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फ्यूचर डिजिटल एसेट स्कीम केस में गर्व गर्ग को अदालत से अग्रिम जमानत मिली

नागपुर की अदालत ने कथित मास्टरमाइंड राकेश गर्ग के बेटे गर्व गर्ग को शर्तों के साथ गिरफ्तारी से राहत दी है।

फ्यूचर डिजिटल एसेट स्कीम केस में गर्व गर्ग को अदालत से अग्रिम जमानत मिली तस्वीरें सत्यापित नहीं हैं

नागपुर में कथित करोड़ों रुपये की निवेश धोखाधड़ी से जुड़े फ्यूचर डिजिटल एसेट स्कीम मामले में अदालत ने आरोपी गर्व गर्ग को अग्रिम जमानत दे दी है। गर्व गर्ग को इस मामले के कथित मास्टरमाइंड राकेश गर्ग का बेटा बताया गया है। सुनवाई विशेष न्यायाधीश, MPID एवं जिला न्यायाधीश-9, नागपुर की अदालत में हुई। न्यायाधीश ए.ए. आयाचित ने दोनों पक्षों की दलीलें सुनीं और उसके बाद शर्तों के साथ अग्रिम जमानत का आदेश दिया।

आरोपी की तरफ से अधिवक्ता कमल सतुजा, कैलाश डोडानी और हितेश खंडवानी ने पैरवी की। बचाव पक्ष का कहना था कि गर्व गर्ग को इस मामले में गलत तरीके से फंसाया गया है। उनके मुताबिक आरोपपत्र में ऐसा कोई ठोस आपत्तिजनक साक्ष्य नहीं है जो उसके खिलाफ लगे आरोप साबित करे। अभियोजन पक्ष ने जमानत का विरोध किया। उसने मामले की गंभीरता, आरोपी की कथित फरारी और आगे की जांच के मुद्दे उठाए।

शिकायतकर्ता रीमा घोष के आरोपों के अनुसार इस स्कीम में कई निवेशकों को आकर्षक रिटर्न का भरोसा देकर पैसा लगवाया गया। शिकायत में कहा गया कि एक महीने के भीतर 9,000 रुपये जमा करने पर ऑनलाइन वॉलेट में 12,500 रुपये मिलने का आश्वासन दिया जाता था। यह भी आरोप है कि जो व्यक्ति 25 और निवेशकों को जोड़ता और हर निवेशक 9,000 रुपये जमा करता, उसे लाखों रुपये तक का कमीशन और मर्चेंट कॉइन देने का लालच दिया जाता था। इन मर्चेंट कॉइन से अमेरिकी डॉलर खरीदे जा सकने का दावा किए जाने का भी आरोप है।

शिकायत के मुताबिक कई लोगों ने इन वादों पर भरोसा करके रकम लगाई। शुरू में कुछ निवेशकों के ऑनलाइन वॉलेट में पैसा दिखाया गया, लेकिन बाद में वे कथित तौर पर उसे निकाल नहीं पाए। जब निवेशकों ने अपनी जमा रकम वापस मांगी, तो आरोप है कि उन्हें रकम, प्रोत्साहन राशि और बाकी वादा किए गए फायदे नहीं मिले। इन्हीं शिकायतों पर निवेश धोखाधड़ी का केस दर्ज हुआ। आरोपों की अंतिम सच्चाई का फैसला न्यायिक प्रक्रिया में होना है।

मामले में राकेश गर्ग को CLBP System Pvt. Ltd. कंपनी का संचालक और कथित मुख्य आरोपी बताया गया है। कंपनी का मुख्य कार्यालय पंजाब में बताया गया है। नागपुर में कंपनी के एजेंट के तौर पर मेहुल दीक्षित का नाम सामने आया है। पुलिस ने भारतीय न्याय संहिता की धारा 318(4), 316(5) और 3(5), महाराष्ट्र प्रोटेक्शन ऑफ इंटरेस्ट ऑफ डिपॉजिटर्स (इन फाइनेंशियल एस्टैब्लिशमेंट्स) अधिनियम की धारा 3 और सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम की धारा 66 के तहत अपराध दर्ज किए हैं।

