नागपुर के बिरला फर्टिलिटी सेंटर ने दो साल पूरे किए, जटिल बांझपन के मरीज बढ़े
बिरला फर्टिलिटी अँड आयव्हीएफ ने नागपुर और आसपास के जोड़ों को खास प्रजनन सेवाएं देते हुए दो साल पूरे किए हैं।
बिरला फर्टिलिटी अँड आयव्हीएफ ने नागपुर और आसपास के इलाके के जोड़ों को खास प्रजनन सेवाएं देते हुए दो साल पूरे कर लिए हैं। क्लिनिक का कहना है कि वहां जटिल प्रजनन समस्याओं, देर से गर्भधारण और उम्र के साथ आने वाली दिक्कतों के लिए इलाज कराने वाले मरीजों की संख्या बढ़ती दिख रही है। जो जोड़े पिछले इलाज या आईवीएफ के नाकाम होने के बाद दूसरी राय लेना चाहते हैं, उन्हें भी यहां सेवा दी जाती है।
सेंटर के मुताबिक पिछले कुछ सालों में उसने पुरुषों और महिलाओं, दोनों के बांझपन के कई मामलों का इलाज किया है। इनमें कम ओव्हरियन रिझर्व, कम एएमएच, पीएमओएस (पहले पीसीओएस के नाम से जाना जाता था), ट्यूबल-फैक्टर इन्फर्टिलिटी, एन्डोमेट्रिओसिस, फायब्रॉइड्स, ट्यूबरक्युलोसिस और पेल्विक इन्फ्लेमेटरी डिजीज जैसे संक्रमण, बिना वजह वाला बांझपन और ज्यादा उम्र में मां बनने के मामले शामिल हैं। अझूओस्पर्मिया और कम स्पर्म पैरामीटर्स वाले पुरुष-घटक बांझपन के मामले भी सेंटर के क्लिनिकल काम का अहम हिस्सा हैं।
सेंटर ने एक हालिया मामले का ब्योरा दिया है। इसमें एक महिला को 13 साल से प्राथमिक बांझपन था। साथ ही ज्यादा उम्र में मां बनने का मामला, हायपोथायरॉइडिझम और क्रोनिक थ्रॉम्बोसायटोपेनिया भी था। सेंटर के अनुसार, उनका पिछला आईवीएफ साइकल दूसरे केंद्र पर रद्द करना पड़ा था, क्योंकि प्लेटलेट काउंट गिरकर 50,000/युएल तक आ गया था। सेंटर ने इसे प्रजनन इलाज को सुरक्षित तरीके से आगे बढ़ाने की क्लिनिकल चुनौती बताया।
सेंटर का कहना है कि इस मामले में फर्टिलिटी स्पेशलिस्ट, एम्ब्रियोलॉजिस्ट और हिमॅटोलॉजिस्ट के बीच करीबी तालमेल जरूरी था। प्लेटलेट का स्तर संभालते हुए ओव्हरियन स्टिम्युलेशन और एग रेट्रीव्हल के लिए अलग से आईवीएफ योजना बनाई गई। पंद्रह परिपक्व अंडे निकाले गए, कई उच्च गुणवत्ता वाले ब्लास्टोसिस्ट तैयार करके क्रायोप्रिझर्व किए गए और मायक्रोफ्लुइडिक्स से चुने गए स्पर्म से आईसीएसआय किया गया। फिर दिसंबर 2025 में फ्रोजन एम्ब्रियो ट्रान्सफर हुआ। सेंटर के मुताबिक ट्रान्सफर के बाद गर्भधारण पॉझिटिव आया और मामला जुड़वां गर्भधारण तक पहुंचा। पांच महीने की गर्भावस्था में दोनों भ्रूण ठीक से बढ़ रहे थे और प्रसूति से पहले की करीबी निगरानी में प्लेटलेट काउंट स्थिर रहा।
इस मौके पर सेंटर हेड और कन्सल्टंट डॉ. प्रमोद मधुकर येरणे ने कहा, "हमारे यहां कई प्रजनन कारणों के साथ आने वाले जोड़ों की संख्या बढ़ती दिख रही है। ये ओव्हरियन रिझर्व, उम्र, पुरुष-घटक बांझपन, पिछले इलाज की नाकामी या अंदरूनी मेडिकल स्थिति से जुड़े हो सकते हैं। कुछ मामलों में सिर्फ मानक इलाज का रास्ता काफी नहीं होता और अलग-अलग विशेषज्ञताओं के बीच सावधानी से तालमेल की जरूरत पड़ती है। हमारा तरीका यह है कि पहले जोड़े पर असर डालने वाले अलग-अलग कारणों को समझा जाए, उनसे जुड़े जोखिम परखे जाएं और फिर क्लिनिकली सही और उसी जोड़े के हिसाब से इलाज की योजना बनाई जाए। जटिल मामलों में सावधानी से तैयारी और निगरानी के जरिए मरीज की सुरक्षा को हर फैसले के केंद्र में रखकर इलाज आगे बढ़ाना मुमकिन होता है।"
डॉ. येरणे को प्रजनन चिकित्सा और कम चीरे वाली स्त्रीरोग सर्जरी में 13 साल से ज्यादा का अनुभव है। बार-बार आईवीएफ नाकाम होना, बार-बार गर्भपात, फायब्रॉइड्स, एन्डोमेट्रिओसिस और जन्मजात गर्भाशय की असामान्यताओं जैसे जटिल मामलों में वे काम कर चुके हैं। उनके क्लिनिकल अनुभव में 1,200 से ज्यादा आईवीएफ साइकल, 6,000 से ज्यादा लॅपरोस्कोपिक प्रक्रियाएं और 5,000 से ज्यादा हिस्टेरोस्कोपिक प्रक्रियाएं शामिल हैं।
नागपुर के सेंटर में सबसे ज्यादा चुना जाने वाला इलाज वह आईवीएफ है, जिसमें जोड़े के अपने अंडे और स्पर्म इस्तेमाल होते हैं। सेंटर लोगों और जोड़ों के लिए पूरी प्रजनन जांच और उनके हिसाब से बनी इलाज की योजना भी देता है, जिसमें अंदरूनी वजह, क्लिनिकल इतिहास और प्रजनन के लक्ष्यों के मुताबिक देखभाल ढाली जाती है।
सेंटर के अनुसार नागपुर महाराष्ट्र और आसपास के इलाकों के लिए प्रजनन-सेवा का अहम केंद्र बनकर उभरा है। पास के शहरों और जिलों से मरीज यहां खास सलाह और इलाज के लिए आते हैं। जागरूकता बढ़ाने के लिए बिरला फर्टिलिटी अँड आयव्हीएफ नागपुर मरीजों की काउंसलिंग, इनडोर और आउटडोर कैंप, सामुदायिक आउटरीच कार्यक्रम और डॉक्टरों से बातचीत के आयोजन करता है। इसके अलावा बांझपन, जल्दी सलाह और उपलब्ध इलाज के विकल्पों पर शैक्षणिक कार्यक्रम भी चलाता है।