नागपुर के धम्मा फेस्टिव्हल में 'ढसाळ' का टीजर जारी, ललित प्रभाकर नामदेव ढसाळ के रोल में
नागपुर में हुए धम्मा फेस्टिव्हल के मंच पर चरित्रपट 'ढसाळ' का टीजर दिखाया गया। फिल्म में ललित प्रभाकर ने नामदेव ढसाळ की भूमिका निभाई है।
पद्मश्री नामदेव ढसाळ की शख्सियत सिर्फ एक कवि का जीवन सफर नहीं थी, वह अन्याय के खिलाफ भड़क उठे विचारों की क्रांति थी। इसी तूफानी शख्सियत को बड़े पर्दे पर उतारने वाली बहुप्रतीक्षित बायोपिक 'ढसाळ' का टीजर नागपुर में आयोजित धम्मा फेस्टिव्हल के भव्य मंच पर दिखाया गया। टीजर में अभिनेता ललित प्रभाकर ने नामदेव ढसाळ का जो रूप निभाया है, उसकी असरदार झलक दर्शकों को देखने को मिली।
बगावती सोच, बेबाक कलम और सामाजिक सच्चाई से टकराने वाली कविता के दम पर नामदेव ढसाळ ने मराठी साहित्य की दुनिया में अपनी अलग जगह बनाई। उनका जीवन बड़े पर्दे पर कैसे सामने आएगा, इसे लेकर टीजर के बाद उत्सुकता और बढ़ गई है।
फिल्म संजय पांडेय और दि बायोस्कोप फिल्म्स की पेशकश है। इसे वरुणा मदनलाल राणा और संजय पांडे ने बनाया है, और लेखन व निर्देशन की जिम्मेदारी भी इन्हीं दोनों ने संभाली है। फिल्म में नामदेव ढसाळ की जिंदगी का संघर्ष, उनके विचारों की बगावत और समाज व्यवस्था से सवाल पूछने की उनकी बेखौफ सोच को टटोला जाएगा। टीजर में ललित प्रभाकर की भूमिका की झलक दिखी। इस ऐतिहासिक शख्सियत को उन्होंने जो रूप दिया है और उसके पीछे की मेहनत से फिल्म को लेकर दिलचस्पी बढ़ी है।
निर्देशक वरुणा मदनलाल राणा ने कहा, "नामदेव ढसाळ की शख्सियत को समझना सिर्फ एक इंसान का सफर जानना नहीं है, बल्कि उनके विचारों के पीछे की बेचैनी, उनकी बगावत और समाज के अन्याय के खिलाफ खड़े होने की उनकी ताकत को समझना है। इस फिल्म के लिए हमने उनकी जिंदगी और साहित्य का कई साल अध्ययन किया। उनका संघर्ष और उनके विचारों की धार पर्दे पर ईमानदारी से रखने की हमारी कोशिश है। धम्मा फेस्टिव्हल जैसे अहम मंच पर फिल्म का टीजर दिखाया जाना हमारे लिए खास खुशी की बात थी।"
निर्माता संजय पांडेय ने कहा, "पद्मश्री नामदेव ढसाळ सिर्फ कवि नहीं थे, बल्कि अन्याय के खिलाफ आवाज उठाने वाले एक बड़े विद्रोही विचारक थे। उनके शब्दों में आग की तपिश थी और उनके विचारों ने कई पीढ़ियों को दिशा दी। ऐसी शख्सियत का जीवन सफर फिल्म में पेश करना हमारे लिए गर्व की बात भी है और उतनी ही बड़ी जिम्मेदारी भी। 'ढसाळ' का टीजर धम्मा फेस्टिव्हल के जरिए दर्शकों के सामने रख पाए, इसकी खास खुशी है। नामदेव ढसाळ के विचारों से नई पीढ़ी का संवाद हो, उनका संघर्ष और उनका योगदान ज्यादा से ज्यादा लोगों तक पहुंचे, यही इस फिल्म के पीछे की भावना है। इस टीजर से दर्शकों में फिल्म को लेकर उत्सुकता बनी, इसकी हमें खुशी है।"
फिल्म को दक्षिण के वरिष्ठ संगीतकार इलैयाराजा का संगीत मिला है। गीत इर्शाद कामील और गुरु ठाकूर ने लिखे हैं। फिल्म के गानों को आदर्श शिंदे, दिव्य कुमार, रोहित राऊत, पद्मनाभ गायकवाड, उर्मिला धनगर और विभावरी आपटे ने आवाज दी है।
अभय सोडये, प्रताप गंगावणे और अश्वजीत कांबळे के संवाद लेखन से फिल्म को असरदार धार मिली है। नामदेव ढसाळ के रूप में ललित प्रभाकर का लुक मेकअप आर्टिस्ट श्रीकांत देसाई ने तैयार किया है। फिल्म के कला निर्देशक एकनाथ कदम हैं और डीओपी मिलिंद जोग हैं।
नामदेव ढसाळ के शब्दों की ताकत, उनके संघर्ष की तपिश और उनकी शख्सियत की बगावती तासीर को बड़े पर्दे पर देखने के लिए अब दर्शक उत्सुक हैं।
कमेंट
अभी कोई कमेंट नहीं। पहले आप लिखिए।