पेट्रोल, सीएनजी या EV: रोजाना गाड़ी चलाने वालों के लिए कौन सी सस्ती पड़ती है
नई कार लेने से पहले सिर्फ शोरूम प्राइस नहीं, रोज का माइलेज और मेंटेनेंस खर्च भी देखना जरूरी
नई कार खरीदते वक्त अब ग्राहक के सामने पेट्रोल, सीएनजी और इलेक्ट्रिक व्हीकल, ये तीन ऑप्शन खुले हैं। बस कार की शुरुआती कीमत देखकर डिसिजन ले लेना सही नहीं होता। कार कितनी चलाई जाएगी, इंधन या चार्जिंग पर हर महीने कितना खर्च आएगा और मेंटेनेंस में कितना जाएगा, ये सब सोचना जरूरी है।
पेट्रोल कार की शुरुआती कीमत बाकी दोनों के मुकाबले कम होती है, इसलिए कम बजट में गाड़ी लेने वालों को यह ऑप्शन अच्छा लगता है। पेट्रोल पंप हर जगह आसानी से मिल जाते हैं, तो लंबी ट्रिप पर भी इंधन की टेंशन नहीं रहती और भरने में टाइम भी ज्यादा नहीं लगता। लेकिन अगर गाड़ी का यूज ज्यादा है तो पेट्रोल पर होने वाला रेगुलर खर्च काफी बड़ा हो सकता है।
उदाहरण के तौर पर टाटा नेक्सॉन पेट्रोल की बात करें तो दी गई जानकारी के मुताबिक इसका फ्यूल खर्च प्रति किलोमीटर करीब 7.69 रुपये आ सकता है। जो लोग रोज ज्यादा दूरी तय करते हैं, उनके लिए यह खर्च महीने और साल के हिसाब से बड़ा हो जाता है। इसलिए कार लंबे समय तक चलानी है तो सिर्फ शुरुआती कीमत कम है इस वजह से पेट्रोल कार चुनना सही डिसिजन नहीं भी हो सकता।
सीएनजी कार की शुरुआती कीमत पेट्रोल मॉडल से थोड़ी ज्यादा होती है, लेकिन सीएनजी का रेट कम होने से प्रति किलोमीटर इंधन खर्च घट जाता है। दी गई जानकारी के अनुसार नेक्सॉन सीएनजी का खर्च प्रति किलोमीटर करीब 5.30 रुपये आ सकता है। इस वजह से रोज लंबी दूरी तय करने वालों को लंबे समय में अच्छी बचत हो सकती है। लेकिन सीएनजी कार लेने से पहले यह चेक करना जरूरी है कि अपने शहर में और रोज के रूट पर सीएनजी पंप आसानी से मिलते हैं या नहीं। अगर सीएनजी सप्लाई आसानी से मिल रही है और कार का यूज ज्यादा है, तो यह ऑप्शन फायदे का सौदा हो सकता है।
इलेक्ट्रिक कार की शुरुआती कीमत पेट्रोल या सीएनजी कार से ज्यादा हो सकती है, लेकिन इसका डेली रनिंग कॉस्ट कम रहने का फायदा मिलता है। दी गई जानकारी के अनुसार घर पर चार्जिंग की सुविधा हो तो ईवी का खर्च प्रति किलोमीटर करीब 2.50 रुपये आ सकता है। ईवी में पेट्रोल या सीएनजी भरवाने की जरूरत नहीं पड़ती। घर या ऑफिस में चार्जिंग की सुविधा हो तो रोज के आने-जाने का खर्च कम रखा जा सकता है, और पारंपरिक पेट्रोल इंजन न होने से कुछ रेगुलर मेंटेनेंस खर्च भी घट सकते हैं।
हालांकि ईवी लेने से पहले चार्जिंग की सुविधा सबसे बड़ा मुद्दा है। घर या ऑफिस में चार्जिंग का इंतजाम हो तो खर्च का ज्यादा फायदा मिल सकता है, लेकिन बार-बार पब्लिक या फास्ट चार्जर का इस्तेमाल करना पड़े तो चार्जिंग का खर्च बढ़ सकता है।
तो कौन सी कार लें? अगर रोज का सफर कम है और पेट्रोल पंप आसानी से मिल जाते हैं, तो पेट्रोल कार का ऑप्शन देखा जा सकता है। रोज लंबी दूरी तय करनी है और सीएनजी पंप अच्छी तरह उपलब्ध हैं, तो सीएनजी का ऑप्शन देखा जा सकता है। और अगर घर या ऑफिस में चार्जिंग की सुविधा है और रोज ज्यादा सफर करना पड़ता है, तो ईवी का कम रनिंग कॉस्ट बड़ा फायदा साबित हो सकता है। कार खरीदते वक्त सिर्फ एक्स-शोरूम प्राइस नहीं, बल्कि 5 साल का टोटल खर्च, रोज की दूरी, इंधन की उपलब्धता और चार्जिंग की सुविधा भी ध्यान में रखकर डिसिजन लेना जरूरी है।