राकेश गर्ग और मेहुल दीक्षित को गिरफ्तार किए जाने का जिक्र है, जबकि गर्व गर्ग को पुलिस ने कथित तौर पर फरार बताया था। अभियोजन का आरोप है कि गर्व गर्ग कंपनी में निदेशक था और उसकी कंपनी में 10 प्रतिशत हिस्सेदारी थी। उस पर कथित तौर पर वेबसाइट तैयार करने और कंपनी के खाते से अपने निजी खाते में बड़ी रकम भेजने का आरोप है।

बचाव पक्ष ने कहा कि गर्व गर्ग का नाम FIR में नहीं है और आरोपपत्र में भी उसके खिलाफ कोई ठोस आपत्तिजनक सामग्री नहीं है। वकीलों के मुताबिक वह कंपनी में निदेशक था और उसे वेतन मिलता था। सिर्फ निदेशक होने या हिस्सेदारी रखने से उसे कथित धोखाधड़ी का जिम्मेदार नहीं ठहराया जा सकता। उन्होंने यह भी कहा कि उसने न किसी निवेशक को खुद निवेश के लिए कहा और न किसी निवेशक से सीधे पैसा लिया।

वकीलों ने यह दलील भी दी कि किसी को फरार बताया जाना अपने आप में अग्रिम जमानत से मना करने का काफी आधार नहीं होना चाहिए। इसके लिए उन्होंने बॉम्बे हाईकोर्ट के एक न्यायिक दृष्टांत का हवाला दिया। उनका कहना था कि जांच पूरी हो चुकी है और आरोपपत्र दाखिल है, इसलिए हिरासत में पूछताछ की जरूरत नहीं है। आरोपी जांच में सहयोग करने को तैयार है और जांच अधिकारी के बुलाने पर हाजिर रहेगा।

बचाव पक्ष ने फ्रीज की गई रकम का मुद्दा भी उठाया। वकीलों के अनुसार आरोपी के पिता और उनसे जुड़ी कंपनियों के बैंक खातों में दो करोड़ 28 लाख रुपये से ज्यादा की रकम फ्रीज हो चुकी है। आरोपपत्र में अब तक निवेशकों से जुड़ी कथित रकम करीब 5 लाख 40 हजार रुपये बताई गई है। बचाव पक्ष के मुताबिक गर्व गर्ग के पिता ने विवादित रकम को फ्रीज खातों की रकम से एडजस्ट करने के बारे में बयान भी दिया है। वकीलों ने कहा कि आरोपी से कुछ भी बरामद होना बाकी नहीं है।

सरकारी पक्ष की ओर से सहायक सरकारी अधिवक्ता अभय जिकार ने अर्जी का विरोध किया। उन्होंने कहा कि मामला गंभीर आर्थिक अपराध का है और आरोपी लंबे समय से फरार बताया जा रहा है। अभियोजन की आशंका थी कि आरोपी ने अपनी वेबसाइट से कई लोगों को निवेश के लिए प्रेरित किया हो सकता है और जांच बढ़ने पर और पीड़ित सामने आ सकते हैं। आगे की जांच जारी है और आरोपी के खिलाफ पूरक आरोपपत्र दाखिल होने की संभावना है।

अभियोजन के अनुसार वेबसाइट के पासवर्ड, तकनीकी ब्योरे और उससे हुए लेन-देन की जानकारी के लिए आरोपी से पूछताछ जरूरी है। उसने यह डर भी जताया कि जमानत मिलने पर आरोपी गवाहों को प्रभावित कर सकता है, जांच में अड़चन डाल सकता है या फरार हो सकता है, क्योंकि वह पंजाब का रहने वाला बताया गया है।

दोनों पक्षों को सुनने के बाद अदालत ने गर्व गर्ग को अग्रिम जमानत दी। आदेश के मुताबिक उसे अपने पासपोर्ट का ब्योरा देना होगा और जांच में सहयोग करना होगा। उसे दो महीने तक हर शनिवार जांच अधिकारी के सामने हाजिर होना होगा, या पूरक आरोपपत्र दाखिल होने तक, जो भी पहले हो।

इस तरह अदालत ने शर्तों के साथ आरोपी को गिरफ्तारी से संरक्षण दिया है। अग्रिम जमानत का आदेश आरोपी को आरोपों से बरी नहीं करता। मामले की जांच, अभियोजन की आगे की कार्रवाई और न्यायिक प्रक्रिया जारी रह सकती है।

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