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नागपुर के लोधीपुरा में फ्रिज की दुकान और दो घर आग की चपेट में, 35.7 लाख का नुकसान

सेंट्रल एवेन्यू के लोधीपुरा में रविवार सुबह फ्रिज की दुकान में लगी आग दो घरों तक फैली। कोई घायल नहीं हुआ।

नागपुर के लोधीपुरा में फ्रिज की दुकान और दो घर आग की चपेट में, 35.7 लाख का नुकसान तस्वीरें सत्यापित नहीं हैं

नागपुर के लोधीपुरा में रविवार सुबह रेफ्रिजरेटर और होम अप्लायंसेस की एक दुकान में बड़ी आग लग गई। देखते ही देखते लपटें बगल के दो घरों तक पहुंच गईं और पूरे इलाके में भगदड़ जैसा माहौल बन गया। घनी बस्ती वाले इस मोहल्ले में लोग घबराकर बाहर निकल आए। लपटें इतनी ऊंची थीं कि दूर से भी नजर आ रही थीं।

दुकान का नाम अल कौसर रेफ्रिजरेशन है। एक रिपोर्ट के मुताबिक यह सीए रोड पर गीतांजलि टॉकीज के पास है, जबकि दूसरी रिपोर्ट इसे सेंट्रल एवेन्यू पर गीतांजलि चौक के नजदीक बताती है। दुकान तीन भाइयों की है: मोहम्मद अशफाक, मोहम्मद अतीक और अब्दुल लतीफ अंसारी।

आग के वक्त को लेकर दो अलग बातें सामने आई हैं। आसपास के लोगों के हवाले से बताया गया कि करीब 8.30 बजे दुकान से धुआं उठता दिखा और फिर आग भड़क गई। वहीं नागपुर महानगरपालिका (NMC) के फायर अफसर आग लगने का समय सुबह करीब 8.47 बजे बताते हैं। चश्मदीदों ने ही सबसे पहले दमकल विभाग को खबर दी थी।

दुकान में फ्रिज, एसी और वॉशिंग मशीन समेत काफी सामान भरा था, जो पूरा जलकर राख हो गया। आग के दौरान इलाके में कई जोरदार धमाके हुए। बताया गया है कि फ्रिज और एसी के कंप्रेसर तेज गर्मी में फट रहे थे। तंग गलियों वाले इस मोहल्ले के लोग इन आवाजों से और सहम गए।

सूचना मिलते ही गणेशपेठ फायर स्टेशन की टीम सिर्फ चार मिनट में मौके पर पहुंच गई और आग बुझाने में जुट गई। जब लपटें दुकान से निकलकर रिहायशी मकानों की तरफ बढ़ीं, तो और गाड़ियां बुलानी पड़ीं। गणेशपेठ, सिविल लाइंस, लकड़गंज, वाठोड़ा, सक्करदरा और सुगत नगर स्टेशनों के जवान काम में लगे। एक खबर में कुल 6 दमकल वाहन पहुंचने की बात है, जबकि NMC के आंकड़ों में चार फायर टेंडर और पानी सप्लाई बनाए रखने के लिए चार बाउजर गिनाए गए हैं। आग पर काबू पाने में तीन घंटे से ज्यादा लगे, यानी जवानों को कई घंटे जूझना पड़ा।

एहतियात के तौर पर एक फायर टेंडर वहीं रोका गया, ताकि राख के नीचे दबी चिंगारी से आग दोबारा न भड़के। यह गाड़ी दोपहर 3.50 बजे स्टेशन लौटी।

अच्छी बात यह रही कि किसी की जान नहीं गई और कोई घायल नहीं हुआ।

नुकसान का हिसाब भी सामने आ गया है। अकेले दुकान का सामान करीब 35 लाख रुपए का था। रमेश भावला के घर का नुकसान शुरुआती अंदाज से करीब 50,000 रुपए और मनोज श्रीवास के घर का करीब 20,000 रुपए आंका गया है। पड़ोस के घरों में बेड, कुर्सियां, फर्नीचर, एसी, तिरपाल और दूसरा सामान खराब हो गया। सब मिलाकर कुल नुकसान 35.7 लाख रुपए का है। फायर ब्रिगेड के जवान करीब 5 लाख रुपए का सामान बचाने में कामयाब रहे।

एक सीनियर फायरमैन के मुताबिक दुकान पुरानी बनावट की थी। उसमें टिन की चादरें, लकड़ी का सामान और ईंट की दीवारें थीं, इसीलिए आग तेजी से फैली। यह भी बताया गया कि दुकान में आग बुझाने का कोई इंतजाम नहीं था, जिससे बचाव दल की मुश्किल बढ़ गई।

सूत्रों का कहना है कि दुकान के आसपास की सड़कों पर काफी अतिक्रमण था। इससे दमकल के जवानों को पहुंचने और काम करने में भारी दिक्कत हुई। सूत्रों के हिसाब से अगर सड़कें खुली होतीं, तो आग पर जल्दी काबू पाया जा सकता था और नुकसान काफी कम रहता।

चीफ फायर ऑफिसर तुषार बराहाते, गणेशपेठ फायर स्टेशन के प्रभारी विलास तिलगुले और दूसरे वरिष्ठ अधिकारी हालात का जायजा लेने और राहत कार्य की निगरानी के लिए मौके पर पहुंचे। तिलगुले और लीड फायरमैन बिजवे की देखरेख में जवानों ने आग को काबू में किया।

गणेशपेठ पुलिस ने मामला दर्ज कर लिया है। आग की असली वजह अभी पता नहीं चली है। जांच में यह भी देखा जाएगा कि सुरक्षा इंतजामों में कहां चूक हुई, जिससे नुकसान इतना बढ़ गया। यह हादसा फिर याद दिलाता है कि जहां दुकानें और मकान एक-दूसरे से सटे हों, वहां आग बहुत जल्दी एक जगह से दूसरी जगह पहुंच जाती है।

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