शनिवार, 7 नवंबर 2026

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राष्ट्रीय विधी सेवा दिन: चंद्रपुर में लोक अभिरक्षक कार्यालय ने साल भर में 1748 बंदियों को दी मुफ्त सलाह

राष्ट्रीय विधी सेवा दिन: चंद्रपुर में लोक अभिरक्षक कार्यालय ने साल भर में 1748 बंदियों को दी मुफ्त सलाह तस्वीरें सत्यापित नहीं हैं
समाज PT24 टीम

राष्ट्रीय विधी सेवा दिन पर चंद्रपुर के मुख्य लोक अभिरक्षक एडवोकेट विनोद बोरसे ने गरीबों और कमजोर तबके से मुफ्त कानूनी मदद का फायदा उठाने की अपील की और साल भर के काम का ब्योरा दिया।

चंद्रपुर जिला न्यायालय में विधी सेवा प्राधिकरण के तहत चलने वाले लोक अभिरक्षक कार्यालय के मुख्य लोक अभिरक्षक एडवोकेट विनोद बोरसे का कहना है कि प्राधिकरण के कामों में आम लोगों की भागीदारी और बढ़नी चाहिए। राष्ट्रीय विधी सेवा दिन के मौके पर उन्होंने कहा कि कोई भी इंसान इंसाफ से महरूम न रहे और जरूरतमंद को मुफ्त कानूनी सेवा मिले, इसी मकसद से राष्ट्रीय विधी सेवा प्राधिकरण काम करता है।

बोरसे के मुताबिक प्राधिकरण के कार्यक्रम जनहित के हैं और समाज के कमजोर तबके को मुफ्त कानूनी मदद देने में लोगों का आगे आना जरूरी है। लोगों को अपनी तरफ से इन कार्यक्रमों में शामिल होकर प्राधिकरण की योजनाओं का फायदा लेना चाहिए।

यह दिन 9 नवंबर को क्यों मनाया जाता है, इसका जवाब कानून की तारीखों में है। गरीब, कमजोर और वंचित लोगों को मुफ्त और असरदार कानूनी सेवा देने के लिए विधी सेवा प्राधिकरण कानून 1987 में पास हुआ था। इस कानून पर अमल 9 नवंबर 1995 से शुरू हुआ, इसलिए हर साल इसी तारीख को राष्ट्रीय विधी सेवा दिन मनाया जाता है।

जिला विधी सेवा प्राधिकरण के जरिए कई तरह के काम होते हैं। जरूरतमंदों को मुफ्त कानूनी सेवा और मदद दी जाती है, लोक अदालतें लगाई जाती हैं और पति-पत्नी के झगड़े मध्यस्थता और समझौते से सुलझाए जाते हैं। कानूनी जानकारी के शिविर लगते हैं, जेल के कैदियों और विचाराधीन बंदियों को मुफ्त कानूनी सेवा मिलती है और राष्ट्रीय विधी सेवा प्राधिकरण की अलग-अलग योजनाओं की जानकारी आम जनता तक पहुंचाई जाती है।

जो लोग अदालती सुनवाई के लिए वकील की फीस नहीं भर सकते, उन्हें मुफ्त कानूनी सेवा दी जाती है। इसमें हिरासत में लिए गए लोग, जेल के कैदी, महिलाएं, बच्चे, अनुसूचित जाति और जनजाति के सदस्य, मानसिक रूप से बीमार या शारीरिक रूप से दिव्यांग और अक्षम लोग शामिल हैं। मानव तस्करी के शिकार, सामूहिक आपदा, नस्ली हिंसा, जातीय अत्याचार, बाढ़, सूखा, भूकंप और औद्योगिक आपदा के पीड़ित, औद्योगिक मजदूर और वे लोग भी इसके हकदार हैं जिनकी सालाना आमदनी तीन लाख रुपये से कम है।

लोक अभिरक्षक कार्यालय जिला विधी सेवा प्राधिकरण के तहत ही काम करता है। इसके जरिए जिला जेल का दौरा किया जाता है। जेल के विधी सेवा क्लिनिक में कैदियों और विचाराधीन बंदियों को मुफ्त कानूनी सेवा और मदद मिलती है। रोज की अदालती कार्यवाही में जरूरतमंदों को मुफ्त कानूनी सलाह दी जाती है, और रोज के दिनों में तथा छुट्टी के दिन रिमांड के वक्त भी मुफ्त कानूनी सेवा दी जाती है।

कार्यालय के काम का आंकड़ा यह है: रिमांड के 161 काम, 114 जमानत अर्जियां निपटाई गईं, 211 गवाहों की जांच हुई और 67 मामले निपटे। दफ्तर में जरूरतमंदों को 128 बार मुफ्त सलाह दी गई, जबकि जेल के विधी सेवा क्लिनिक में विचाराधीन बंदियों को 1748 बार मुफ्त सलाह दी गई। जेल के 168 दौरे किए गए। यह काम पिछले एक साल में कार्यालय के जरिए हुआ है।

कार्यालय का काम चंद्रपुर जिला न्यायालय के प्रमुख जिला व सत्र न्यायाधीश और जिला विधी सेवा प्राधिकरण के अध्यक्ष अभय लाहोटी तथा प्राधिकरण के सचिव और वरिष्ठ स्तर दिवानी न्यायाधीश सुधीर इंगले के प्रशासकीय मार्गदर्शन में चलता है। मुख्य लोक अभिरक्षक के तौर पर एडवोकेट विनोद बोरसे और सहायक लोक अभिरक्षक के तौर पर एडवोकेट अनुपमा फलके और एडवोकेट साकिया शेख फिलहाल काम कर रहे हैं।

राष्ट्रीय विधी सेवा दिन के मौके पर बोरसे ने समाज के वंचित और जरूरतमंद लोगों से विधी सेवा प्राधिकरण की योजनाओं का फायदा लेने की अपील की है।

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