नवी मुंबई में फर्जी 'प्रेस-पुलिस' स्टीकर लगाकर गाड़ियां दौड़ाने का मामला उजागर
कोपरखैरणे इलाके में बार बालाओं को लाने-ले जाने वाली प्राइवेट गाड़ियों पर 'प्रेस' और 'पुलिस' लिखकर धड़ल्ले से वाहतूक की जा रही थी।
नवी मुंबई शहर में, खासकर कोपरखैरणे इलाके में, फर्जी 'प्रेस' यानी पत्रकार और 'पुलिस' के स्टीकर लगाकर गैरकानूनी काम करने वालों की तादाद अचानक बढ़ गई है। बार में काम करने वाली बालाओं को बार तक छोड़ने और वहां से वापस लाने के लिए, यानी पिकअप-ड्रॉप सर्विस के लिए इस्तेमाल होने वाली प्राइवेट गाड़ियों पर खुलेआम 'प्रेस' या 'पुलिस' लिखकर शहर में गाड़ियां दौड़ाई जा रही हैं। यह चौंकाने वाला सच अब सामने आया है।
कुछ दिन पहले कोपरखैरणे गांव के रांजणदेवी मंदिर के आसपास एक ऐसा ही मामला पकड़ में आया। एक मारुती इको गाड़ी, जिसका नंबर MH 46 N 5612 था, उसके पीछे के शीशे पर साफ-साफ 'प्रेस' लिखा हुआ दिखा। इसी गाड़ी से बार बालाओं की आना-जाना कराया जा रहा था। इको के अलावा टाटा सुमो, क्वालिस और सेंट्रो जैसी गाड़ियों का इस्तेमाल कर बार बालाओं को इसी तरह सेफ पहुंचाया जा रहा है, ऐसा सामने आया है।
रात के वक्त या नाकाबंदी के दौरान पुलिस की चेकिंग से बचने के लिए इन गाड़ियों पर 'प्रेस' या 'पुलिस' के स्टीकर चिपकाए जाते हैं। इसका फायदा यह होता है कि नाकाबंदी में पुलिस ऐसी गाड़ियों को बिना रोके जाने देती है, और इसी का गलत फायदा गाड़ी चलाने वाले और बार मालिक उठा रहे हैं।
इसमें सबसे गंभीर बात यह सामने आई कि कुछ केवल नाम के लिए चलने वाले 'साप्ताहिक' अखबारों के संपादक महज 500 से 10 हजार रुपये लेकर इन गाड़ी चालकों को सीधे अखबार का ऑफिशियल आईकार्ड बनाकर दे रहे हैं। यह आईकार्ड दिखाकर नाकाबंदी में पुलिस पर दबाव डाला जाता है।
पत्रकारिता को लोकतंत्र का चौथा खंभा माना जाता है। लेकिन इस तरह गलत और गैरकानूनी कामों के लिए 'प्रेस' शब्द और स्टीकर का गलत इस्तेमाल होने से असली और ईमानदार पत्रकारों की इमेज खराब हो रही है। गांव-गली में, मंदिर परिसर में और रिहायशी इलाकों में ऐसी शक के दायरे में आने वाली गाड़ियां खड़ी होने से स्थानीय लोगों में भी डर और गलतफहमी का माहौल बन रहा है।
अगर आगे चलकर ऐसी गाड़ियों से कोई दुर्भाग्यपूर्ण या गंभीर आपराधिक घटना हो गई, तो उसकी जिम्मेदारी कौन लेगा, ऐसा गुस्से भरा सवाल नवी मुंबई के नागरिक पूछ रहे हैं। आरटीओ और नवी मुंबई पुलिस से सख्त कार्रवाई की मांग की जा रही है। इस पूरे मामले से नवी मुंबई में फर्जी पत्रकारों की भरमार और उनका चल रहा खेल खुलकर सामने आया है।
गाड़ियों के शीशे पर गैरकानूनी तरीके से 'प्रेस' या 'पुलिस' लिखने वाली गाड़ियों और नियम तोड़कर पिकअप-ड्रॉप करने वाली गाड़ियों पर तुरंत जब्ती की कार्रवाई की मांग की जा रही है। साथ ही पैसों के लालच में अनऑफिशियल आईकार्ड बांटने वाले ऐसे साप्ताहिक संपादकों की जांच कर उन पर केस दर्ज करने की मांग नवी मुंबई पुलिस से की जा रही है। ऐसी फर्जी स्टीकर वाली गाड़ियों और उनकी आड़ में चलने वाले गैरकानूनी धंधों पर नवी मुंबई पुलिस कमिश्नरेट क्या कदम उठाता है, इस पर पूरे शहर की नजर टिकी है।