महाराष्ट्र के छह जिले एचआयव्ही रोकथाम में 'सुरक्षित' श्रेणी में, 23 जिले 'सक्षम'
'मोबिलाइज़ेशन फॉर एड्स सुरक्षा' पहल के छह महीनों में धुले, नंदुरबार, छत्रपति संभाजीनगर, जालना, चंद्रपुर और सांगली ने तीनों लक्ष्य पूरे किए।
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राज्य में एचआईवी की रोकथाम, जांच, इलाज, देखभाल और मदद की सेवाओं को ज्यादा मजबूत और असरदार बनाने पर जोर दिया जा रहा है। इसी के लिए महाराष्ट्र में 'मोबिलाइजेशन फॉर एड्स सुरक्षा' (एमएएस) अभियान चलाया जा रहा है। राष्ट्रीय एड्स नियंत्रण संस्था (नैको) की तरफ से यह अभियान पूरे देश में चल रहा है।
महाराष्ट्र में इसकी शुरुआत 7 अप्रैल 2026 को हुई थी। उस वक्त राज्य का एक जिला 'सक्षम' श्रेणी में था और 35 जिले 'संघर्षशील' श्रेणी में थे। अब सिर्फ छह महीने में धुले, नंदुरबार, छत्रपति संभाजीनगर, जालना, चंद्रपुर और सांगली, इन छह जिलों ने तीनों लक्ष्य पूरे कर 'सुरक्षित' श्रेणी में जगह बना ली है। वहीं 23 जिलों ने तीन में से दो लक्ष्य पूरे करके 'सक्षम' श्रेणी में तरक्की की है।
श्रेणी तय करने का तरीका यह है कि 95:95:95 के तीन लक्ष्यों में से शून्य या सिर्फ एक पूरा करने वाला जिला 'संघर्षशील' माना जाता है। कोई भी दो पूरे करने वाला जिला 'सक्षम' और तीनों पूरे करने वाला जिला 'सुरक्षित' कहलाता है। जो जिला तीनों लक्ष्य पूरे करे और साथ में एचआईवी, सिफिलिस और हेपेटाइटिस-बी का मां से बच्चे में होने वाला संक्रमण शून्य पर ले आए, उसे 'सुरक्षित+' श्रेणी दी जाती है।
पहले 95 का मतलब है कि एचआईवी के साथ जी रहे कुल लोगों में से 95 फीसदी को अपनी संक्रमण की स्थिति पता हो। दूसरे 95 में जांच से पता चले लोगों में से 95 फीसदी लगातार एंटीरेट्रोवायरल इलाज (एआरटी) लें। तीसरे 95 में इलाज ले रहे लोगों में से 95 फीसदी का वायरल लोड दबकर काबू में आ जाए।
पहला लक्ष्य पूरा करने के लिए जिलों में इंडेक्स टेस्टिंग और टारगेटेड इंटरवेंशन परियोजना के तहत 'मूनलाइट कैंपेन' चलाया गया। संक्रमण का जल्दी पता लगाने, वक्त पर रेफर करने और लोगों को जांच व इलाज से जोड़ने के लिए निजी डॉक्टरों को शामिल किया गया। उनकी संवेदनशीलता की ट्रेनिंग पर भी जोर दिया गया।
दूसरे लक्ष्य के लिए नए पकड़ में आए एचआईवी मरीजों में से सौ फीसदी को वक्त पर एआरटी से जोड़ने की कोशिश चल रही है। जिनका इलाज बीच में छूट गया था, उन्हें नियमित फॉलोअप, काउंसलिंग और अलग-अलग विभागों के तालमेल से फिर इलाज और देखभाल से जोड़ा जा रहा है। तीसरे लक्ष्य को मजबूत करने के लिए नियमित वायरल लोड जांच हो रही है, मिली रिपोर्ट वक्त पर देखी जा रही है और जरूरी इलाज व काउंसलिंग दी जा रही है।
इस तरक्की में जिलाधिकारी, जिला परिषद के मुख्य कार्यकारी अधिकारी, जिला शल्यचिकित्सक, जिला स्वास्थ्य अधिकारी, जिला एड्स प्रतिबंध व नियंत्रण कक्ष, आईसीटीसी और एफआईसीटीसी, एआरटी केंद्र, टारगेटेड इंटरवेंशन परियोजना, आउटरीच वर्कर्स, काउंसलर, लैब टेक्नीशियन और कई साझेदार संस्थाओं का योगदान है। बाकी जिलों में विभागों के तालमेल, नियमित समीक्षा, लाभार्थी को केंद्र में रखकर सेवा और असरदार कार्रवाई पर जोर दिया जा रहा है।
राज्य के सभी 36 जिलों ने 1 दिसंबर 2026 तक ये लक्ष्य पूरे करने का लक्ष्य रखा है। शहरी स्वास्थ्य आयुक्त और महाराष्ट्र राज्य एड्स नियंत्रण संस्था के परियोजना संचालक डॉ. सुनिल भोकरे ने बताया कि इस अभियान से महाराष्ट्र की लक्ष्यपूर्ति की तरफ मजबूत चाल चल रही है।
स्वास्थ्य मंत्री प्रकाश आबिटकर ने इस कामयाबी पर सबको बधाई दी। उन्होंने कहा, "इस उल्लेखनीय प्रदर्शन के लिए सभी स्वास्थ्य तंत्र, अधिकारी, कर्मचारी और साझेदार संस्थाओं को दिल से बधाई।" उन्होंने यह भी कहा कि सुरक्षित, सक्षम और सेहतमंद महाराष्ट्र बनाने के लिए स्वास्थ्य विभाग ज्यादा सक्रियता से काम कर रहा है।
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