नागपुर में बीएलओ लोगों को स्कूल बुलाकर दस्तावेज़ मांग रहे, नागरिकों ने जताई आपत्ति
नागरिकों का कहना है कि चुनाव आयोग के घर-घर जाने के निर्देश के बावजूद कुछ बीएलओ उन्हें स्कूल बुलाकर 2 घंटे में दस्तावेज़ जमा करने को कह रहे हैं।
नागपुर में एसआईआर की प्रक्रिया के तहत कुछ बीएलओ पर आरोप है कि वे चुनाव आयोग के निर्देश के उलट काम कर रहे हैं। बताया गया है कि पूरे देश में एसआईआर की खामियों को लेकर विरोध हो रहा है और मुख्य चुनाव आयुक्त के इस्तीफे की मांग को लेकर आंदोलन चल रहे हैं। इसी बीच चुनाव आयोग ने उन लोगों के लिए सख्त निर्देश जारी किए हैं, जिनके नाम मतदाता सूची में शामिल नहीं हुए हैं।
आयोग के निर्देशों में एक यह है कि बीएलओ खुद घर-घर जाकर दस्तावेज़ लेंगे। लेकिन नागपुर में लोगों को मैसेज भेजे जा रहे हैं कि वे किसी स्कूल, मंदिर परिसर या दूसरी सार्वजनिक जगह पर आकर अपने दस्तावेज़ जमा कर जाएं। मैसेज में यह भी कहा जा रहा है कि जो लोग दस्तावेज़ दे जाएंगे, उन्हें नोटिस और सुनवाई की जरूरत नहीं पड़ेगी।
इतवारी और गांधीबाग इलाके के कुछ नागरिकों ने बताया कि उन्होंने पहली ही बार में सारे सही दस्तावेज़ दिए थे। इसके बावजूद सूची में उनके नाम के साथ काफी गलतियां हैं। किसी जगह पिता का नाम आगे लिखा गया है, तो कहीं स्पेलिंग की गलती है। नागरिकों का सवाल है कि ये गलतियां बीएलओ से हुईं या सिस्टम से। अब इन्हें सुधरवाने के लिए उन्हें फिर से चक्कर काटने पड़ेंगे। उनका कहना है कि जब बीएलओ को घर जाकर दस्तावेज़ लेने का निर्देश है, तो वे अपने काम में लापरवाही बरत रहे हैं।
एक नागरिक ने बताया कि उन्हें अपने इलाके के बीएलओ का मैसेज आया। उसमें लिखा था कि नाम की गलती सीधे बूथ लेवल ऑफिसर के एप से ही ठीक हो सकती है, इसलिए दस्तावेज़ दे जाएं, फिर सुनवाई की कोई जरूरत नहीं पड़ेगी।
दस्तावेज़ देने के लिए 3 अक्टूबर को दोपहर 12 से 2 बजे तक राजकुमार केवलरामानी स्कूल में बुलाया गया था, यानी सिर्फ 2 घंटे का समय दिया गया। नागरिकों के मुताबिक दक्षिण नागपुर में भी यही रवैया चल रहा है।
एक और नागरिक ने बताया कि उनका नाम पिता के नाम और सरनेम के साथ सही लिखा गया था, लेकिन पिता के नाम वाले कॉलम में पिता का नाम ही गलत कर दिया गया। उनका कहना है कि पहले सही और फिर नीचे गलत नाम कैसे लिखा गया, यह लापरवाही की हद है। अब उन्हें नाम सुधरवाने के लिए दोबारा प्रक्रिया करनी होगी।
उधर महाराष्ट्र में चल रहे एसआईआर के तहत आयोग की ओर से जानकारी दी गई है कि 'नो मैपिंग' या 'तार्किक विसंगति' श्रेणियों में सुनवाई का नोटिस पाने वाले मतदाताओं को खुद हाज़िर होने की जरूरत नहीं है। अधिकारियों का कहना है कि बीएलओ नोटिस पाने वाले मतदाताओं के घर जाएंगे और जरूरी दस्तावेज़ इकट्ठा करेंगे। चुनाव आयोग के सुधारे हुए निर्देशों के अनुसार मतदाता जरूरी दस्तावेज़ या सबूत संबंधित बीएलओ को वाट्सएप से भी भेज सकते हैं।
इसके बावजूद कुछ बीएलओ मतदाताओं को तय जगह पर तय समय के लिए बुलाने के मैसेज भेज रहे हैं। नागरिकों ने जिला चुनाव अधिकारी से इस पर ध्यान देने की मांग की है।
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