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22:01 IST

नवरात्रि की अष्टमी-नवमी पर घर में हवन: सामग्री, विधि और मंत्र

नवरात्रि के आखिरी दिनों में होने वाले हवन के लिए क्या सामग्री लगेगी, कौन से मंत्र किस क्रम में पढ़े जाते हैं और पूर्णाहुति कैसे दी जाती है।

नवरात्रि की अष्टमी-नवमी पर घर में हवन: सामग्री, विधि और मंत्र तस्वीरें सत्यापित नहीं हैं

नवरात्रि उत्सव में अष्टमी और नवमी के दिन हवन करने की पुरानी परंपरा है। माना जाता है कि हवन पूजा से माता देवी प्रसन्न होती हैं और अपने भक्तों की सारी इच्छाएं पूरी करती हैं। हिंदू धर्म में नवरात्रि के अंत में हवन करने को खास अहमियत दी गई है।

हवन के लिए घर में हवन कुंड होना जरूरी है। इसके अलावा आम की लकड़ी, घी, कपूर और नैवेद्य का सामान भी चाहिए। नवरात्रि के हवन में साफ-सफाई का खास ध्यान रखने को कहा गया है।

सबसे पहले इन पांच मंत्रों से पांच बार शुद्ध देसी घी अर्पण किया जाता है: ॐ प्रजापतये स्वाहा। ॐ इन्द्राय स्वाहा। ॐ अग्नये स्वाहा। ॐ सोमाय स्वाहा। ॐ भूः स्वाहा।

अगर दो या उससे ज्यादा लोग हवन कर रहे हों तो एक सदस्य घी अर्पण करे और बाकी सदस्य हवन सामग्री अर्पण करें। इसका मंत्र यह है: ऊँ सूर्याय नमः स्वाहा। ऊँ चंद्रयसे स्वाहा। ऊं भौमाय नमः स्वाहा। ऊँ बुधाय नमः स्वाहा। ऊँ गुरवे नमः स्वाहा। ऊँ शुक्राय नमः स्वाहा। ऊँ शनये नमः स्वाहा। ऊँ राहवे नमः स्वाहा। ऊँ केतवे नमः स्वाहा।

इसके बाद गायत्री मंत्र का 21 बार जप करके नैवेद्य दिखाया जाए। मंत्र यह है: ॐ भूर्भुव: स्व: तत्सवितुर्वरेण्यं भर्गो देवस्य धीमहि धियो यो न: प्रचोदयात्। स्वाहा (21 बार)।

फिर नीचे दिए मंत्रों से हवन में घी अर्पण करें: ॐ गणेशाय नम: स्वाहा। ॐ गौरियाय नम: स्वाहा। ॐ नवग्रहाय नम: स्वाहा। ॐ दुर्गाय नम: स्वाहा। ॐ महाकालिकाय नम: स्वाहा। ॐ हनुमते नम: स्वाहा। ॐ भैरवाय नम: स्वाहा। ॐ कुल देवताय नम: स्वाहा। ॐ स्थान देवताय नम: स्वाहा। ॐ ब्रह्माय नम: स्वाहा। ॐ विष्णुवे नम: स्वाहा। ॐ शिवाय नम: स्वाहा।

नवदुर्गा नवरात्रि हवन मंत्र इस तरह हैं: ॐ दुर्गा देवी नमः स्वाहा। ॐ शैलपुत्री देवी नमः स्वाहा। ॐ ब्रह्मचारिणी देवी नमः स्वाहा। ॐ चंद्र घंटा देवी नमः स्वाहा। ॐ कुष्मांडा देवी नमः स्वाहा। ॐ स्कन्द देवी नमः स्वाहा। ॐ कात्यायनी देवी नमः स्वाहा। ॐ कालरात्रि देवी नमः स्वाहा। ॐ महागौरी देवी नमः स्वाहा। ॐ सिद्धिदात्री देवी नमः स्वाहा।

