दुनिया भर में बढ़ रही हैं खतरनाक वायरस पर रिसर्च करने वाली लैब, सबसे ज्यादा अमेरिका में
एक हालिया अध्ययन के मुताबिक दुनिया भर में BSL-3 और BSL-4 लैब की संख्या बढ़ रही है, जिनमें सबसे ज्यादा BSL-4 लैब अमेरिका में हैं।
कोरोना वायरस ने दुनिया का क्या हाल किया और इंसानी ज़िंदगी को कितना उलट-पुलट दिया, यह हम सबने देखा है। उस वक्त दुनिया भर में कई बहसें छिड़ी थीं। किसी के मुताबिक कोरोना इंसान का बनाया हुआ संकट था, तो किसी के मुताबिक कुदरती। चीन पर यह आरोप भी लगा कि उसने दुनिया की तरक्की रोकने के लिए जानबूझकर इस वायरस का इस्तेमाल किया।
जानकारों के मुताबिक आगे की जंग जैविक जंग होगी। यह दावा बार-बार किया जाता है कि इसी वजह से दुनिया के कई देश चुपचाप अपने-अपने स्तर पर इस पर रिसर्च करके तैयारी कर रहे हैं। इसी बीच जानलेवा और तेजी से फैलने वाले रोगाणुओं पर रिसर्च करने वाली हाई सिक्योरिटी लैब की संख्या दुनिया भर में बढ़ रही है।
खास तौर पर BSL-3 और BSL-4 स्तर की लैब में बेहद खतरनाक रोगाणुओं पर रिसर्च, जांच, टीके और इलाज के विकास का काम किया जा रहा है। एक हालिया अध्ययन के मुताबिक दुनिया भर में इन लैब की संख्या बढ़ी है और इनमें से 110 लैब BSL-4 स्तर की हैं। इन लैब में सबसे कड़ा जैव सुरक्षा इंतजाम होता है।
उपलब्ध आंकड़ों के मुताबिक अमेरिका में चालू और निर्माणाधीन मिलाकर 17 BSL-4 लैब हैं। इस तरह ज्यादा खतरनाक जैव सुरक्षा स्तर वाली लैब की संख्या में अमेरिका सबसे आगे है। रिसर्च में बताया गया है कि उसके बाद ब्रिटेन का नंबर आता है, जहां 13 BSL-4 लैब हैं।
हाई सिक्योरिटी लैब के विस्तार की रफ्तार एशिया में भी बढ़ी है। खास तौर पर खतरनाक रोगाणुओं पर रिसर्च के लिए नई सुविधाएं खड़ी की जा रही हैं। चीन ने 2015 में वुहान में देश का पहला BSL-4 लैब सेंटर शुरू किया था। इसके बाद उसने हाई सिक्योरिटी बायोलैब का नेटवर्क बढ़ाने की योजना बनाई। पश्चिमी देशों के मुकाबले इस रिसर्च में पीछे न रहने के लिए चीन ने इसमें भारी पैसा लगाया है।
अध्ययन में दुनिया भर में 3,515 BSL-3 लैब पाई गईं। बताया गया है कि इनमें से लगभग आधी लैब अमेरिका में हैं।
हालांकि दुनिया भर में ऐसी लैब की सही संख्या बताना मुश्किल है। वजह यह है कि BSL-3 और BSL-4 सुविधाओं का कोई एक वैश्विक आधिकारिक रजिस्टर अब तक मौजूद नहीं है। इसी वजह से अलग-अलग रिपोर्टों के आंकड़ों में फर्क दिखता है।