पितृपक्ष में श्राद्ध की थाली में क्यों होती है कद्दू की सब्जी, जानिए मान्यता
पितृपक्ष में सात्विक भोजन के तौर पर श्राद्ध की थाली में कद्दू की सब्जी रखी जाती है, जानिए इससे जुड़ी मान्यताएं।
हिंदू धर्म में पितृपक्ष को पूर्वजों के प्रति आदर और कृतज्ञता जताने का खास समय माना जाता है। इन दिनों श्राद्ध, तर्पण और पिंडदान के साथ खान-पान से जुड़ी कई परंपराएं भी निभाई जाती हैं। ऐसी ही एक परंपरा है पितृपक्ष में कद्दू की सब्जी बनाना। कई परिवारों में कद्दू को सात्विक और शुद्ध सब्जी माना जाता है, इसलिए श्राद्ध के खाने में उसे खास तौर पर रखा जाता है।
धार्मिक मान्यता के मुताबिक पितृपक्ष में पूर्वजों को सात्विक भोजन अर्पित करने से उनका आशीर्वाद मिलता है और परिवार में शांति और खुशी बनी रहती है। कद्दू को लेकर अलग-अलग इलाकों की परंपराओं में भी फर्क दिखता है। अब यह देखते हैं कि पितृपक्ष में कद्दू की सब्जी को इतना महत्व क्यों दिया जाता है।
अमेरिका से आया कद्दू आज भारतीय रसोई की एक मुख्य चीज बन चुका है। इसे काशीफल, कुमरा और पेठा जैसे नामों से भी जाना जाता है। आयुर्वेद में इसे औषधीय फल माना गया है। पितृपक्ष में इसकी अहमियत कई गुना बढ़ जाती है, क्योंकि इन दिनों कई घरों में प्याज या लहसुन डाले बिना खट्टी-मीठी कद्दू की सब्जी बनाई जाती है।
पितृपक्ष में पूर्वजों के लिए श्राद्ध, तर्पण और पिंडदान करने के साथ ब्राह्मणों को भोजन कराने और उनके लिए सात्विक खाना तैयार करने की भी परंपरा है। इस भोजन में धार्मिक और पारंपरिक महत्व वाले कई व्यंजन शामिल होते हैं। इन्हीं में से एक है कद्दू की सब्जी।
धार्मिक और लोक मान्यता के अनुसार पूर्वजों के लिए बनाया गया नैवेद्य सात्विक और शुद्ध होना चाहिए। कद्दू भी एक सात्विक सब्जी मानी जाती है, इसीलिए कई जगह श्राद्ध की विधियों में उसका खास इस्तेमाल होता है। माना जाता है कि पूर्वजों के लिए तैयार किया गया सात्विक नैवेद्य उन्हें प्रसन्न करता है और परिवार पर उनका आशीर्वाद बना रहता है।
कद्दू की एक और खासियत यह है कि वह प्याज और लहसुन के बिना आसानी से बन जाता है। पितृपक्ष में तामसिक चीजों से परहेज किया जाता है, इसलिए यह सादी, सात्विक और हल्की सब्जी श्राद्ध की थाली का हिस्सा बन जाती है।
भारत के अलग-अलग हिस्सों में कद्दू से जुड़ी कई लोक मान्यताएं हैं। कुछ इलाकों में उसे परिवार के सबसे बड़े बेटे का प्रतीक भी माना जाता है। इसी वजह से कुछ परिवारों में महिलाएं कद्दू को सीधे नहीं काटतीं। पहले घर का पुरुष कद्दू के दो बराबर हिस्से करता है और उसके बाद महिलाएं सब्जी बनाने के लिए उसके छोटे टुकड़े काटती हैं। कुछ जगहों पर कद्दू को अकेले काटने का चलन नहीं है। उसे अक्सर नींबू, मिर्च या किसी दूसरी सब्जी के साथ काटा जाता है।