पोंभूर्णा में विसर्जन जुलूस के दौरान रास्ता रोकने का आरोप, 21 नामजद पर केस दर्ज
पोंभूर्णा पुलिस ने गणपति विसर्जन जुलूस में बस स्टेशन चौक का रास्ता रोकने और पुलिसवालों से धक्कामुक्की के आरोप में केस दर्ज किया है।
पोंभूर्णा (चंद्रपुर) में गणपति विसर्जन जुलूस के दौरान बस स्टेशन चौक पर रास्ता रोकने के आरोप में पुलिस ने केस दर्ज किया है। पुलिस की शिकायत के मुताबिक जुलूस के लिए प्रशासन की परमिशन नहीं थी। तेली मोहल्ला के एक गणेश मंडल के 21 नामजद कार्यकर्ताओं और कुछ दूसरे लोगों पर मामला दर्ज हुआ है।
पुलिस के मुताबिक यह वाकया 28 सितंबर की रात का है। आरोप है कि जुलूस आगे बढ़ाने की सूचनाओं को अनसुना किया गया और पुलिसवालों से धक्कामुक्की हुई। भारतीय न्याय संहिता (BNS) और महाराष्ट्र दारूबंदी कानून की अलग-अलग धाराओं के तहत आगे की जांच चल रही है।
पोंभूर्णा पुलिस ने विघ्नहर्ता गणेश मंडल, हनुमान चौक, तेली मोहल्ला के 21 नामजद कार्यकर्ताओं के साथ 8 से 10 अन्य महिला-पुरुषों पर भी केस दर्ज किया है। आरोप है कि बिना प्रशासन की इजाजत और शराब पीकर जुलूस निकाला गया, जिससे कानून-व्यवस्था का सवाल खड़ा हो गया।
पुलिस की जानकारी के मुताबिक 28 सितंबर की रात मंडल के पदाधिकारी और कार्यकर्ता शराब पीकर विसर्जन जुलूस निकाल रहे थे। पुलिस और प्रशासन की तरफ से जुलूस आगे ले जाने को बार-बार कहा गया, पर आरोप है कि कार्यकर्ताओं ने इसे नजरअंदाज किया। आरोप है कि भीड़ जमा करके उन्होंने ट्रैक्टर (नंबर MH 34 BR 0939) और दूसरी गाड़ियां बस स्टेशन चौक की मुख्य सड़क पर खड़ी कर दीं और रास्ता पूरी तरह बंद कर दिया। यह भी आरोप है कि साथियों को सड़क पर बैठने के लिए उकसाया गया और पीछे शास्त्री नगर के सूर्यदेव गणेश मंडल के विसर्जन जुलूस को आगे जाने से रोका गया।
पुलिस और प्रशासन ने हालात संभालने की कोशिश की तो कार्यकर्ताओं ने यह कहकर बहस की कि "हमें रात 11 बजे तक परमिशन है, आप हमें आगे जाने को क्यों कह रहे हैं?" इसी बीच नाचने को लेकर मंडल के कार्यकर्ताओं में आपस में झगड़ा शुरू हो गया। पुलिस ने बीच-बचाव किया तो आरोप है कि गुस्साए कार्यकर्ताओं ने ड्यूटी पर तैनात पुलिसवालों से ही धक्कामुक्की की। माहौल बिगड़ता देख सहायक पुलिस निरीक्षक और पुलिसकर्मियों ने समझाने की कोशिश की, लेकिन आरोप है कि कार्यकर्ताओं ने गाड़ियां सड़क पर ही खड़ी रखीं। एक महिला पुलिसकर्मी ने समझाना चाहा तो आरोप है कि अलका नैताम नाम की महिला ने उनसे झूमाझटकी और मारपीट की और लोगों को सड़क पर बैठने के लिए उकसाया।
मामले की गंभीरता देखकर पोंभूर्णा के तहसीलदार, मुख्याधिकारी और मूल के उपविभागीय पुलिस अधिकारी खुद मौके पर पहुंचे और आंदोलन कर रहे कार्यकर्ताओं को समझाने की कोशिश की। आरोप है कि इसके बाद भी मंडल के पदाधिकारी और कार्यकर्ता सड़क पर डटे रहे और पुलिस के खिलाफ "बर्खास्त करो, निलंबित करो" के नारे लगाते हुए शोर मचाते रहे। पुलिस के मुताबिक यह सब 28 सितंबर की रात 8:15 बजे से 29 सितंबर की सुबह 1:30 बजे तक चलता रहा।
सरकारी आदेश का उल्लंघन कर भीड़ जमा करने, बहस करने, उकसाने, मुख्य सड़क रोकने और पुलिस के काम में बाधा डालने के आरोप में पुलिस अंमलदार मंगेश कनिराम श्रीरामे की शिकायत पर पोंभूर्णा पुलिस स्टेशन में केस दर्ज हुआ है। आरोपियों में बालाजी वसंत भांडेकर, कपिल लक्ष्मण बावणे, राहुल प्रभाकर देवतळे, वृषभ अरुण नैताम, महेश अरुण नैताम, अमित नंदकिशोर नैताम, अमित दादाजी भांडेकर, अजित सदाशिव धोडरे, प्रतीक शालीक दुधबळे, राकेश ऋषीदेव देवतळे, निखिल संतोष शेट्टे, साहिल बाळू नैताम, विनोद अशोक चांदेकर और संतोष उद्धव पारलेवार के नाम हैं। इनके अलावा दिनेश नैताम, निखिल आरमिडवार, जयंत टेकाम, राकेश मोगरकर, गुणवंत उर्फ अनुराग धोडरे, संदेश धोडरे और अलका नैताम फरार बताए गए हैं। इन 21 आरोपियों पर BNS और महाराष्ट्र दारूबंदी कानून की अलग-अलग धाराओं में केस दर्ज है। आगे की जांच पुलिस निरीक्षक राहुल शंकर ठेंगणे के मार्गदर्शन में चल रही है।
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