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नागपुर में पानी की बर्बादी रोकने को मनपा की सख्ती, गाड़ी धुलाई पर 5,000 रुपये तक जुर्माना

संभावित जल संकट को देखते हुए मनपा आयुक्त ने वॉशिंग सेंटर और स्विमिंग पूल की जांच के निर्देश दिए हैं।

नागपुर में पानी की बर्बादी रोकने को मनपा की सख्ती, गाड़ी धुलाई पर 5,000 रुपये तक जुर्माना तस्वीरें सत्यापित नहीं हैं

नागपुर शहर में आगे पानी का संकट खड़ा होने की आशंका को देखते हुए महानगरपालिका ने पीने के पानी के गलत इस्तेमाल पर सख्ती करने का फैसला किया है। मनपा आयुक्त डॉ. विपीन ने शनिवार को आपात बैठक बुलाई और अफसरों को शहर के सभी वाहन वॉशिंग सेंटर और स्विमिंग पूल की गहन जांच करने के निर्देश दिए।

जांच में अगर पीने के पानी का नियमों के खिलाफ इस्तेमाल या पानी की बर्बादी मिली, तो संबंधित संचालकों पर कार्रवाई होगी। गाड़ी धोने, सड़क की सफाई, बागवानी और निर्माण कामों में पीने का पानी इस्तेमाल करते पकड़े जाने पर हर घटना के लिए Rs 5,000 तक जुर्माना लगाया जा सकता है। नियम तोड़ने वाले संचालकों और मालिकों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।

बैठक छत्रपति शिवाजी महाराज प्रशासनिक भवन के आयुक्त सभा कक्ष में हुई। इसमें अतिरिक्त आयुक्त अंकित, अतिरिक्त आयुक्त मुरुगंथम एम., मुख्य अभियंता लीना उपाध्ये, अधीक्षक अभियंता राजेश दुफारे, सभी सहायक आयुक्त, कार्यकारी अभियंता श्रीकांत वाईकर और OCW के कुशल अतकरे समेत जलप्रदाय विभाग के अफसर मौजूद थे।

इस साल बारिश कम हुई है। इसी वजह से नागपुर को पीने का पानी देने वाले जलाशयों में अभी सिर्फ 58 प्रतिशत पानी बचा है। प्रशासन ने पानी बचाने, दूसरे जल स्रोतों के इस्तेमाल और सप्लाई में हो रही बर्बादी रोकने पर जोर दिया है।

मनपा अवैध नल कनेक्शनों के खिलाफ भी अभियान चलाएगी। पहले जोनल कार्यालयों में शिविर लगाकर लोगों को अवैध कनेक्शन नियमित कराने का मौका दिया जाएगा। उसके बाद इन कनेक्शनों पर मीटर लगाने का काम शुरू होगा। मीटर से छेड़छाड़ करने या मीटर निकालने के मामलों में पुलिस में अपराध दर्ज कराने के निर्देश भी दिए गए हैं। प्रशासन ने साफ किया है कि त्योहारों के दौरान भी अवैध कनेक्शनों पर कार्रवाई चलती रहेगी।

पीने के पानी पर बढ़ता दबाव घटाने के लिए मनपा सार्वजनिक कुओं को वैकल्पिक जल स्रोत बनाने की योजना बना रही है। इसमें कुओं की सफाई, पानी की गुणवत्ता की जांच और महाराष्ट्र ऊर्जा विकास अभिकरण (MEDA) की मदद से सोलर पंप लगाना शामिल है। इस पानी का इस्तेमाल गाड़ी धोने और बागवानी जैसे कामों में हो सकेगा, जिससे पीने का पानी बचेगा।

बैठक में भूजल संरक्षण और वैकल्पिक स्रोतों को मजबूत करने पर भी बात हुई। भूजल सर्वेक्षण एवं विकास एजेंसी (GSDA) के मार्गदर्शन में रेनवॉटर हार्वेस्टिंग को बढ़ावा देने और कुओं व बोरवेल को फिर से चालू करने की योजना बनेगी। साथ ही सही जगहों पर विकेंद्रीकृत सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट (STP) लगाकर साफ किए गए पानी को बगीचों, सड़क डिवाइडरों के पौधों की सिंचाई और निर्माण कामों में इस्तेमाल किया जाएगा।

आयुक्त ने जलवाहिनियों के लीकेज को तुरंत ठीक करने के निर्देश भी दिए हैं। प्रशासन का मकसद पानी की बर्बादी रोकना, मौजूद जल भंडार का बेहतर इंतजाम करना और गर्मी का मौसम आने से पहले शहर की जलापूर्ति व्यवस्था को मजबूत करना है।

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