मिस्र में फैक्ट-चेकिंग मंच मत्सदश् के छह पत्रकार गिरफ्तार, ब्रदरहुड से रिश्ते का आरोप
मिस्र में डिजिटल मीडिया और फैक्ट-चेकिंग मंच मत्सदश् के छह पत्रकारों को गिरफ्तार किया गया है। गृह मंत्रालय ने उन पर मुस्लिम ब्रदरहुड से रिश्ते का दावा किया, जबकि सह-संस्थापक और पत्रकार संरक्षण समितियां इसे खारिज करती हैं।
उत्तर अफ्रीका के प्रमुख देश मिस्र से प्रेस की आजादी को लेकर एक चौंकाने वाली खबर आई है। वहां के जाने-माने स्वतंत्र डिजिटल मीडिया और फैक्ट-चेकिंग मंच मत्सदश् (Matsadaash) की पूरी संपादकीय टीम में से छह पत्रकारों को स्थानीय प्रशासन ने एक साथ गिरफ्तार कर लिया है।
गिरफ्तार पत्रकारों पर प्रतिबंधित राजनीतिक संगठन मुस्लिम ब्रदरहुड से रिश्ता रखने का आरोप लगाया गया है। उन पर यह भी आरोप है कि उन्होंने देश में झूठी और भ्रम फैलाने वाली खबरें फैलाईं।
मिस्र के गृह मंत्रालय के बयान के मुताबिक मत्सदश् एक अनधिकृत डिजिटल पेज है। मंत्रालय का दावा है कि इसे विदेश में रह रहा मुस्लिम ब्रदरहुड का एक फरार सदस्य चलाता है। प्रशासन के मुताबिक ये छह पत्रकार ब्रदरहुड के मीडिया विंग के लिए काम कर रहे थे और उन्होंने सरकार के खिलाफ झूठी और अफवाह फैलाने वाली खबरें तैयार कीं।
लेकिन मत्सदश् के सह-संस्थापक अब्देलरहमान मन्सूर और पत्रकारों की हिफाजत के लिए काम करने वाली अंतरराष्ट्रीय समितियों ने सरकार के इन सभी आरोपों को पूरी तरह बेबुनियाद और झूठा बताकर खारिज कर दिया है।
मत्सदश् की शुरुआत करीब आठ साल पहले हुई थी। शुरू में यह मंच मिस्र और दूसरे अरब देशों में सोशल मीडिया पर फैली झूठी खबरों की सच्चाई सामने लाने वाले निष्पक्ष फैक्ट-चेकिंग मंच के तौर पर काम करता था। धीरे-धीरे इसने अपना दायरा बढ़ाया और मिस्र के सामाजिक, राजनीतिक और आर्थिक मुद्दों पर गहरी खोजी पत्रकारिता भी शुरू की। इससे नागरिकों और पाठकों में इस मंच पर भरोसा काफी बढ़ गया था।
स्वतंत्र तरीके से सच सामने लाने वाले पत्रकारों पर मिस्र के प्रशासन की नजर काफी समय से थी। इससे पहले 2023 में भी इस संस्था के दो वरिष्ठ संपादकों को राज्य सुरक्षा जांच अधिकारियों ने गिरफ्तार किया था। लंबी पूछताछ के बाद भी उनका मुस्लिम ब्रदरहुड या किसी दूसरे गैरकानूनी संगठन से रिश्ता साबित करने वाला कोई सबूत नहीं मिला, इसलिए उन्हें बिना किसी आरोप के छोड़ना पड़ा था। अब पूरी टीम को फिर से हिरासत में लिए जाने से मिस्र में निष्पक्ष पत्रकारिता पर बड़ा सवालिया निशान लग गया है।
गिरफ्तारी की खबर फैलते ही दुनिया भर से इस कार्रवाई की कड़ी निंदा हो रही है। अमेरिका की कमिटी टू प्रोटेक्ट जर्नलिस्ट्स (CPJ), इजिप्शियन इनिशिएटिव फॉर पर्सनल राइट्स और 80 से ज्यादा अंतरराष्ट्रीय और क्षेत्रीय मानवाधिकार संगठनों ने साथ आकर इन पत्रकारों की फौरन और बिना शर्त रिहाई की मांग की है। मानवाधिकार संगठनों के मुताबिक गिरफ्तार छह पत्रकारों को ठीक कहां रखा गया है, इसकी कोई साफ जानकारी उनके परिवार या वकीलों को नहीं दी गई है।
पत्रकारों के हक पर काम करने वाली संस्थाओं की रिपोर्ट के मुताबिक पत्रकारों को जेल में डालने वाले दुनिया के अग्रणी देशों में मिस्र भी गिना जाता है। मौजूदा आंकड़ों के अनुसार मिस्र की अलग-अलग जेलों में करीब 26 से ज्यादा स्वतंत्र पत्रकार और डिजिटल कंटेंट क्रिएटर सिर्फ अपना पेशेवर फर्ज निभाने के लिए बंद हैं। मत्सदश् के सह-संस्थापकों ने कहा, "हम सिर्फ सच और तथ्य पाठकों के सामने रखने का काम कर रहे थे, ऐसे में संस्था पर अचानक हुई यह कार्रवाई बेहद चिंताजनक है।"
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि मिस्र में आज के हालात में स्वतंत्र और निर्भीक पत्रकारिता दिन-ब-दिन ज्यादा जोखिम भरी होती जा रही है। उनके मुताबिक सरकार की नीतियों या कामकाज की आलोचना करने वाले, या सत्ता में बैठे लोगों के दावों को झूठा साबित करने वाले मीडिया पर लगातार कार्रवाई होती रही है। विश्लेषकों के मत में मत्सदश् की पूरी टीम को गिरफ्तार कर मिस्र सरकार ने बाकी स्वतंत्र पत्रकारों को एक तरह से डर का संदेश दिया है।
इन घटनाओं का असर मिस्र के नागरिकों तक पहुंचने वाली जानकारी की पारदर्शिता पर पड़ा है। अंतरराष्ट्रीय समुदाय और मानवाधिकार संस्थाएं इस मामले पर बारीक नजर रखे हुए हैं और हिरासत में लिए गए सभी पत्रकारों की जल्द से जल्द रिहाई के लिए मिस्र सरकार पर अंतरराष्ट्रीय स्तर से दबाव बढ़ाया जा रहा है।