सोम‌वार, 26 अक्टूबर 2026

अभी सब्सक्राइब करें
प्राइम अलर्ट
सारे लाइव अपडेट
AQI 319 | Very Poor 10:13 IST

नागपुर पुलिस मुख्यालय में शहीदों को सलामी, 153 जवानों के नाम पढ़े गए

पुलिस स्मृति दिवस पर नागपुर शहर पुलिस मुख्यालय के शहीद स्मारक पर बुधवार को श्रद्धांजलि कार्यक्रम हुआ।

नागपुर पुलिस मुख्यालय में शहीदों को सलामी, 153 जवानों के नाम पढ़े गए तस्वीरें सत्यापित नहीं हैं

नागपुर में बुधवार, 21 अक्टूबर 2026 को सुबह 8 बजे शहर पुलिस मुख्यालय के शहीद स्मारक पर पुलिस शहीद दिवस का कार्यक्रम हुआ। यह कार्यक्रम नागपुर शहर पुलिस आयुक्तालय और शहर के दूसरे पुलिस विभागों ने मिलकर रखा था। इसमें देश की सुरक्षा, कानून-व्यवस्था और लोगों की हिफाजत के लिए जान देने वाले पुलिस जवानों को श्रद्धांजलि दी गई।

मुंबई उच्च न्यायालय की नागपुर खंडपीठ के प्रशासनिक न्यायमूर्ति अनिल किलोर कार्यक्रम के प्रमुख अतिथि थे। उनके साथ नागपुर शहर के पुलिस आयुक्त विश्वास नांगरे पाटील, सह पुलिस आयुक्त नवीनचंद्र रेड्डी, राज्य आरक्षित पुलिस बल के विशेष पुलिस महानिरीक्षक निसार तांबोली और नागपुर रेंज के पुलिस महानिरीक्षक संदीप पाटील मौजूद रहे।

अपर पुलिस आयुक्त विनीता शाहू, वसंत परदेशी और राजेंद्र दाभाडे भी आए। नागपुर ग्रामीण के पुलिस अधीक्षक हर्ष पोद्दार, राजमार्ग पुलिस अधीक्षक लोहित मतानी, राज्य आरक्षित पुलिस बल समूह क्रमांक-4 के कमांडेंट बच्चन सिंह, रेलवे पुलिस अधीक्षक मंगेश पोपट शिंदे, जेल पुलिस अधीक्षक वैभव आगे और वायरलेस विभाग के पुलिस अधीक्षक सुनील सावंत ने भी हिस्सा लिया।

पुलिस उपायुक्तों में अन्नपूर्णा सिंह, रश्मिता राव, नित्यानंद झा, महेक स्वामी, आदित्य मिरखेलकर, रमेश धुमाल, डॉ. संदीप पखाले और राहुल माकणिकर समारोह में थे। नागपुर ग्रामीण के अपर पुलिस अधीक्षक अनिल मस्के, जेल विभाग की अपर पुलिस अधीक्षक दीपा आगे, सभी सहायक पुलिस आयुक्त, अलग-अलग थानों के वरिष्ठ पुलिस निरीक्षक, रिटायर्ड पुलिस अफसर, पुलिस कर्मचारी और आम नागरिक भी शामिल हुए।

सलामी परेड में नागपुर शहर पुलिस, नागपुर जिला ग्रामीण पुलिस, नागपुर रेलवे पुलिस और राज्य आरक्षित पुलिस बल समूह क्रमांक-4 की एक-एक टुकड़ी उतरी। इन चारों टुकड़ियों के कुल 120 पुलिस जवानों ने शहीदों को शोक सलामी दी। पुलिस बैंड की टुकड़ी भी साथ रही। परेड का संचालन नागपुर शहर पुलिस मुख्यालय के रिजर्व पुलिस निरीक्षक विनोद तिवारी ने किया, जबकि कार्यक्रम का संचालन सहायक पुलिस आयुक्त नरेंद्र हिवरे ने संभाला।

सहायक पुलिस आयुक्त शिवप्रसाद पारवे और पुलिस निरीक्षक अरुण क्षीरसागर ने देशभर में ड्यूटी निभाते हुए शहीद हुए 153 पुलिस अधिकारियों और जवानों के नाम पढ़े। इसके बाद मेहमानों, वरिष्ठ अफसरों, कर्मचारियों और नागरिकों ने स्मारक पर पुष्पचक्र और फूल चढ़ाकर श्रद्धांजलि दी।

पुलिस स्मृति दिवस हर साल 21 अक्टूबर को मनाया जाता है। इसका नाता 1959 की हॉट स्प्रिंग्स की घटना से है। 21 अक्टूबर 1959 को लद्दाख के बेहद दुर्गम और ऊंचाई वाले इलाके में केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल (सीआरपीएफ) के उपनिरीक्षक करम सिंह की अगुवाई में 10 जवानों की टुकड़ी सीमा पर गश्त कर रही थी। ऊंचाई, मुश्किल पहाड़ी रास्तों और बहुत कम तापमान की वजह से वहां गश्त आसान नहीं थी।

गश्त के दौरान टुकड़ी को कुछ संदिग्ध गतिविधियां दिखीं। हालात की गंभीरता देखकर दल के प्रमुख ने जवानों को सुरक्षित जगह पर मोर्चा लेने का इशारा किया। तभी चीनी सैनिकों की ओर से भारतीय पुलिस दल पर स्वचालित हथियारों से गोलीबारी शुरू हो गई। भारतीय जवानों ने भी जवाब दिया। दुश्मन सैनिक ज्यादा थे और हथियार सीमित, फिर भी जवान पीछे नहीं हटे और लड़ते हुए सर्वोच्च बलिदान दिया।

उस घटना में शहीद हुए जवानों में धर्म सिंह, पूरण सिंह, नारबू लांबा, बेगराजमल, माखनलाल, ईमान सिंह, तेशरिंग बोखू, नारबू, हंगजीत सुब्बा और शिवनाथ प्रताप के नाम दर्ज हैं। उनके पार्थिव अवशेष भारत को सौंपे गए और 14 नवंबर 1959 को हॉट स्प्रिंग्स में पूरे राजकीय सम्मान के साथ उनका अंतिम संस्कार हुआ। उनकी याद में हॉट स्प्रिंग्स में स्मारक बनाया गया है।

उस स्मारक पर लिखा है: "When you go home tell them of us for their tomorrow, we give up our today." यानी, जब आप घर लौटें तो लोगों को हमारे बारे में बताना, उनके बेहतर कल के लिए हमने अपना आज कुर्बान कर दिया।

इस साल देशभर में ड्यूटी निभाते हुए 153 पुलिस अधिकारी और जवान शहीद हुए। इस दिन देशभर के पुलिस संगठनों में शहीदों को श्रद्धांजलि दी जाती है, नामों का वाचन होता है, शोक सलामी दी जाती है और दो मिनट का मौन रखा जाता है। नागपुर में भी उपस्थित अफसरों और नागरिकों ने शहीदों का बलिदान याद करते हुए देश की सुरक्षा और लोगों की सेवा के प्रति अपनी प्रतिबद्धता दोहराई।

क्या हम इस विज़िट को गिन लें? PT24 गूगल एनालिटिक्स से देखता है कि कौन सी खबरें किस पर पढ़ी जाती हैं। आपके हां कहने तक यह बंद है, आप सोच रहे हैं तब तक कुछ नहीं गिना जाता, और आप You पर कभी भी अपना मन बदल सकते हैं। हम क्या लेंगे