बुधवार, 14 अक्टूबर 2026

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22:01 IST

मोहिनी अवतार और शिव की कथा: हरिहरपुत्र कहलाते हैं अयप्पा स्वामी

पौराणिक परंपराओं के मुताबिक भगवान विष्णु के मोहिनी रूप से जुड़ी कथा में अयप्पा स्वामी के जन्म का वर्णन मिलता है।

मोहिनी अवतार और शिव की कथा: हरिहरपुत्र कहलाते हैं अयप्पा स्वामी तस्वीरें सत्यापित नहीं हैं

हिंदू पुराणों में भगवान विष्णु के कई अवतारों का वर्णन मिलता है और उनसे जुड़ी कई हैरान करने वाली कथाएं भी। इनमें मोहिनी अवतार को खास माना जाता है। समुद्रमंथन के समय अमृत बांटने के लिए विष्णु ने मोहिनी का रूप लिया था, यह कथा प्रसिद्ध है। इसी मोहिनी अवतार का संबंध भगवान शिव और अयप्पा स्वामी की जन्मकथा से भी जोड़ा जाता है। इसी कथा की वजह से अयप्पा स्वामी को 'हरिहरपुत्र' यानी हरि और हर का पुत्र कहा जाता है।

पुराणकथा के मुताबिक समुद्रमंथन से अमृत निकलने के बाद उसे पाने के लिए देवताओं और असुरों के बीच संघर्ष शुरू हो गया। देवताओं को चिंता थी कि अमृत असुरों के हाथ लग गया तो सृष्टि का संतुलन बिगड़ सकता है। तब भगवान विष्णु ने एक मोहक स्त्री का रूप धारण किया, जिसे 'मोहिनी' नाम मिला। मोहिनी ने अपनी सुंदरता और समझदारी से देवताओं और असुरों को अलग-अलग कतार में बिठाकर अमृत बांटा। कथा के अनुसार अमृत देवताओं को मिला और असुरों को नहीं मिल सका।

कुछ पुराण परंपराओं में बताया गया है कि भगवान महादेव ने विष्णु के मोहिनी रूप के बारे में सुना तो उन्होंने विष्णु से वह रूप देखने की इच्छा जताई। विष्णु ने फिर से मोहिनी का रूप लिया। उस रूप के आकर्षण को देखकर महादेव कुछ समय के लिए मोहित हो गए, ऐसी कथा सुनाई जाती है। इस प्रसंग के ब्योरे अलग-अलग ग्रंथों और परंपराओं में कुछ हद तक बदले हुए दिखाई देते हैं।

दक्षिण भारत में प्रचलित अयप्पा स्वामी की जन्मकथा के मुताबिक महादेव शिव और मोहिनी के दिव्य संयोग से एक पुत्र का जन्म हुआ। वही पुत्र अयप्पा स्वामी हैं। 'हरि' भगवान विष्णु का और 'हर' भगवान शिव का नाम है, इसलिए उन्हें 'हरिहरपुत्र' कहा जाता है। भक्ति परंपरा में इस कथा को शिव और विष्णु की एकता का प्रतीक माना जाता है।

अयप्पा स्वामी का प्रमुख तीर्थक्षेत्र केरल के शबरीमला में है। यहां हर साल बड़ी संख्या में भक्त दर्शन के लिए जाते हैं। अयप्पा स्वामी को ब्रह्मचर्य, संयम, भक्ति और समानता का प्रतीक माना जाता है। उनकी उपासना में खास व्रत, अनुशासन और यात्रा की परंपरा अहम है।

मोहिनी अवतार से जुड़ी अयप्पा स्वामी की कथा को सिर्फ जन्मकथा के तौर पर ही नहीं, बल्कि हिंदू परंपरा के अलग-अलग दैवी रूपों के आपसी संबंध को समझने के एक रास्ते के तौर पर भी देखा जाता है। अलग-अलग पुराणों और क्षेत्रीय कथाओं में ब्योरे भिन्न हो सकते हैं, इसलिए इस कथा को धार्मिक श्रद्धा और परंपरा के संदर्भ में देखना जरूरी है।

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