मंगलवार, 6 अक्टूबर 2026

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18:59 IST

महाराष्ट्र में गर्भपात के मामले सबसे ज्यादा, परिवार नियोजन को लेकर काउंसलिंग जरूरी

केंद्रीय आरोग्य मंत्रालय के आंकड़ों में महाराष्ट्र में गर्भनिरोधक की सही जानकारी और समुपदेशन की कमी सामने आई है।

महाराष्ट्र में गर्भपात के मामले सबसे ज्यादा, परिवार नियोजन को लेकर काउंसलिंग जरूरी
एआई से बनाई गई प्रतीकात्मक तस्वीर; यह घटना का वास्तविक फोटो नहीं है | PT24

सिर्फ गर्भनिरोधक साधन उपलब्ध होना काफी नहीं है, उसका सही और लगातार इस्तेमाल, सही जानकारी और दंपतियों के बीच कुटुंब नियोजन को लेकर बातचीत भी उतनी ही जरूरी है। 26 सितंबर को विश्व गर्भनिरोधक दिवस के मौके पर गर्भनिरोधक साधनों को लेकर जागरूकता और अनियोजित गर्भधारणा को रोकने के लिए कुटुंब नियोजन की अहमियत एक बार फिर सामने आई है।

केंद्रीय आरोग्य मंत्रालय की हेल्थ मैनेजमेंट इंफॉर्मेशन सिस्टम के 2024-25 के आंकड़ों के मुताबिक महाराष्ट्र में 2 लाख 7 हजार 19 मेडिकल गर्भपात दर्ज किए गए हैं। देश के बाकी राज्यों के मुकाबले यह संख्या महाराष्ट्र में सबसे ज्यादा है। इससे साफ है कि गर्भनिरोधक के इस्तेमाल के साथ-साथ समुपदेशन की भी जरूरत है।

मुंबई महानगरपालिका के कुटुंब कल्याण विभाग की जानकारी के मुताबिक अप्रैल 2024 से मार्च 2025 के बीच मुंबई में 20,950 गर्भपात दर्ज हुए। इनमें से 716 मामले 19 साल से कम उम्र की लड़कियों के हैं। मुंबई के 20,685 मामलों में गर्भपात की वजह भी दर्ज की गई थी। इनमें से 19,495 मामलों में गर्भनिरोधक के अधूरे या गलत इस्तेमाल या गर्भनिरोधक पद्धति के फेल होने को वजह बताया गया। लेकिन इसका मतलब यह नहीं कि सिर्फ गर्भनिरोधक साधन ही फेल हुए। सही पद्धति चुनना, उसका सही तरीके से इस्तेमाल करना, नियमितता बनाए रखना, संभावित साइड इफेक्ट की जानकारी होना और जरूरत पड़ने पर मेडिकल काउंसलिंग लेना भी उतना ही जरूरी है।

वर्षा देशपांडे ने बताया कि गर्भपात महिला का स्वास्थ्य अधिकार है, लेकिन पुरुषों को भी जिम्मेदार यौन व्यवहार अपनाने की जरूरत है। एक गर्भपात से महिला को जितनी तकलीफ होती है, वह एक डिलीवरी जितनी ही होती है। उनके मुताबिक कुटुंब नियोजन की सर्जरी महिलाओं को ही करानी पड़ती है, और सवाल उठाया कि पुरुष कब संवेदनशील बनकर सर्जरी और गर्भनिरोधक के इस्तेमाल में आगे आएंगे।

राष्ट्रीय कुटुंब स्वास्थ्य सर्वेक्षण-6 के 2023-24 के आंकड़ों के मुताबिक महाराष्ट्र में 15 से 49 साल की उम्र की शादीशुदा महिलाओं में किसी भी कुटुंब नियोजन पद्धति के इस्तेमाल का प्रमाण 69.1 प्रतिशत है, जबकि आधुनिक गर्भनिरोधक पद्धतियों का इस्तेमाल 52.7 प्रतिशत है। कुटुंब नियोजन की कुल अधूरी जरूरत 8.5 प्रतिशत बताई गई है। इन आंकड़ों को देखते हुए विश्व गर्भनिरोधक दिवस जागरूकता का दायरा बढ़ाने का एक मौका है।

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