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20:27 IST

रवी जाधव फिर लावणी पर, 'फुलवरा' 14 जनवरी 2027 को सिनेमाघरों में

झी स्टुडिओज और रवी जाधव 16 साल बाद फिर लावणी और तमाशा पर सिनेमा लेकर आ रहे हैं, नाम है 'फुलवरा'।

रवी जाधव फिर लावणी पर, 'फुलवरा' 14 जनवरी 2027 को सिनेमाघरों में
एआई से बनाई गई प्रतीकात्मक तस्वीर; यह घटना का वास्तविक फोटो नहीं है | PT24

घुंगरू की आवाज, ढोलकी का ठेका और असली मराठी माटी की खुशबू, यही तो लावणी की पहचान है। 16 साल पहले आई फिल्म 'नटरंग' ने पूरे महाराष्ट्र को दीवाना बना दिया था। उस फिल्म के गुणा और उसकी लावणी को लोग आज तक नहीं भूले। अब उतने ही साल बाद वही जोड़ी यानी झी स्टुडिओज और डायरेक्टर रवी जाधव फिर एक बार लावणी पर सिनेमा लेकर आ रहे हैं, फिल्म का नाम है 'फुलवरा'।

फिल्म की टीम ने अब रिलीज डेट का ऐलान कर दिया है। 'फुलवरा' मकर संक्रांति यानी 14 जनवरी 2027 को सिनेमाघरों में आएगी। संक्रांति के मुहूर्त पर ही यह फिल्म दर्शकों के सामने आ रही है। इस ऐलान के साथ एक पोस्टर भी रिलीज किया गया है, जिसमें पूजा की थाली में देवी अंबाबाई का मुखवटा दिखाया गया है। पोस्टर के नीचे लिखा है, आई अंबाबाई का आशीर्वाद लो और असली मराठी लावणी को ताकत दो। इसी एक लाइन से पता चल जाता है कि फिल्म का विषय क्या है, यानी असली मराठी लावणी। हालांकि कहानी क्या है और कलाकार कौन हैं, यह अभी तक राज ही रखा गया है।

फिल्म का संगीत 'द फोक आख्यान' फेम हर्ष-विजय की जोड़ी ने दिया है, जो आजकल लोकसंगीत में खूब नाम कमा रही है और लोककला पर इनकी अच्छी पकड़ है। कहानी, पटकथा, डायलॉग और गाने भी 'द फोक आख्यान' के ही लेखक ईश्वर ताराबाई अंधारे ने लिखे हैं। एक तरफ लोककला की पढ़ाई करने वाली नई पीढ़ी और दूसरी तरफ रवी जाधव का लंबा अनुभव, इन दोनों का मेल इस फिल्म में देखने को मिलेगा। कहा जा रहा है कि यह फिल्म सिर्फ लावणी का डांस नहीं दिखाएगी बल्कि उसके पीछे की संस्कृति, परंपरा और आज के दौर में लावणी कैसे बदलती गई, यह भी दिखाएगी।

फिल्म के बारे में बात करते हुए रवी जाधव ने कहा, "नटरंग के 16 साल बाद फिर तमाशे पर फिल्म बनाना सच में हिम्मत का काम है, क्योंकि तमाशा महाराष्ट्र की लोककला की जान है और लावणी उस लोककला की रानी है। इतनी बड़ी परंपरा पर फिल्म बनाना बहुत बड़ी जिम्मेदारी है, और उसी जिम्मेदारी को समझते हुए हमने फुलवरा बनाई है।" उन्होंने आगे कहा, "नटरंग की कहानी 70 के दशक की थी, जबकि फुलवरा की कहानी 2015 की है। इन 50-55 सालों में तमाशा बहुत बदल गया, लेकिन आज भी तमाशा कलाकार अपनी असली मराठी कला को बचाने के लिए जूझ रहे हैं। इसके लिए उनका संघर्ष और त्याग बहुत बड़ा है। उम्मीद है कि हमारे इस फुलवरा को भी लोग नटरंग जितना ही प्यार देंगे।"

झी स्टुडिओज के बवेश जानवलेकर ने कहा, "झी स्टुडिओज, रवी जाधव और लावणी का यह समीकरण फिर से आ रहा है, इसकी हमें बहुत खुशी है। कहानी सुनने के बाद से ही हमें इस फिल्म को लेकर उत्सुकता थी। नए साल की शुरुआत फुलवरा के साथ अच्छी होगी, इसका हमें भरोसा है। दर्शकों को असली लावणी का अंदाज देखने को मिलेगा।" अब 14 जनवरी 2027 को फुलवरा सिनेमाघरों में दस्तक देगी। यह देखना दिलचस्प होगा कि जो छाप नटरंग ने छोड़ी थी, क्या वही छाप फुलवरा भी छोड़ पाती है या नहीं।

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