NCRB रिपोर्ट: 2024 में 14,488 छात्रों ने जान दी, महाराष्ट्र सबसे आगे
NCRB की ताज़ा रिपोर्ट के मुताबिक पिछले दस साल में छात्रों की आत्महत्या के मामले काफी बढ़े हैं और महाराष्ट्र इस सूची में सबसे ऊपर है।
देश में छात्रों की मानसिक सेहत को लेकर चिंता लगातार बढ़ती जा रही है। नेशनल क्राइम रेकॉर्ड्स ब्यूरो (NCRB) की हाल ही में जारी रिपोर्ट के मुताबिक पिछले एक दशक में छात्रों की आत्महत्या के मामलों में बड़ा इजाफा हुआ है।
रिपोर्ट के अनुसार 2024 में पूरे देश में कुल 14,488 छात्रों ने आत्महत्या की। यह आंकड़ा 2014 के मुकाबले करीब 80 प्रतिशत ज्यादा है और पिछले 10 साल में सबसे ऊंचा है। इसके बाद पढ़ाई, कॉम्पिटिटिव परीक्षाओं और घर के दबाव को लेकर गंभीर बहस एक बार फिर शुरू हो गई है।
NCRB के आंकड़ों के मुताबिक 2014 से 2024 के 11 साल में देश भर में कुल 1,23,918 छात्रों ने आत्महत्या की। इनमें से सबसे ज्यादा करीब 17,000 मामले अकेले महाराष्ट्र से सामने आए हैं। उत्तर प्रदेश दूसरे नंबर पर है, जहां यह आंकड़ा करीब 10,000 रहा। रिपोर्ट के हिसाब से कई साल से इस मामले में महाराष्ट्र देश में सबसे आगे बना हुआ है।
रिपोर्ट के अनुसार महाराष्ट्र, उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश और तमिलनाडु, इन चार राज्यों में मिलाकर देश के कुल छात्र आत्महत्या मामलों का करीब आधा हिस्सा दर्ज होता है। रिपोर्ट में पाया गया कि इनमें से ज्यादातर मामले उन इलाकों से जुड़े हैं जहां बड़े कोचिंग हब हैं। इनमें राजस्थान का कोटा, दिल्ली-एनसीआर, बेंगलुरु, हैदराबाद और पुणे जैसे शहर शामिल हैं, जहां देश भर से लाखों छात्र कॉम्पिटिटिव परीक्षाओं की तैयारी के लिए आते हैं।
NCRB की रिपोर्ट में छात्रों की आत्महत्या की सबसे बड़ी वजह पारिवारिक समस्याएं बताई गई हैं। दूसरे नंबर पर परीक्षा में फेल होना है। 2024 में सिर्फ परीक्षा में नाकामी की वजह से 2,032 आत्महत्याएं हुईं, जो उस साल दर्ज छात्र आत्महत्याओं के कुल मामलों का करीब 14 प्रतिशत है।
पिछले दस साल के आंकड़े देखें तो 2019 से 2020 के बीच सबसे तेज बढ़ोतरी दर्ज हुई थी, जब मामले 21.2 प्रतिशत बढ़े। इन 10 सालों में सिर्फ 2022 ऐसा साल रहा जब मामलों में मामूली कमी आई। इसके अलावा 2024 में 18 साल से कम उम्र के 10,295 से ज्यादा बच्चों की मौत भी आत्महत्या से हुई। रिपोर्ट के हिसाब से यह दिखाता है कि समस्या सिर्फ कॉलेज या बड़ी उम्र के छात्रों तक सीमित नहीं है, स्कूल के बच्चों में भी गहराई तक फैली है।
केंद्र सरकार ने इस बढ़ती समस्या को देखते हुए 2022 में 'नेशनल सुसाइड प्रिवेंशन स्ट्रैटेजी' (राष्ट्रीय आत्महत्या प्रतिबंधक नीति) शुरू की। इसका लक्ष्य 2030 तक देश में आत्महत्या की दर में 10 प्रतिशत की कमी लाना है। साथ ही कोटा जैसे कोचिंग हब में प्रशासन ने छात्रों के लिए काउंसलिंग सेंटर, हेल्पलाइन नंबर और नियमित मेंटल हेल्थ चेकअप जैसी सुविधाएं शुरू की हैं, ताकि दबाव में जी रहे छात्रों को वक्त पर सहारा मिल सके।