बुधवार, 14 अक्टूबर 2026

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22:44 IST

नागपुर में कान में इयरफोन लगाकर गाड़ी चलाने की आदत बढ़ी, हादसों का खतरा

हेल्मेट को लेकर जागरूकता बढ़ी है, पर "म्यूजिकल ड्राइविंग" की आदत दोपहिया, ऑटो और ई-रिक्षा चालकों में फैल रही है। जुर्माना और लाइसेंस रद्द होने तक की कार्रवाई हो सकती है।

नागपुर में कान में इयरफोन लगाकर गाड़ी चलाने की आदत बढ़ी, हादसों का खतरा तस्वीरें सत्यापित नहीं हैं

नागपुर में ट्रैफिक की रफ्तार बढ़ती जा रही है और उसके साथ कुछ ऐसी नई आदतें भी बढ़ रही हैं जो हादसों को न्योता देती हैं। दोपहिया चलाते समय हेल्मेट पहनने को लेकर बहुत से वाहन चालक जागरूक हो गए हैं, लेकिन उसी समय कान में ब्लूटूथ इयरफोन या इयरफोन लगाकर गाड़ी चलाने का चलन भी दिख रहा है। इसे "म्यूजिकल ड्राइविंग" कहा जा रहा है।

यह आदत ऑटोरिक्षा और ई-रिक्षा चालकों में भी नजर आ रही है, इसलिए सड़क सुरक्षा का सवाल गंभीर हो गया है। शहर में सीताबर्डी मुख्य मार्ग, लॉ कॉलेज चौक, विद्यापीठ परिसर के रास्ते और वर्धा रोड समेत कई भीड़भाड़ वाली जगहों पर लोग इयरफोन लगाकर गाड़ी चलाते दिखते हैं। खासकर युवाओं और कॉलेज के छात्रों में यह आदत ज्यादा पाई जाती है।

इयरफोन की वजह से हॉर्न, एम्बुलेंस के सायरन और दूसरी गाड़ियों की आवाज सुनने में दिक्कत हो सकती है। मोबाइल पर बातचीत या संगीत से ध्यान भटक जाए, तो अचानक सामने आई स्थिति पर प्रतिक्रिया देने में देर होने की आशंका रहती है।

ट्रैफिक नियमों पर अमल के लिए पुलिस की तरफ से अलग-अलग मुहिम चलाई जाती हैं। हेल्मेट न पहनने वाले वाहन चालकों पर कार्रवाई होती है। लेकिन इयरफोन लगाकर गाड़ी चलाने के मामलों पर काबू रखना भी एक बड़ी चुनौती बनता जा रहा है।

नियम की बात करें तो मोटर वाहन कानून की धारा 184 और केंद्रीय मोटर वाहन नियमों के मुताबिक गाड़ी चलाते समय मोबाइल या इयरफोन का इस्तेमाल करने पर 5 हजार तक का जुर्माना हो सकता है। बार-बार नियम तोड़ने पर अदालत के जरिए ड्राइविंग लाइसेंस रद्द करने की कार्रवाई भी हो सकती है।

बिना हेल्मेट दोपहिया चलाने के मामले में मोटर वाहन कानून की धारा 129 और 194डी के तहत चालक और पीछे बैठने वाले, दोनों के लिए हेल्मेट पहनना अनिवार्य है। नियम तोड़ने पर एक हजार तक का जुर्माना और ड्राइविंग लाइसेंस निलंबित करने की कार्रवाई हो सकती है।

ट्रैफिक पुलिस चाहे जितनी जांच करे या ई-चालान से जुर्माना लगाए, जब तक चालकों की आदतें नहीं बदलतीं, इस समस्या पर असरदार काबू पाना मुश्किल है। गाड़ी चलाते समय इयरफोन से बचना, मोबाइल पर बात करनी हो तो सुरक्षित जगह गाड़ी रोकना और ट्रैफिक पर पूरा ध्यान देना जरूरी है। सुरक्षित और अनुशासित ट्रैफिक के लिए हेल्मेट जितना अहम है, उतना ही जरूरी गाड़ी चलाते समय इयरफोन से दूर रहना भी है।

दोपहिया चालकों की तरह ऑटोरिक्षा और ई-रिक्षा चालकों में भी इयरफोन लगाकर गाड़ी चलाने की आदत दिखती है। सवारियां लेकर चल रहे चालक का ध्यान सड़क के बजाय मोबाइल या संगीत पर हो, तो हादसे का खतरा बढ़ सकता है। सिग्नल, पैदल चलने वालों, अचानक सामने आने वाली गाड़ियों और लेन बदलने की तरफ से ध्यान हट जाने की आशंका रहती है। कुछ चालक धीमी रफ्तार से या गलत तरीके से गाड़ी चलाते हैं, जिससे पीछे की गाड़ियों का जाम लग जाता है। इस तरह एक चालक की निजी आदत का खामियाजा दूसरे वाहन चालकों और यात्रियों को भी भुगतना पड़ सकता है।

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