश में 2.80 करोड़ मतदाता मृत दर्ज हैं, महाराष्ट्र में यह संख्या 34.82 लाख है। दोहरे नाम वाले मतदाता देश में 1.02 करोड़ हैं और महाराष्ट्र में 17.66 लाख। इन आंकड़ों के हवाले से उन्होंने SIR के दौरान देशभर में 13 करोड़ मतदाताओं को हटाए जाने का आरोप लगाया।

रोहित पवार ने कुछ मिसालें भी रखीं। उन्होंने बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की फोटो वाला वोटर आईडी कार्ड दिखाया, लेकिन दावा किया कि उस कार्ड पर नाम "अभिलाषा कुमारी" लिखा है। उन्होंने पूछा कि SIR के दौरान ऐसी गलतियां दूर क्यों नहीं की गईं या आयोग के ध्यान में क्यों नहीं आईं।

रोहित पवार ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को भ्रष्ट व्यक्ति बताया और कहा कि उनके कार्यकाल में भ्रष्टाचार हुआ है, यह दिखाई देता है। ये आरोप उन्होंने केरल में ज्ञानेश कुमार के सिविल अधिकारी रहते हुए एक मामले के संदर्भ में लगाए। ज्ञानेश कुमार 2006 में केरल कैडर के अधिकारी के तौर पर राज्य के लोक निर्माण विभाग में सचिव थे। उस दौरान मलेशियाई प्रोजेक्ट अधिकारी ली बीन सीन ने आत्महत्या की थी। इस घटना का जिक्र करते हुए रोहित पवार ने मामले की जांच की मांग की और कहा कि जांच करके जरूरी कार्रवाई होनी चाहिए।

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