सोम‌वार, 26 अक्टूबर 2026

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राजेश डोंगरे पेसा कानून के राज्यस्तरीय मास्टर प्रशिक्षक के लिए चुने गए

महाराष्ट्र से राजेश सुखदेव डोंगरे का चयन पेसा कानून पर राज्यस्तरीय मास्टर प्रशिक्षकों के प्रशिक्षण के लिए हुआ है।

पेसा कानून पर होने वाले राज्यस्तरीय मास्टर प्रशिक्षकों के प्रशिक्षण कार्यक्रम के लिए महाराष्ट्र से राजेश सुखदेव डोंगरे को चुना गया है। ग्रामीण विकास के क्षेत्र में उनका बीस साल का अनुभव है। इसके अलावा 2014 से गडचिरोली और चंद्रपुर जिलों में उन्होंने पेसा कानून को लेकर जागरूकता फैलाई और प्रशिक्षण दिए। इसी काम को देखते हुए उनका चयन हुआ है। उनके चयन से ग्रामीण विकास के कार्यकर्ताओं और पेसा कानून को ठीक से लागू कराने के लिए काम करने वालों में खुशी है।

ग्रामीण विकास में लंबा अनुभव, पेसा कानून की समझ और जागरूकता के काम के दम पर हुए इस चयन को राजेश डोंगरे के काम की पहचान माना जा रहा है। ग्रामीण विकास क्षेत्र के साथी, अनुभवी प्रशिक्षक, प्रशासनिक अधिकारी और जान-पहचान के लोग उन्हें बधाई दे रहे हैं।

यह प्रशिक्षण भारत सरकार के पंचायत राज मंत्रालय के पेसा और पंचायत राज विभाग की सूचना के मुताबिक वित्त वर्ष 2026-27 के लिए रखा जा रहा है। इसके लिए आंध्र प्रदेश के विजयवाड़ा की आंध्र प्रदेश राज्य ग्रामीण विकास और पंचायत राज संस्था (APSIRD&PR) को मुख्य प्रशिक्षण संस्था बनाया गया है। प्रशिक्षण 28 से 29 अक्टूबर 2026 के बीच होगा। इसमें पेसा कानून के तहत लघु वनउपज से जुड़ी अलग-अलग बातों पर मार्गदर्शन दिया जाएगा।

हर संबंधित राज्य से पांच योग्य और अनुभवी प्रतिभागी चुनने के निर्देश दिए गए हैं। महाराष्ट्र सरकार के ग्रामीण विकास और पंचायत राज विभाग ने भी राज्यस्तरीय प्रशिक्षण के लिए अनुभवी प्रशिक्षकों के नामांकन को मंजूरी दी है। इसी के तहत राजेश सुखदेव डोंगरे का चयन हुआ।

राजेश डोंगरे ने 2014 से गडचिरोली और चंद्रपुर जैसे आदिवासी बहुल जिलों में पेसा कानून के बारे में लोगों को जागरूक किया है। प्रशिक्षण, ग्रामसभा, स्थानीय स्वशासन संस्थाओं और गांव के लोगों तक कानून की जानकारी पहुंचाने की उन्होंने कोशिश की। अनुसूचित क्षेत्र में ग्रामसभाओं के अधिकार, स्थानीय स्वशासन संस्थाओं की भूमिका, पेसा कानून को लागू करना और आदिवासी समाज के विकास से जुड़े कई विषयों पर वे प्रशिक्षण के जरिए जागरूकता लाने की कोशिश करते रहे हैं।

राजेश सुखदेव डोंगरे परिवर्तन ग्रामीण विकास बहुउद्देशीय संस्था के संस्थापक अध्यक्ष हैं। संस्था गोजोली मक्ता, तहसील गोंडपिपरी, जिला चंद्रपुर में है। पिछले बीस साल से वे ग्रामीण विकास के अलग-अलग पहलुओं पर प्रशिक्षण देते आ रहे हैं। गांव के सामाजिक, शैक्षणिक और विकास से जुड़े सवालों का अध्ययन कर स्थानीय स्तर पर क्षमता विकास पर उन्होंने जोर दिया है। ग्रामीण विकास की योजनाओं की जानकारी, स्थानीय स्वशासन संस्थाओं के कामकाज का तरीका और गांव के विकास में लोगों की भागीदारी बढ़ाने जैसे विषयों पर भी वे अपने अनुभव के आधार पर मार्गदर्शन कर चुके हैं।

प्रशिक्षण के साथ-साथ राजेश डोंगरे ने पत्रकारिता के जरिए भी ग्रामीण इलाकों के सवाल उठाए हैं। ग्रामीणों की समस्याओं, विकास कामों की अड़चनों और लोगों के सवालों की ओर प्रशासन का ध्यान खींचने के लिए उन्होंने अपनी कलम का इस्तेमाल किया। ग्रामीण विकास क्षेत्र का सीधा अनुभव और पत्रकारिता से मिली सामाजिक सवालों की समझ, दोनों उनके काम का अहम हिस्सा हैं।

पेसा कानून को असरदार तरीके से लागू करने के लिए सिर्फ कानून की जानकारी काफी नहीं है। इसके लिए मैदान का अनुभव, स्थानीय हालात की समझ और प्रशिक्षण देने की क्षमता भी जरूरी है। पिछले कई साल में ग्रामीण विकास में राजेश डोंगरे का किया काम और पेसा कानून की जागरूकता में उनका योगदान उनके चयन में अहम रहा। विजयवाड़ा में होने वाले इस राज्यस्तरीय प्रशिक्षण से लघु वनउपज से जुड़ी बातों, पेसा कानून को लागू करने और अनुसूचित क्षेत्र में विकास की प्रक्रिया के बारे में ज्यादा जानकारी और प्रशिक्षण मिलने का मौका होगा।

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