मुंबई के CSMT पर वंचित बहुजन आघाडी का इराण के समर्थन में जन आंदोलन
वंचित बहुजन आघाडी ने गुरुवार को मुंबई के छत्रपती शिवाजी महाराज टर्मिनस पर इराण के समर्थन में जन आंदोलन किया।
मुंबई के छत्रपती शिवाजी महाराज टर्मिनस (CSMT) पर गुरुवार, 1 अक्टूबर को वंचित बहुजन आघाडी की ओर से इराण के समर्थन में जन आंदोलन किया गया। वंचित का कहना है कि केंद्र सरकार तक यह संदेश पहुंचाने के लिए आंदोलन रखा गया था कि "भारत इराण के साथ है"। पार्टी प्रमुख प्रकाश आंबेडकर ने इस आंदोलन का एलान पहले ही कर दिया था।
प्रकाश आंबेडकर ने आंदोलन के बाद अपने पोस्ट में लिखा कि केंद्र सरकार का परराष्ट्र धोरण पूरी तरह अमेरिका के सामने सरेंडर हो चुका है। आंदोलन के दौरान वंचित बहुजन आघाडी ने केंद्र सरकार की विदेश नीति की कड़ी आलोचना की। आंदोलनकारियों का आरोप था कि भारत की विदेश नीति अमेरिका के रुख से जुड़ गई है।
आंदोलनकारियों ने दावा किया कि कश्मीर के मसले पर इराण ने भारत का पक्ष लिया था। इसी आधार पर उनकी मांग थी कि भारत इराण के साथ अपने रिश्तों पर सोचे। उन्होंने इराण से भारत को होने वाली कच्चे तेल की सप्लाई और इससे जुड़े सहयोग का भी जिक्र किया।
वंचित बहुजन आघाडी के आंदोलनकारियों का दावा है कि पश्चिम एशिया के संघर्ष का असर भारत की अर्थव्यवस्था पर पड़ सकता है। उन्होंने चिंता जताई कि कच्चे तेल के दाम बढ़ें तो ईंधन और दूसरी चीजों की कीमतों पर असर होगा और महंगाई का दबाव बढ़ सकता है। भारत के वित्त मंत्रालय की सितंबर 2026 की आर्थिक समीक्षा में भी चेतावनी दी गई है कि कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों और भू-राजनीतिक तनाव से आयात के जरिए आने वाली महंगाई का खतरा बढ़ सकता है।
आंदोलनकारियों ने यह मांग भी रखी कि भारत इस्राइल को हथियार न बेचे। वंचित बहुजन आघाडी का दावा है कि इन हथियारों का इस्तेमाल इराण के खिलाफ संघर्ष में हो सकता है। पार्टी का रुख है कि भारत इराण को लेकर अपना स्टैंड साफ करे और इराण के साथ होने का संदेश दे। 1 अक्टूबर का आंदोलन इसी मांग के लिए रखा गया था।
अमेरिका और इराण के संघर्ष की पृष्ठभूमि में कच्चे तेल की सप्लाई पर असर पड़ने की आशंका है और इससे वैश्विक बाजार में अस्थिरता बनी है। भारत अपनी कच्चे तेल की जरूरत का बड़ा हिस्सा आयात से पूरा करता है, इसलिए तेल की कीमतों में बदलाव का असर देश की अर्थव्यवस्था पर पड़ सकता है। ताजा आंकड़ों के मुताबिक सितंबर में भारत के कच्चे तेल के आयात में पश्चिम एशिया का हिस्सा बढ़ा है। इसलिए इस इलाके के संघर्ष और सप्लाई में रुकावटों को भारत के लिए खास अहमियत से देखा जा रहा है।
इराण और इस्राइल के संघर्ष को लेकर देश में राजनीतिक चर्चा चल रही है कि भारत को किसके पक्ष में खड़ा होना चाहिए। वंचित बहुजन आघाडी ने CSMT के आंदोलन के जरिए मांग की है कि केंद्र सरकार इराण को लेकर अपना रुख बदले, इस्राइल को हथियारों की बिक्री रोके और भारत के आर्थिक हितों का ख्याल रखे। अब इस आंदोलन के बाद नजर इस पर है कि पश्चिम एशिया में भारत की भूमिका को लेकर केंद्र सरकार क्या रुख रखती है।