ऑयल इंडिया को कृष्णा-गोदावरी बेसिन के उथले समुद्र में मिला नैचुरल गैस का नया बड़ा भंडार
सरकारी कंपनी ऑयल इंडिया लिमिटेड ने कृष्णा-गोदावरी बेसिन में समुद्र के उथले पानी वाले ब्लॉक में नैचुरल गैस का नया भंडार खोजा है।
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देश के एनर्जी सेक्टर के लिए राहत भरी खबर आई है। सरकारी कंपनी ऑयल इंडिया लिमिटेड (OIL) ने कृष्णा-गोदावरी बेसिन (Krishna-Godavari Basin) में नैचुरल गैस का नया और बड़ा भंडार खोज निकाला है। यह भंडार समुद्र के उथले पानी वाले एक ब्लॉक में मिला है। दुनिया भर में एनर्जी की सप्लाई को लेकर जो अनिश्चितता बनी हुई है, उसे देखते हुए इस खोज को भारत के लिए काफी अहम माना जा रहा है।
ऑयल इंडिया ने यह ब्लॉक हाल ही में 'डिस्कवर्ड स्मॉल फील्ड' (DSF) बोली प्रक्रिया के तहत अपने नाम किया था। पूर्वी तट पर कृष्णा-गोदावरी बेसिन की मत्स्यपुरी फॉर्मेशन में 'गोदावरी-1' नाम का उथले पानी का ऑफशोर कुआं है, और इसी में यह खोज अभियान चलाया गया। कंपनी ने 16 अक्टूबर 2026 को करीब 2024 से 2027 मीटर की गहराई पर हाइड्रोकार्बन क्षेत्र की टेस्टिंग शुरू की थी। इस गहरी जांच के दौरान पुष्टि हुई कि इस इलाके में नैचुरल गैस का भरपूर भंडार छिपा है।
शुरुआती दौर में इस कुएं से रोजाना करीब 1 लाख एससीएमडी (SCMD - Standard Cubic Meters per Day) गैस का फ्लो मिल रहा था। आगे की टेस्टिंग होती गई तो यह फ्लो बढ़ता गया और ज्यादा से ज्यादा 2 लाख एससीएमडी तक पहुंच गया। कंपनी ने यह भी बताया कि कुएं से रोजाना अंदाजे से 170 बैरल कंडेनसेट का उत्पादन हो रहा है। इस इलाके में इससे पहले कभी कोई जांच नहीं हुई थी, इसलिए यह खोज रिसर्चरों के लिए भी बड़ी कामयाबी मानी जा रही है।
अभी भारत अपनी जरूरत की करीब 50 फीसदी नैचुरल गैस और तकरीबन 88 फीसदी कच्चे तेल के लिए दूसरे देशों पर निर्भर है। ऐसे में देश के अंदर गैस का नया स्रोत मिलने से इम्पोर्ट का भारी बोझ घटेगा और कीमती विदेशी मुद्रा बचाने में मदद मिलेगी।
इस गैस का फायदा सीएनजी (CNG), पीएनजी (PNG), रासायनिक खाद बनाने, बिजली उत्पादन और रिफायनरी उद्योग को खास तौर पर मिलेगा। इस प्रोजेक्ट से मिलने वाली रोजाना 22 लाख एससीएमडी गैस से करीब 20 हजार परिवारों की महीने भर की जरूरत पूरी हो सकती है। इतनी गैस से सीएनजी गाड़ियां लगभग 35 लाख किलोमीटर चल सकती हैं, या 8 से 10 लाख यूनिट बिजली बनाई जा सकती है।
भारत सरकार ने देश में गैस का उत्पादन कुल खपत के 15 फीसदी तक ले जाने की नीति बनाई है। फिलहाल देश में जितनी गैस लगती है, उसका सिर्फ 6 फीसदी ही देश में पैदा होता है। इस नई खोज से 2030 तक के इस लक्ष्य तक पहुंचने का रास्ता आसान होगा और देश की एनर्जी सिक्योरिटी और मजबूत होगी।
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