मेट्रो स्टेशनों के 500 मीटर इलाके में ज्यादा घनत्व वाले विकास को बढ़ावा, अश्विनी भिडे ने बताया
भुवनेश्वर की अर्बन मोबिलिटी इंडिया कॉन्फरन्स में अश्विनी भिडे ने TOD नीति और स्टेशनों के आसपास नियोजित विकास पर बात की।
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सार्वजनिक परिवहन और शहरी विकास के बीच तालमेल बैठाना बहुत जरूरी है। मेट्रो स्टेशनों के आसपास योजना के साथ विकास किया जाए तो लोग सार्वजनिक परिवहन का ज्यादा इस्तेमाल करेंगे और शहर में आना-जाना आसान होगा। यह बात मुंबई मेट्रो रेल कॉर्पोरेशन की मैनेजिंग डायरेक्टर और बृहन्मुंबई महानगरपालिका की आयुक्त श्रीमती अश्विनी भिडे ने कही।
वे भुवनेश्वर में हुई 19वीं अर्बन मोबिलिटी इंडिया कॉन्फ्रेंस में बोल रही थीं। 'शहरों की सीमा के पार जमीन का इस्तेमाल और परिवहन' विषय पर हुए सत्र की अध्यक्षता उन्होंने ही की।
महाराष्ट्र में परिवहन-केंद्रित विकास (Transit-Oriented Development - TOD) की पहल का जिक्र करते हुए भिडे ने बताया कि नागपुर और पुणे में इस नीति पर अमल शुरू हो चुका है। मुंबई में भी जमीन के नीचे बने मेट्रो स्टेशनों के करीब 500 मीटर के इलाके में ज्यादा घनत्व वाले विकास को बढ़ावा देने वाली नीति लागू की गई है।
इस नीति के तहत मेट्रो स्टेशनों के आसपास घर, दफ्तर, दुकानें और रोजमर्रा की जरूरत की सुविधाएं योजना बनाकर विकसित करने को प्रोत्साहन दिया जाता है। ज्यादा निर्माण क्षेत्र की इजाजत देने पर जो अतिरिक्त प्रीमियम लिया जाता है, उससे मिलने वाला पैसा स्थानीय नागरिक सुविधाओं और परिवहन के बुनियादी ढांचे पर खर्च होता है। इससे शहरों का विकास ज्यादा नियोजित और एकजुट तरीके से करने में मदद मिलती है।
भिडे ने कहा कि स्टेशनों के आसपास ऐसे विकास से मेट्रो में सफर करने वालों की संख्या बढ़ सकती है, रोज का आना-जाना ज्यादा सुविधाजनक हो सकता है और मुंबई के लंबे समय के आर्थिक विकास को भी रफ्तार मिल सकती है।
उन्होंने यह भी रेखांकित किया कि परिवहन की योजना बनाने और शहरों की सीमा के पार के इलाकों का असरदार विकास करने के लिए अलग-अलग सरकारी एजेंसियों और स्थानीय निकायों के बीच तालमेल होना जरूरी है। उनके मुताबिक लंदन और सिंगापुर जैसे शहरों के अनुभव और विशेषज्ञों की सिफारिशों के आधार पर आगे की शहरी परिवहन नीतियां ज्यादा असरदार ढंग से बनाई जा सकेंगी।
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