मंगलवार, 6 अक्टूबर 2026

अभी सब्सक्राइब करें
प्राइम अलर्ट
सारे लाइव अपडेट
21:31 IST

नोएल टाटा ने चंद्रशेखरन की दोबारा नियुक्ति पर उठाए सवाल, बोर्ड मीटिंग की रिकॉर्डिंग मांगी

टाटा ट्रस्ट्स के अध्यक्ष नोएल टाटा ने टाटा सन्स के बोर्ड को चिट्ठी लिखकर एन. चंद्रशेखरन की सितंबर में हुई पुनर्नियुक्ति पर सवाल उठाया है।

नोएल टाटा ने चंद्रशेखरन की दोबारा नियुक्ति पर उठाए सवाल, बोर्ड मीटिंग की रिकॉर्डिंग मांगी
एआई से बनाई गई प्रतीकात्मक तस्वीर; यह घटना का वास्तविक फोटो नहीं है | PT24

टाटा ट्रस्ट्स के अंदर चल रही खींचतान अब खुलकर सामने आ गई है। ट्रस्ट के अध्यक्ष नोएल टाटा ने सितंबर में हुई एन. चंद्रशेखरन की अध्यक्ष पद पर पुनर्नियुक्ति पर सवाल खड़े किए हैं। इससे विवाद फिर भड़क गया है। मामले से जुड़े सूत्रों के मुताबिक नोएल टाटा ने इस बारे में टाटा सन्स के संचालक मंडल यानी बोर्ड को चिट्ठी लिखी है।

सूत्रों के मुताबिक नोएल टाटा ने बोर्ड मीटिंग की वीडियो रिकॉर्डिंग मांगी है। उन्होंने यह भी पूछा है कि जो कानूनी राय ली गई, वह क्यों ली गई। 30 सितंबर को भेजे एक ईमेल में उन्होंने लिखा कि चंद्रशेखरन की पुनर्नियुक्ति मीटिंग के एजेंडे में थी ही नहीं, बल्कि यह मुद्दा "NRC से जानकारी" वाले हिस्से में उठाया गया। इससे पहले उन्होंने 17 सितंबर की बोर्ड मीटिंग में कोई भी प्रस्ताव पास होने से इनकार किया था।

टाटा ट्रस्ट्स समूह का सबसे बड़ा शेयरहोल्डर है। उसने चंद्रशेखरन को तीसरी बार नियुक्त करने वाले बोर्ड के प्रस्ताव को "गैरकानूनी" और "कानूनी तौर पर अवैध" कहा है। ट्रस्ट के कड़े शब्दों वाले बयान में कहा गया है कि नोएल टाटा, जो टाटा सन्स के बोर्ड में नामित डायरेक्टर हैं, उन्होंने मीटिंग में इस पुनर्नियुक्ति के खिलाफ वोट दिया।

उधर टाटा सन्स ने चंद्रशेखरन को कार्यकारी अध्यक्ष के तौर पर और पांच साल के कार्यकाल के लिए दोबारा नियुक्त करने के अपने फैसले के समर्थन में दो कानूनी राय का हवाला दिया है। ये राय भारत के पूर्व मुख्य न्यायाधीश उदय उमेश ललित और सुप्रीम कोर्ट के पूर्व जज बी. एन. श्रीकृष्ण की हैं। दोनों ने माना कि प्रस्ताव "सही तरीके से मंजूर" हुआ। वजह यह बताई गई कि अनुच्छेद 104(ब) के तहत नियुक्त डायरेक्टर बराबर वोटों में बंट गए थे, इसलिए निर्णायक वोट से अनुच्छेद 121 की शर्तें पूरी हो गईं।

टाटा ट्रस्ट्स का तर्क इसके उलट है। उसका कहना है कि दोनों नामित डायरेक्टरों का पुनर्नियुक्ति के पक्ष में होना जरूरी था। अपनी बात के समर्थन में ट्रस्ट्स ने पूर्व मुख्य न्यायाधीश डी. वाय. चंद्रचूड़ की राय का हवाला दिया है। विवाद की मुख्य जड़ टाटा सन्स की नियमावली यानी आर्टिकल्स है, खासकर नामित डायरेक्टरों और अध्यक्ष के निर्णायक वोट से जुड़े नियम।

ट्रस्ट्स के दूसरे नामित डायरेक्टर वेणु श्रीनिवासन ने चंद्रशेखरन की पुनर्नियुक्ति का समर्थन किया। चंद्रशेखरन खुद इस प्रक्रिया से दूर रहे और स्वतंत्र डायरेक्टर हरीश मनवाणी ने चर्चा की अध्यक्षता की। अध्यक्ष के निर्णायक वोट से यह प्रस्ताव पास हुआ।

क्या हम इस विज़िट को गिन लें? PT24 गूगल एनालिटिक्स से देखता है कि कौन सी खबरें किस पर पढ़ी जाती हैं। आपके हां कहने तक यह बंद है, आप सोच रहे हैं तब तक कुछ नहीं गिना जाता, और आप You पर कभी भी अपना मन बदल सकते हैं। हम क्या लेंगे