नागपुर में इको फ्रेंडली गणेश विसर्जन को नागरिकों का जबरदस्त रिस्पॉन्स
नागपुर महानगरपालिका के कृत्रिम टैंकों में विसर्जन के लिए शहरवासी बड़ी तादाद में आगे आए, लेकिन POP मूर्तियों की बिक्री अभी भी चिंता की बात बनी हुई है।
नागपुर महानगरपालिका (NMC) ने शहर के तालाबों और अन्य नैसर्गिक जलस्रोतों में गणेश मूर्तियों के विसर्जन पर पूरी तरह पाबंदी लगा दी है। इसके बाद अब नागपुरवासी पर्यावरण के लिहाज से सुरक्षित विकल्पों की तरफ बढ़ रहे हैं। छोटी मूर्तियों के विसर्जन के लिए महानगरपालिका ने शहरभर में 447 कृत्रिम विसर्जन टैंक बनाए हैं। जहां जरूरत पड़े वहां नागरिकों के घर तक पहुंचकर विसर्जन करने के लिए विसर्जन रथ भी तैनात किए गए हैं।
इस मुहिम को नागपुरवासियों का अच्छा साथ मिल रहा है। कई स्वयंसेवी संस्थाएं भी महानगरपालिका के साथ मिलकर काम कर रही हैं। ग्रीन विजिल फाउंडेशन 2010 से महानगरपालिका के इको फ्रेंडली गणेश विसर्जन अभियान से जुड़ा हुआ है और लगातार 16वें साल फुटाला तालाब के एयर फोर्स साइड पर अपना काम कर रहा है।
ग्रीन विजिल फाउंडेशन की टीम लीड सुरभि जायसवाल के मुताबिक, बीते सालों में लोगों के रिस्पॉन्स में काफी बदलाव आया है। उन्होंने बताया कि शुरुआती सालों में भक्तों को तालाब में विसर्जन न करने के लिए मनाना मुश्किल होता था। यहां तक कि निर्माल्य जमा करना भी एक चुनौती थी, क्योंकि लोग इसे वॉलंटियर्स के हवाले करने में हिचकिचाते थे। सुरभि जायसवाल ने कहा, "आज नागरिक खुद आगे आकर कृत्रिम विसर्जन सुविधा का इस्तेमाल करते हैं और खुशी-खुशी हमें निर्माल्य और बाकी पूजा सामग्री दे देते हैं।"
हालांकि, प्लास्टर ऑफ पेरिस यानी POP से बनी मूर्तियों का इस्तेमाल अभी भी चिंता की बात बना हुआ है। फुटाला तालाब पर तैनात ग्रीन विजिल फाउंडेशन की वॉलंटियर श्रिया जोगे ने बताया कि पाबंदी के बावजूद POP की मूर्तियां बिक और खरीदी जा रही हैं। विसर्जन के पहले छह दिनों में फुटाला तालाब साइट पर कुल 1,335 मूर्तियां आईं, जिनमें से 95 मूर्तियां POP से बनी थीं।
इस अभियान में ग्रीन विजिल फाउंडेशन के सदस्य कौस्तव चटर्जी, सुरभि जायसवाल, मेहुल कोसुरकर, श्रिया जोगे, बिष्णुदेव यादव, पिनाकी बनिक, प्रिया यादव, तुषार देशमुख और पार्थ जुमडे का सहयोग मिल रहा है। इनके अलावा हार्दिक अग्रवाल, अनुष्का गुरवे, हर्ष जोरा, अमेय शेंद्रे, अवंती जोशी और REEF तथा श्री रामदेवबाबा यूनिवर्सिटी के दूसरे वॉलंटियर्स भी इस काम में जुटे हुए हैं।