मंगलवार, 6 अक्टूबर 2026

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20:40 IST

मराठवाडा पदवीधर चुनाव: महायुती और महाविकास अघाड़ी, दोनों खेमों में उम्मीदवारी पर खींचतान

मराठवाडा पदवीधर मतदारसंघ के चुनाव में सत्ताधारी महायुती और विपक्षी महाविकास आघाडी, दोनों के भीतर बगावत सामने आई है।

मराठवाडा पदवीधर चुनाव: महायुती और महाविकास अघाड़ी, दोनों खेमों में उम्मीदवारी पर खींचतान
एआई से बनाई गई प्रतीकात्मक तस्वीर; यह घटना का वास्तविक फोटो नहीं है | PT24

मराठवाडा पदवीधर मतदारसंघ का चुनाव इस वक्त पूरे राज्य की सियासत में दिलचस्पी का मुद्दा बना हुआ है। शिक्षक और पदवीधर मतदारसंघों के आने वाले चुनावों के लिए सभी पार्टियों ने पूरी ताकत लगा दी है। लेकिन सत्ताधारी महायुती और विपक्षी महाविकास आघाडी, दोनों को अपने ही लोगों की बगावत का सामना करना पड़ रहा है। इस बगावत की वजह से मराठवाडा पदवीधर मतदारसंघ के समीकरण उलझ गए हैं और अब सबकी नजर इस पर है कि आखिर में उम्मीदवारी किसे मिलती है।

पहले महाविकास आघाडी की बात। आघाडी की ओर से शिवसेना (उद्धव बालासाहेब ठाकरे) के अधिकृत उम्मीदवार के तौर पर दिलीप घुगे ने कल ही बड़े जोर-शोर से अपना नामांकन दाखिल किया था। शुरुआत में लग रहा था कि आघाडी की तरफ से घुगे ही चुनाव लड़ेंगे। मगर कुछ ही घंटों में आघाडी के अंदर चिंगारी भड़क उठी।

राष्ट्रवादी काँग्रेस (शरदचंद्र पवार) पार्टी के धाराशिव जिलाध्यक्ष प्रतापसिंह पाटील ने अचानक मैदान में उतरकर अपना नामांकन भर दिया। खास बात यह रही कि जब प्रतापसिंह पाटील नामांकन भरने पहुंचे, तब राष्ट्रवादी शरद पवार गुट के वरिष्ठ नेता और पूर्व मंत्री राजेश टोपे खुद उनके साथ मौजूद थे। इससे साफ हो गया कि महाविकास आघाडी में उम्मीदवारी को लेकर अंदरूनी खींचतान चल रही है।

नामांकन के बाद मीडिया से बात करते हुए प्रतापसिंह पाटील ने पूरा भरोसा जताया कि शिवसेना ठाकरे गुट के उम्मीदवार दिलीप घुगे अपना नामांकन वापस ले लेंगे। राजेश टोपे ने भी अपनी बात रखी। उन्होंने कहा कि ठाकरे गुट के वरिष्ठ नेताओं से उनकी सकारात्मक बातचीत चल रही है और ठाकरे गुट के उम्मीदवार जरूर अपना नामांकन वापस लेंगे। फिर भी यह सवाल बना हुआ है कि यह पेंच कैसे सुलझेगा, ठाकरे गुट पीछे हटेगा या शरद पवार गुट, और इस पर अभी सस्पेंस कायम है।

दूसरी तरफ सत्ताधारी महायुती में भी सब कुछ ठीक नहीं है। सियासी गलियारों में जोरदार चर्चा थी कि मराठवाडा पदवीधर चुनाव में महायुती की उम्मीदवारी राष्ट्रवादी काँग्रेस (अजित पवार) गुट के हिस्से में गई है। इसी के तहत पूर्व विधायक सतीश चव्हाण ने महायुती के मुख्य दावेदार के तौर पर नामांकन दाखिल भी किया था। शुरू में माना जा रहा था कि सीधा मुकाबला सतीश चव्हाण (महायुती) और दिलीप घुगे (महाविकास आघाडी) के बीच होगा।

पर भाजपा के अंदर से इसे बड़ी चुनौती मिल गई है। भारतीय जनता पार्टी के एम. के. देशमुख ने महायुती में सीधी बगावत का झंडा उठा लिया है और खुद नामांकन भरने का ऐलान किया है। इससे महायुती के खेमे में काफी हलचल मच गई है।

एम. के. देशमुख पूर्व शिक्षणाधिकारी हैं और प्रशासन व शिक्षा के क्षेत्र में उनका अच्छा संपर्क है। वे 2024 के विधानसभा चुनाव से पहले सरकारी सेवा से रिटायर हुए थे। उस चुनाव में उन्होंने भाजपा के वरिष्ठ नेता और मंत्री अतुल सावे के खिलाफ लड़ने की तैयारी की थी, लेकिन ऐन वक्त पर पार्टी के कहने पर उन्होंने अपनी उम्मीदवारी वापस ले ली थी। राजनीतिक गलियारों में चर्चा है कि तब भाजपा के वरिष्ठ नेताओं ने उन्हें जबानी भरोसा दिया था कि आने वाले पदवीधर चुनाव में पार्टी उन्हें उम्मीदवारी देगी। कहा जा रहा है कि वादा पूरा न होने की वजह से अब देशमुख ने बगावत का रास्ता चुना है।

सिर्फ पार्टियां और उनके बागी ही नहीं, सोशल मीडिया से घर-घर पहुंचे चेहरे, यानी रील्सस्टार भी मैदान में हैं। रविराज साबले और रमेश पाटील ने इस चुनाव में उतरने का फैसला किया है। युवा मतदाताओं और पदवीधरों में उनकी लोकप्रियता को देखते हुए अब चर्चा हो रही है कि ये उम्मीदवार किसके वोट काटेंगे और किसका गणित बिगाड़ेंगे।

मैदान में ये नाम हैं: सतीश चव्हाण (महायुती के दावेदार, राष्ट्रवादी काँग्रेस अजित पवार गुट), दिलीप घुगे (महाविकास आघाडी के अधिकृत उम्मीदवार, शिवसेना उद्धव बालासाहेब ठाकरे गुट), प्रतापसिंह पाटील (महाविकास आघाडी के बागी, राष्ट्रवादी काँग्रेस शरदचंद्र पवार गुट), एम. के. देशमुख (महायुती के बागी, भारतीय जनता पार्टी), और निर्दलीय व रील्सस्टार रविराज साबले और रमेश पाटील।

अब यह चुनाव सिर्फ पार्टियों का नहीं रहा, उसमें अंदरूनी बगावत और निजी असर भी जुड़ गया है। नतीजा इस पर टिका है कि महाविकास आघाडी में ठाकरे गुट और शरद पवार गुट के बीच तालमेल कैसे बैठता है और महायुती भाजपा के एम. के. देशमुख की बगावत को कैसे रोकती है। नामांकन वापस लेने की आखिरी तारीख तक पर्दे के पीछे कई बड़ी हलचलों की गुंजाइश से इनकार नहीं किया जा सकता।

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