महिलाओं का स्वास्थ्यः पीरियड्स के खून से बदबू क्यों आती है, इंफेक्शन बढ़ने पर दिखते हैं ये लक्षण
पीरियड्स के दौरान खून से हल्का सा वास आना आम बात है, लेकिन अगर बदबू अचानक तेज हो जाए तो यह इंफेक्शन का संकेत हो सकता है।
लड़कियों में आमतौर पर १२ से १३ साल की उम्र के बाद पीरियड्स शुरू हो जाते हैं। यह एक ऐसा चक्र है जो महिलाओं के शरीर में सालों-साल चलता रहता है, और इसी वजह से हर महीने ४ से ५ दिन तक पीरियड्स आते हैं। पीरियड्स शुरू होने से पहले गर्भाशय प्रेगनेंसी के लिए तैयार होता है। ओवरी से एक अंडा बाहर निकलता है और गर्भाशय की परत मोटी हो जाती है। जब प्रेगनेंसी नहीं होती, तो यही मोटी परत खून और टिश्यू के रूप में वजाइना के रास्ते बाहर निकल जाती है, इसी को पीरियड्स कहते हैं। आमतौर पर पीरियड्स का साइकिल २८ से ३० दिन का होता है।
पीरियड्स के दौरान खून से हल्का सा या थोड़ा मेटैलिक जैसा वास आना सामान्य बात मानी जाती है। लेकिन अगर अचानक जलन बढ़ जाए या मछली जैसी तेज बदबू आने लगे, तो यह सामान्य दिक्कत नहीं बल्कि बढ़ते इंफेक्शन का खतरा हो सकता है।
प्राइवेट पार्ट्स में बढ़ी हुई जलन, अचानक खुजली, दर्द, पैड को समय पर न बदलना, पसीना, नमी और टाइट कपड़े पहनना, इन सबकी वजह से भी बदबू आने की संभावना ज्यादा रहती है। इसीलिए पीरियड्स के दौरान दिखने वाले लक्षणों को बिल्कुल नजरअंदाज न करके समय पर इलाज कराना बहुत जरूरी है। हर महीने पीरियड्स के दौरान कमर दर्द, पेट में दर्द और पेल्विक एरिया में दर्द जैसी दिक्कतें भी होती हैं।
पीरियड्स के खून से बदबू क्यों आती है, इसकी वजह यह है कि पीरियड्स के दौरान शरीर में हार्मोनल उतार-चढ़ाव होते हैं, और इन बदलावों का असर कई बार तुरंत शरीर पर दिखने लगता है। वजाइना में नेचुरली हेल्दी बैक्टीरिया मौजूद होते हैं, जो प्राइवेट पार्ट्स के वातावरण को संतुलित रखने में मदद करते हैं। लेकिन पीरियड्स के दौरान वजाइना का pH बदलने की संभावना ज्यादा रहती है। पैड या मेंस्ट्रुअल अंडरवियर में जमा हुआ खून जब हवा के संपर्क में आता है, तो उसमें बदबू आने लगती है। पैड को बहुत देर तक न बदलना, ज्यादा ब्लीडिंग होना, पसीने की नमी, टाइट और बिना हवा वाले कपड़े पहनना, या बैक्टीरियल वेजिनोसिस जैसा इंफेक्शन बढ़ना, इन सब वजहों से पीरियड्स के खून से बदबू आने की संभावना बढ़ जाती है।
पीरियड्स के दिनों में प्राइवेट पार्ट्स की सफाई का खास ध्यान रखना जरूरी है। सैनिटरी पैड को हर ४ से ६ घंटे में बदलना चाहिए, और अगर ब्लीडिंग ज्यादा हो रही हो तो तुरंत बदल लेना चाहिए। टैम्पोन भी ४ से ६ घंटे में बदलना चाहिए। मेंस्ट्रुअल कप, पैड या टैम्पोन बदलने के बाद हाथ अच्छी तरह धोना बहुत जरूरी है, वरना इंफेक्शन बढ़ने का खतरा काफी बढ़ जाता है।
परफ्यूम वाले इंटिमेट वॉश, डियोड्रंट स्प्रे, खुशबू वाले पैड और वजाइनल डच का इस्तेमाल करने से बचना चाहिए। इन प्रोडक्ट्स के इस्तेमाल से सेंसिटिव स्किन में जलन हो सकती है या वजाइना का नेचुरल बैलेंस बिगड़ सकता है। इसके अलावा कई महिलाएं प्राइवेट पार्ट्स की सफाई के लिए अलग-अलग क्रीम या लोशन का इस्तेमाल करती हैं, लेकिन इनके इस्तेमाल से भी वजाइना में जलन या सूखापन महसूस हो सकता है।