पिकासो के जन्मदिन पर 25 अक्टूबर को मनता है अंतरराष्ट्रीय कलाकार दिन
हर साल 25 अक्टूबर को दुनिया भर के कलाकारों के सम्मान में अंतरराष्ट्रीय कलाकार दिन मनाया जाता है। इसकी शुरुआत 2004 में कनाडा के चित्रकार ख्रिस मॅक्लूर ने की थी।
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दुनिया भर के कलाकारों का सम्मान करने के लिए हर साल 25 अक्टूबर को 'अंतरराष्ट्रीय कलाकार दिन' (International Artist Day) मनाया जाता है। जो लोग कला के जरिए दुनिया में रंग भरते हैं, भावनाओं को शब्द और सुर देते हैं और संस्कृति को जिंदा रखते हैं, यह दिन उन सबके नाम है। इसे पूरी दुनिया में बड़े उत्साह के साथ मनाया जाता है।
चित्रकार हो या संगीतकार, लेखक हो या अभिनेता या फिर कोई शिल्पकार, ये सभी अपने अलग नजरिए से इंसानी जिंदगी और समाज को समृद्ध करते हैं। यह दिन हमें याद दिलाता है कि कला सिर्फ मनोरंजन का साधन नहीं है, वह इंसानी आत्मा की अभिव्यक्ति है।
इस दिन को मनाने की शुरुआत कैसे हुई, इसका इतिहास काफी दिलचस्प है। साल 2004 में कनाडा के मशहूर चित्रकार ख्रिस मॅक्लूर (Chris MacClure) ने इस दिन की स्थापना की। ख्रिस मॅक्लूर 'रोमँटिक रिअॅलिझम' (Romantic Realism) शैली की चित्रकला के लिए जाने जाते हैं। उनका मकसद था कि कलाकारों की मेहनत और कल्पनाशीलता को सही पहचान मिले और समाज के कलाप्रेमी एक साथ आ सकें। इसी सोच के साथ उन्होंने इस मुहिम की नींव रखी।
25 अक्टूबर की तारीख चुनने की एक खास वजह है। इसी दिन दुनिया के महान और असरदार चित्रकार पाब्लो पिकासो (Pablo Picasso) का जन्म हुआ था। कला की दुनिया में पिकासो के बड़े योगदान का सम्मान करने और उनकी जयंती के मौके पर 25 अक्टूबर को विश्व कलाकार दिन के तौर पर तय किया गया। तब से आज तक हर साल दुनिया के कई देशों में कला प्रदर्शनी, वर्कशॉप और सांस्कृतिक कार्यक्रमों के जरिए यह दिन मनाया जाता है।
कला किसी एक दायरे या सीमा में बंधी नहीं है। इंसानी भावनाओं को जाहिर करने के सैकड़ों रास्ते कला के जरिए मिलते हैं। चित्रकला, संगीत, नृत्य, साहित्य यानी लेखन, अभिनय और शिल्पकला से लेकर आज के डिजिटल दौर की डिजिटल आर्ट या फोटोग्राफी तक, इन सभी क्षेत्रों के कलाकार अपने हुनर से दुनिया को खूबसूरत बनाते हैं।
कैनवास पर रंग बिखेरने वाले चित्रकार हों या पत्थर को आकार देकर जीती-जागती मूर्ति में बदलने वाले शिल्पकार, ये इंसानी संस्कृति का इतिहास संभालकर रखते हैं। पुराने जमाने की गुफा-चित्रों से लेकर आज के म्युरल्स तक का सफर चित्रकला की ताकत की गवाही देता है।
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