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पांचगणी की स्ट्रॉबेरी के 600 पौधे अब येरवडा जेल में लगेंगे

इनर व्हील क्लब ऑफ पांचगणी ने पुणे की येरवडा मध्यवर्ती जेल में कैदियों के पुनर्वास के लिए स्ट्रॉबेरी के 600 पौधे बांटे।

पांचगणी की स्ट्रॉबेरी के 600 पौधे अब येरवडा जेल में लगेंगे तस्वीरें सत्यापित नहीं हैं

पुणे की ऐतिहासिक येरवडा मध्यवर्ती जेल की चारदीवारी के भीतर अब स्ट्रॉबेरी की खेती होगी। इनर व्हील क्लब ऑफ पांचगणी ने जेल के अहाते में स्ट्रॉबेरी के 600 पौधे बांटे हैं। यह एक अनोखा उपक्रम है, जिसका मकसद पर्यावरण की हिफाजत के साथ कैदियों के पुनर्वास को और उनके अंदर की सकारात्मकता को बढ़ावा देना है। क्लब ने कैदियों में प्रकृति से जुड़ाव और बागवानी का हुनर बढ़ाने के लिए यह पहल की।

यह हरित उपक्रम जेल अधीक्षक शामकांत शेडगे की खास इजाजत और उनके मार्गदर्शन में पूरा हुआ। इसके पीछे मुख्य मकसद यह है कि जेल का अहाता सिर्फ बंद माहौल वाला न रहे, बल्कि वहां एक खूबसूरत हरी पट्टी तैयार हो। साथ ही कैदियों को खेती और बागवानी की असली सीख मिले।

पांचगणी की दुनियाभर में मशहूर पहचान स्ट्रॉबेरी अब येरवडा जेल की मिट्टी में भी उगेगी। इन पौधों की पूरी देखभाल और परवरिश कैदी खुद करेंगे। इससे उनमें टिकाऊ जीवनशैली की आदत पड़ने में मदद मिलेगी।

इस उपक्रम को पूरा करने में जेल अधीक्षक शामकांत शेडगे और उनकी पूरी पुलिस टीम ने बहुत सकारात्मक नजरिया रखते हुए सहयोग किया। अफसरों और कर्मचारियों की आत्मीय मेहमाननवाजी से इनर व्हील क्लब की पदाधिकारी और सदस्याएं अभिभूत हो गईं। इस मौके पर यह भरोसा जताया गया कि जेल की बंद जिंदगी में अगर प्रकृति का स्पर्श और खेती का हुनर जुड़ जाए, तो कैदियों की सोच में अच्छा बदलाव आता है।

कार्यक्रम में इनर व्हील क्लब की अध्यक्ष श्वेता बोधे, सचिव स्नेहा होळकर, पूर्व अध्यक्ष संगीता पाटील और सीमा संमेळ मौजूद थीं। जेल अधीक्षक शामकांत शेडगे और दूसरे वरिष्ठ पुलिस अफसर भी हाजिर थे। इनर व्हील क्लब की इस सूझबूझ भरी और सामाजिक सरोकार निभाने वाली पहल की हर तरफ तारीफ हो रही है।

आम तौर पर येरवडा जेल अपनी कड़ी सुरक्षा के लिए जानी जाती है। लेकिन पांचगणी के इनर व्हील क्लब की पहल की वजह से अब जेल के अहाते में स्ट्रॉबेरी के लाल-लाल फल लगेंगे। कैदियों के हाथों से होने वाली पौधों की परवरिश सिर्फ बागवानी तक सीमित नहीं रहेगी, बल्कि उनके मन में सकारात्मकता भी जगाएगी। बंद दीवारों के भीतर प्रकृति का यह हरा स्पर्श कैदियों के पुनर्वास को नई दिशा देगा।

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