पीओके में 25 हजार लोगों का LoC पार कर भारत में शामिल होने का ऐलान
पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर में तीन महीने से जारी विरोध प्रदर्शन गंभीर मोड़ पर, मंधोल में हुई महापंचायत में हजारों लोगों ने नियंत्रण रेखा पार करने की कसम खाई।
पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर (पीओके) में पिछले तीन महीने से ज्यादा वक्त से चल रहा गुस्सा अब बहुत गंभीर मोड़ पर पहुंच गया है। 9 जून से शुरू हुए इस आंदोलन के 110वें दिन मंधोल गांव में आवामी एक्शन कमेटी (AAC) ने एक बड़ी महासभा बुलाई थी। नियंत्रण रेखा से सिर्फ 7 किलोमीटर दूर हुए इस धरना प्रदर्शन में 25 हजार से ज्यादा महिलाओं और पुरुषों ने हिस्सा लिया।
इस ऐतिहासिक सभा में आवामी एक्शन कमेटी के प्रमुख नेता सरदार अमन खान ने पाकिस्तानी फौज और वहां के प्रशासन के खिलाफ सीधे बिगुल फूंका। उनके मुताबिक पिछले तीन महीने से पाकिस्तान ने पीओके की जनता का राशन पूरी तरह रोक रखा है। इसी को लेकर उन्होंने ऐलान किया कि नियंत्रण रेखा (LoC) को हमेशा के लिए हटाकर भारतीय जम्मू-कश्मीर के पुंछ और मेंढर इलाकों में जाने की तैयारी है।
इस दौरान सरदार अमन खान ने मंच से भीड़ से जो भी सवाल पूछे, उन सबका जवाब 25 हजार से ज्यादा लोगों ने एक सुर में और जोरदार नारेबाजी के साथ "हां" कहकर दिया। नियंत्रण रेखा हटाकर भारतीय सीमा में पुंछ और मेंढर में धरना देने की अपील को लोगों ने खुद ही समर्थन दिया। पीओके की जनता का यह आक्रामक तेवर देखकर पाकिस्तानी फौज और ISI के बड़े अफसरों में हड़कंप मच गया है, ऐसा दावा किया गया है।
राशन की किल्लत और पाकिस्तानी फौज की ज्यादती की बात करें तो पाकिस्तान सरकार ने पिछले तीन महीने से पीओके में राशन सप्लाई पूरी तरह बंद कर रखी है। पहले इस इलाके के लोग भारतीय जम्मू-कश्मीर के मेंढर बाजार से राशन और जरूरी सामान खरीदते थे। लेकिन पाकिस्तान ने नियंत्रण रेखा पर बाड़ लगाकर यहां के लोगों को जबरदस्ती इस्लामाबाद के बाजार से जोड़ दिया। अब जब लोग राशन खरीदने जाते हैं तो उन्हें सीमा पर रोककर सरेंडर करने को मजबूर किया जाता है। इसी जुल्म से गुस्साई जनता ने अब पाकिस्तान के 78 साल के गैरकानूनी कब्जे के खिलाफ सीधे आवाज उठाई है।
अमन खान ने मंच से पाकिस्तानी फौज की कायरता और पिछले 80 साल की लूट की भी पोल खोली। उनका कहना था कि पहले जब नियंत्रण रेखा पर फायरिंग होती थी तो पाकिस्तानी सैनिक छिपकर बैठ जाते थे और स्थानीय लोग उनकी हिफाजत करते थे। लेकिन इस हिफाजत के बदले पाकिस्तानी हुकूमत ने यहां की जनता को सिर्फ बेरोजगारी, अस्पताल और स्कूलों की कमी और हिंसा दी। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि अपने बुनियादी हक मांगने वाले बेकसूर लोगों पर गोली चलाकर 100 से ज्यादा लोगों की जान ले ली गई।
चुनावी गड़बड़ी और मुजफ्फराबाद की कठपुतली सरकार की बात करें तो पीओके में सियासी हालात और भी बिगड़ गए हैं। हाल ही में वहां 45 विधानसभा सीटों के लिए चुनाव होने थे, लेकिन पुंछ और सुधनोटी जिलों में बड़े पैमाने पर हुए आंदोलन और लोगों के तीखे विरोध की वजह से 7 सीटों पर वोटिंग नहीं हो पाई। बाकी बची 38 सीटों पर वोटिंग कराकर पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ की पार्टी पीएमएल-एन को 25 सीटों पर जीता हुआ घोषित कर दिया गया। अमन खान ने इस जीत को सरासर हेराफेरी और धोखा बताते हुए चुनौती दी कि जनता की मर्जी के बिना पाकिस्तान बाकी सीटों पर चुनाव करा ही नहीं सकता।
इसके साथ ही उन्होंने मुजफ्फराबाद में बैठी तथाकथित सरकार को "कठपुतली सरकार" बताते हुए निशाना साधा। उनका कहना था कि यह सरकार पाकिस्तानी फौज की गोलीबारी में मारे गए 100 से ज्यादा नागरिकों की मौत पर सीधी बात तक नहीं कर सकती। जो सरकार अपने ही लोगों की हिफाजत नहीं कर सकती, वह नियंत्रण रेखा जैसे बड़े मुद्दे पर क्या बोलेगी, ऐसा सवाल उन्होंने उठाया।
गुलामी के खात्मे और आजादी की नई सुबह की बात करें तो पीओके की कई पीढ़ियां अब तक पाकिस्तानी फौज की जालिम और बेलगाम हुकूमत के नीचे गुलामी की जिंदगी जीती आई हैं। लेकिन अब वहां की जनता को यह समझ आ गया है कि जब तक वे पाकिस्तान के गैरकानूनी कब्जे के खिलाफ खड़े नहीं होते, तब तक उन्हें खुशहाली और शांति नहीं मिलेगी। पिछले तीन महीने से पाकिस्तान ने वहां के बेकसूर लोगों पर एक तरह से जंग ही थोप दी है। इसी वजह से अब पीओके का हर नागरिक इस नाइंसाफी और गुलामी के खिलाफ आखिर तक लड़ने को तैयार हो गया है।