रवी जाधव की नई लावणी फिल्म 'फुलवरा' का टीजर आया, 14 जनवरी 2027 को सिनेमाघरों में
तस्वीरें सत्यापित नहीं हैं
'नटरंग' के 16 साल बाद निर्देशक रवी जाधव और झी स्टुडिओज फिर लावणी की दुनिया में लौट रहे हैं। टीजर में चेहरे नहीं, सिर्फ पैर दिखे हैं।
लावणी का नाम आते ही घुंगरू की आवाज, ढोलकी की थाप और महाराष्ट्र की मिट्टी की खुशबू याद आती है। 'नटरंग' फिल्म याद है? यह फिल्म 16 साल पहले रिलीज हुई थी और उसने पूरे महाराष्ट्र को सचमुच दीवाना बना दिया था। गुणा और उसकी लावणी आज भी दर्शकों को याद है।
अब पूरे 16 साल बाद निर्देशक रवी जाधव और झी स्टुडिओज एक बार फिर लावणी की दुनिया में नई फिल्म लेकर आ रहे हैं। इस फिल्म का नाम 'फुलवरा' है। फिल्म का टीजर हाल ही में दर्शकों के सामने आया है और इसने सिनेमा के शौकीनों की उत्सुकता बढ़ा दी है।
टीजर देखने पर अंदाजा मिलता है कि 'फुलवरा' असली मराठी लावणी और लोककला की पृष्ठभूमि पर बनी है। इसमें घुंगरू की आवाज, लावणी की थाप और पारंपरिक माहौल देखने को मिलता है। खास बात यह है कि टीजर में अंबाबाई का मुखौटा भी दिखाया गया है।
पूरे टीजर में कलाकारों के चेहरे नहीं दिखाए गए हैं, सिर्फ उनके पैर दिखते हैं। इसी वजह से यह जानने की उत्सुकता और बढ़ गई है कि फिल्म में कौन से कलाकार नजर आएंगे। फिल्म की कहानी और कलाकारों के नाम अभी तक गुप्त रखे गए हैं।
फिल्म मकर संक्रांति के मौके पर, यानी 14 जनवरी 2027 को सिनेमाघरों में रिलीज होगी। यानी त्योहार के मौके पर यह फिल्म दर्शकों तक पहुंचेगी।
फिल्म के संगीत की जिम्मेदारी 'द फोक आख्यान' से पहचाने जाने वाली जोड़ी हर्ष-विजय ने संभाली है। लोकसंगीत में अलग तरह के प्रयोगों की वजह से यह जोड़ी इन दिनों चर्चा में है। फिल्म की कहानी, पटकथा, संवाद और गाने ईश्वर ताराबाई अंधारे ने लिखे हैं। 'द फोक आख्यान' में उनके लेखन के बाद अब वे 'फुलवरा' के जरिए एक बार फिर लोककला से जुड़ा विषय सामने रखने जा रहे हैं।
रवी जाधव के फिल्म बनाने के तजुर्बे और लोककला का अध्ययन करने वाली नई पीढ़ी के जुड़ने से 'फुलवरा' से दर्शकों की उम्मीदें बढ़ गई हैं। अब दर्शकों को यह जानने की उत्सुकता है कि फिल्म सिर्फ लावणी और नृत्य तक सीमित रहेगी, या लावणी के पीछे की संस्कृति, परंपरा और वक्त के साथ इस लोककला में आए बदलावों को भी सामने लाएगी।
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