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12:33 IST

फ्रांस के कॉर्सिका में आसमान पर दिखीं लाल रोशनी की धारियां, कैमरे में कैद हुए रेड स्प्राइट्स

फ्रांस के कॉर्सिका द्वीप पर रात के आसमान में लाल रंग की बिजली जैसी रोशनी की धारियां कैमरे में कैद हुईं। इस दुर्लभ प्राकृतिक घटना को रेड स्प्राइट्स कहा जाता है।

फ्रांस के कॉर्सिका में आसमान पर दिखीं लाल रोशनी की धारियां, कैमरे में कैद हुए रेड स्प्राइट्स तस्वीरें सत्यापित नहीं हैं

रात के अंधेरे आसमान में अचानक लाल रंग की रोशनी की लकीरें उभर आएं और पूरा आसमान किसी साइंस फिक्शन फिल्म के सीन जैसा दिखने लगे, ऐसा हैरान करने वाला नजारा फ्रांस में देखने को मिला है। फ्रांस के कॉर्सिका द्वीप पर आसमान में उभरी लाल बिजली जैसी रोशनी की इन धारियों की तस्वीरें खींची गई हैं। इस दुर्लभ प्राकृतिक घटना को 'रेड स्प्राइट्स' (Red Sprites) कहा जाता है। तस्वीरें सामने आने के बाद सोशल मीडिया पर इनकी खूब चर्चा हो रही है।

फ्रांस के फोटोग्राफर फ्लोरियन रिऊ ने 16 सितंबर 2026 को कॉर्सिका द्वीप के मॉन्तेमाजोर इलाके से यह अनोखा नजारा अपने कैमरे में कैद किया। खास बात यह है कि जिस जगह ये रोशनी की धारियां बनी थीं, वह फोटोग्राफर से करीब 500 से 700 किलोमीटर दूर थी। ये धारियां स्पेन के बार्सिलोना इलाके के ऊपर तूफानी मौसम में बनी थीं। इतनी दूर होने वाली घटना को कैमरे में उतार लेने में उन्हें कामयाबी मिली। आसमान में फैली ये लाल रोशनी किसी विशाल जेलीफिश के आकार जैसी दिख रही थी।

अब सवाल यह है कि रेड स्प्राइट्स आखिर हैं क्या। यह वातावरण की ऊपरी परत में होने वाली एक दुर्लभ बिजली वाली घटना है। आम बिजली बादलों से जमीन की ओर चमकती है, लेकिन रेड स्प्राइट्स ताकतवर तूफानी बादलों के ऊपरी हिस्से में बनते हैं। आमतौर पर यह घटना धरती की सतह से 50 से 90 किलोमीटर की ऊंचाई पर होती है।

तूफान के दौरान जो तेज बिजली वाला क्षेत्र बनता है, उससे वातावरण में मौजूद नाइट्रोजन गैस के अणु उत्तेजित हो जाते हैं। इसी से लाल रंग की रोशनी पैदा होती है। ये धारियां सिर्फ कुछ मिलीसेकंड तक ही दिखती हैं, इसलिए खुली आंखों से इन्हें देख पाना बहुत मुश्किल होता है। सही मौसम, साफ आसमान और संवेदनशील कैमरे की मदद से ही इनकी तस्वीर ली जा सकती है।

आसमान में उभरी इन अजीब रोशनी की लकीरों को देखकर कई लोगों को एलियंस के हमले या किसी साइंस फिक्शन फिल्म के सीन की याद आ गई। लेकिन इस घटना का एलियंस से कोई लेना-देना नहीं है। यह धरती के वातावरण में होने वाली एक प्राकृतिक प्रक्रिया है।

रेड स्प्राइट्स की पहली भरोसेमंद तस्वीर 1989 में ली गई थी। इसके बाद से दुनिया भर के वैज्ञानिक इस घटना का अध्ययन कर रहे हैं। वातावरण में बिजली की प्रक्रिया, तूफानों की तीव्रता और धरती के ऊपरी वातावरण में होने वाले बदलावों को समझने में इन अवलोकनों का इस्तेमाल होता है। इसलिए फ्रांस में खींची गई यह तस्वीर सिर्फ प्रकृति का अद्भुत रूप ही नहीं दिखाती, बल्कि वैज्ञानिक अध्ययन के लिहाज से भी अहम मानी जा रही है।

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