ॐ जयंती मंगलाकाली भद्रकाली कपालिनी दुर्गा क्षमा शिवा धात्री स्वाहा, स्वधा नमस्तुते स्वाहा।

ॐ ब्रह्मामुरारी त्रिपुरांतकारी भानु: शशि: भूमि सुतो बुधश्च: गुरुश्च शुक्रे शनि राहु केतो सर्वे ग्रहा शांति कर: भवंतु स्वाहा।

ॐ गुरुर्ब्रह्मा, गुरुर्विष्णु, गुरुर्देवा महेश्वर: गुरु साक्षात परब्रह्मा तस्मै श्री गुरुवे नम: स्वाहा।

अब महामृत्युंजय मंत्र से 11 बार आहुति दी जाए: "ओम त्र्यंबकम यजमाहे सुगंधिनम् पुष्टीवर्धनम्/ उर्वरुकमिव बंधनं मृत्युमुख्य ममृतत् मृत्युंजय नमः स्वाहा।"

इस मंत्र से एक बार आहुति दें: ॐ शरणागत दीनार्त परित्राण परायणे, सर्व स्यार्ति हरे देवी नारायणी नमस्तुते। स्वाहा।

माता के नरवाण बीज मंत्र से 108 बार आहुति अर्पण करें: "ॐ ऐं ह्रीं क्लीं चामुण्डायै विच्चै। स्वाहा"।

दुर्गा सप्तशती के पांचवें अध्याय में देवताओं ने स्तुति के लिए जिन मंत्रों का उच्चारण किया है, उन्हें भी हवन में अर्पण किया जाता है। इनमें "या देवी सर्वभूतेषु" से शुरू होने वाले श्लोक हैं, जिनमें विष्णुमाया, चेतना, बुद्धि, निद्रा, क्षुधा, छाया, शक्ति, तृष्णा, क्षांति, जाति, लज्जा, शांति, श्रद्धा, कांति, लक्ष्मी, वृत्ति, स्मृति, दया, तुष्टि, मातृ और भ्रांति रूप का नाम आता है। हर श्लोक के बाद "नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः॥ स्वाहा" बोला जाता है।

इसके बाद इन श्लोकों से आहुति दी जाती है: इन्द्रियाणामधिष्ठात्री भुतानाञ्चाखिलेषु या। नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः॥ स्वाहा। चितिरूपेण या कृत्स्नमेतद् व्याप्य स्थिता जगत्। नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः॥ स्वाहा।

स्तुता सुरैः पूर्वमभीष्टसंश्रया। त्तथा सुरेन्द्रेण दिनेषु सेविता। करोतु सा नः शुभहेतुरीश्वरी। शुभानि भद्राण्यभिहन्तु चापदः।। स्वाहा। या साम्प्रतं चोद्धतदैत्यतापितै। रस्माभिरीशा च सुरैर्नमस्यते। या च स्मृता तत्क्षणमेव हन्ति नः। सर्वापदो भक्तिविनम्रमूर्तिभिः।। स्वाहा।

आखिर में हवन के बाद नारियल पर लाल-पीला धागा बांधा जाए। उसका ऊपरी हिस्सा काटकर उसमें घी, सुपारी, लौंग, जायफल और जो भी प्रसाद हो वह डालें, साथ ही बची हुई हवन सामग्री भी नारियल में भर दें। फिर पूर्णाहुति मंत्र बोलते हुए यह नारियल हवन कुंड की आग के बीच में रखा जाए।

पूर्णाहुति मंत्र: ऊँ पूर्णमद: पूर्णम् इदम् पूर्णात पूर्णादिमं उच्यते, पुणस्य पूर्णम् उदच्यते। पूर्णस्य पूर्णभादाय पूर्णमेवावाशिष्यते।।

इस मंत्र के जप से पूर्ण आहुति अर्पण होती है। पूरे नैवेद्य के बाद परिवार के साथ आरती करके हवन किया जाए और अंत में देवी मां से क्षमा मांगी जाए। इस तरह घर पर नवरात्रि का हवन किया जा सकता है।

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