मंगलवार, 6 अक्टूबर 2026

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18:21 IST

महाराष्ट्र में 2030 तक सांप काटने से होने वाली मौतें आधी करने का रोडमैप बनेगा

सांप काटने के बाद इलाज न मिलने से होने वाली मौतें और गंभीर जटिलताएं रोकने के लिए राज्य ने कई विभागों को साथ लेकर योजना तैयार करने का फैसला किया है।

महाराष्ट्र में 2030 तक सांप काटने से होने वाली मौतें आधी करने का रोडमैप बनेगा
एआई से बनाई गई प्रतीकात्मक तस्वीर; यह घटना का वास्तविक फोटो नहीं है | PT24

सांप काटने के बाद मरीज को वक्त पर इलाज नहीं मिलता, जिससे मौतें होती हैं और गंभीर जटिलताएं भी खड़ी हो जाती हैं। इसे रोकने के लिए महाराष्ट्र ने 2030 तक सर्पदंश से होने वाली मौतें आधी करने की दिशा में रोडमैप बनाने की तैयारी की है।

अब तक सर्पदंश को सिर्फ स्वास्थ्य विभाग की जिम्मेदारी माना जाता था। इस बार वन, पशुसंवर्धन, आदिवासी विकास, पंचायत व ग्रामीण विकास और कृषि विभाग को भी इस मुहिम में शामिल किया जाएगा। इसके लिए हाफकिन इंस्टीट्यूट में हाल ही में एक सलाह-मशविरा बैठक हुई।

बैठक में सार्वजनिक आरोग्य विभाग, राष्ट्रीय रोग नियंत्रण केंद्र और जॉन स्नो इंडिया प्राइवेट लिमिटेड की भागीदारी रही। इसी के जरिए अलग-अलग विभागों से सुझाव मांगे गए।

बैठक में सांप काटने की घटना से लेकर अस्पताल में इलाज और उसके बाद के फॉलो-अप तक की पूरी चेन को जांचा गया। समुदाय, पहली प्रतिक्रिया, स्वास्थ्य सुविधा, रेफरल सेवा और फॉलो-अप, हर स्तर पर जो कमियां और जरूरतें हैं, उन्हें पहचानने पर जोर रहा।

पद्मश्री डॉ. हिम्मतराव बावस्कर, डॉ. सदानंद राऊत और डॉ. दिलीप पुंडे ने सर्पदंश के मरीजों की जांच, इलाज और मैनेजमेंट के बारे में मार्गदर्शन किया। अलग-अलग विभागों के प्रतिनिधियों के चार ग्रुप बनाकर चर्चा हुई। इसमें मुख्य दिक्कतें, प्राथमिकताएं, जिम्मेदारियां और उम्मीद किए जा रहे नतीजे तय किए गए।

बैठक के निष्कर्षों के आधार पर रोडमैप तैयार होगा। इसमें अलग-अलग विभागों की भूमिका, जरूरी कदम और तालमेल की व्यवस्था शामिल रहेगी। इसकी शुरुआती रूपरेखा अगले एक महीने में तय करने की योजना है। इस योजना में सर्पदंश की रोकथाम, जागरूकता, तुरंत मेडिकल मदद और मरीज के असरदार मैनेजमेंट पर जोर रहेगा।

राष्ट्रीय तकनीकी सलाहकार सर्पदंश समिति के सदस्य डॉ. सदानंद राऊत ने कहा कि राज्य सरकार के सर्पदंश रोकथाम कार्यक्रम से सांप काटने वाले व्यक्ति की सही दर्ज होगी और तय इलाज नीति में मदद मिलेगी। उनके मुताबिक सर्पदंश की वैक्सीन उपलब्ध है या नहीं, इसकी जानकारी भी तुरंत मिल जाएगी। डॉ. राऊत ने बताया कि जन जागरूकता, डॉक्टरों की ट्रेनिंग और सही इलाज मिलने पर सर्पदंश से होने वाली मौतों और अपंगता का प्रमाण कम होगा।

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