पुणे के चाकण में बनेगा क्रैश टेस्ट सेंटर, स्कोडा ऑटो फोक्सवैगन और ARAI में करार
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स्कोडा ऑटो फोक्सवैगन इंडिया और ARAI ने चाकण, पुणे में वाहन सुरक्षा और टेस्टिंग का ढाँचा बढ़ाने के लिए समझौता किया है।
स्कोडा ऑटो फोक्सवैगन इंडिया प्राइवेट लिमिटेड (SAVWIPL) और ऑटोमोटिव रिसर्च असोसिएशन ऑफ इंडिया (ARAI) ने एक ऐतिहासिक सामंजस्य करार पर दस्तखत किए हैं। इसका मकसद चाकण, पुणे में वाहन सुरक्षा और टेस्टिंग का ढांचा बढ़ाना है।
करार के मुताबिक SAVWIPL अपने चाकण प्लांट के पास की जमीन ARAI को सौंपेगी। उस जमीन पर भविष्य की मोबिलिटी गाड़ियों के लिए अत्याधुनिक क्रैश टेस्ट सुविधा खड़ी की जाएगी।
यह करार केंद्रीय भारी उद्योग और इस्पात मंत्री एच.डी. कुमारस्वामी, SAVWIPL के मैनेजिंग डायरेक्टर और CEO पीयूष अरोरा और ARAI के डायरेक्टर डॉ. रेजी मथाई की मौजूदगी में हुआ। नई सुविधा से इलेक्ट्रिक गाड़ियों की टेस्टिंग, सुरक्षा मानकों और भारत NCAP के आकलन को और रफ्तार मिलेगी।
केंद्रीय मंत्री एच.डी. कुमारस्वामी ने कहा, "भारत का ऑटोमोटिव सेक्टर तेजी से आगे बढ़ रहा है, ऐसे में लोकल R&D और सेफ्टी टेस्टिंग का ढांचा बढ़ाना बहुत जरूरी है। चाकण में यह सुविधा बनाकर हम भविष्य की भारत NCAP की जरूरतों को जल्दी लागू करने में मदद कर रहे हैं। इससे भारत की सड़क सुरक्षा की चुनौतियों से निपटने के साथ-साथ ऐसी गाड़ियां बनाने में मदद मिलेगी, जो ग्लोबल बाजार की सख्त जरूरतें पूरी करें।"
स्कोडा ऑटो फोक्सवैगन इंडिया के मैनेजिंग डायरेक्टर और CEO पीयूष अरोरा ने कहा, "गाड़ियों की सुरक्षा और लोकल इंजीनियरिंग की क्षमता हमारे कामकाज के केंद्र में है। ARAI को हमारे चाकण प्लांट के बगल में क्रैश टेस्ट सुविधा के लिए जमीन चाहिए थी, तो हमने अपने भविष्य के विस्तार के प्लान में जरूरी बदलाव किए। हमारी 'इंडिया 2.0' गाड़ियों को ग्लोबल NCAP से 5-स्टार रेटिंग मिली है। यह रणनीतिक साझेदारी भारत में ज्यादा सुरक्षित गाड़ियों के विकास और EV तकनीक को रफ्तार देगी।"
ARAI के डायरेक्टर डॉ. रेजी मथाई ने कहा, "यह सामंजस्य करार भारत के ऑटोमोटिव टेस्टिंग और सेफ्टी ढांचे में एक रणनीतिक मील का पत्थर है। गाड़ियों की तकनीक तेजी से बदल रही है, इसलिए एडवांस्ड वैलिडेशन और क्रैश टेस्ट की क्षमता की जरूरत लगातार बढ़ती रहेगी। आने वाले कई दशकों तक मोबिलिटी सेक्टर के काम आने वाला वर्ल्ड क्लास सिस्टम खड़ा करने की दिशा में यह अहम कदम है।"
इस परियोजना से भारत में वाहन रिसर्च, लोकल इंजीनियरिंग और सुरक्षित कार डेवलपमेंट को नई दिशा मिलने की संभावना है।
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