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22:44 IST

महंगाई भत्ता क्या है, कितने तरह का होता है और सरकारी कर्मचारियों का DA कैसे तय होता है

केंद्र सरकार के कर्मचारी हर बार महंगाई भत्ते का इंतज़ार करते हैं। यहां समझिए कि DA क्या है, उसके प्रकार, गणना का तरीका, किसे मिलता है और वह टैक्स के दायरे में आता है या नहीं।

महंगाई भत्ता क्या है, कितने तरह का होता है और सरकारी कर्मचारियों का DA कैसे तय होता है तस्वीरें सत्यापित नहीं हैं

केंद्र सरकार के कर्मचारी हर बार महंगाई भत्ते यानी Dearness Allowance (DA) का बेसब्री से इंतज़ार करते हैं। सवाल यह है कि यह भत्ता आखिर है क्या, कितने तरह का होता है और इसकी गणना कैसे की जाती है।

रोज़ के खर्च पर बढ़ती महंगाई का असर कम करने के लिए सरकार अपने कर्मचारियों को यह भत्ता देती है। जब महंगाई भत्ता बढ़ता है, तो कर्मचारियों की तनख्वाह भी बढ़ जाती है। इसकी दर तय करने में महंगाई के आंकड़े बहुत अहम भूमिका निभाते हैं।

केंद्र सरकार आम तौर पर साल में दो बार महंगाई भत्ते में सुधार करती है। इसका ऐलान आम तौर पर मार्च और अक्टूबर में किया जाता है, जबकि नई दरें जनवरी और जुलाई से लागू होती हैं। महंगाई भत्ता अखिल भारतीय उपभोक्ता मूल्य सूचकांक (AICPI) के आंकड़ों के आधार पर तय होता है। यह सूचकांक वस्तुओं और सेवाओं की कीमतों में वक्त के साथ होने वाले बदलाव को मापता है।

गणना के लिए पिछले 12 महीनों के औसत AICPI डेटा का इस्तेमाल किया जाता है। सातवें वेतन आयोग के तहत केंद्र सरकार के कर्मचारियों के लिए महंगाई भत्ते की गणना एक तय फॉर्मूले के हिसाब से होती है। वहीं सार्वजनिक क्षेत्र के कर्मचारियों के लिए गणना में पिछले तीन महीनों के औसत डेटा का इस्तेमाल किया जाता है।

फॉर्मूले के तहत सरकार महंगाई के आंकड़ों के आधार पर नई दर तय करती है। जनवरी 2026 से केंद्र सरकार के कर्मचारियों और पेंशनधारकों के लिए महंगाई भत्ता 58 प्रतिशत से बढ़ाकर 60 प्रतिशत किया गया है। यह 2 प्रतिशत अंकों की बढ़ोतरी है।

महंगाई भत्ते को समझने के लिए उसके दो मुख्य प्रकार जानना ज़रूरी है। पहला है औद्योगिक महंगाई भत्ता, यानी Industrial DA। यह मुख्य रूप से सार्वजनिक क्षेत्र के औद्योगिक कामगारों पर लागू होता है। उपभोक्ता मूल्य सूचकांक के आधार पर हर तीन महीने में इसकी समीक्षा की जाती है।

दूसरा प्रकार परिवर्तनीय महंगाई भत्ता है, यानी Variable DA (VDA)। तय न्यूनतम वेतन पाने वाले कामगारों को महंगाई से बचाने के लिए इसका इस्तेमाल होता है। इसकी दरें उपभोक्ता मूल्य सूचकांक और न्यूनतम वेतन के नियमों के मुताबिक बदली जाती हैं। ध्यान रखिए कि नियमित केंद्र सरकारी कर्मचारियों का महंगाई भत्ता और न्यूनतम वेतन पाने वाले कामगारों का परिवर्तनीय महंगाई भत्ता अलग-अलग नियमों से तय होते हैं।

लाभ की बात करें तो केंद्र और राज्य सरकारों के पात्र कर्मचारियों के अलावा पेंशनधारकों को भी महंगाई से बचाने के लिए संबंधित भत्ता या राहत दी जाती है। लेकिन प्राइवेट कंपनियों में काम करने वाले कर्मचारियों के लिए महंगाई भत्ता अनिवार्य नहीं है। यह उनके रोज़गार और तनख्वाह से जुड़े नियमों पर निर्भर करता है।

महंगाई भत्ता तनख्वाह का हिस्सा है और आयकर कानून के हिसाब से टैक्स के दायरे में आता है। कर्मचारियों को इसे अपने आयकर रिटर्न में घोषित करना ज़रूरी है। DA बढ़ने से हाथ में आने वाली तनख्वाह बढ़ सकती है, पर असल फायदा कर्मचारी की मूल तनख्वाह और लागू टैक्स नियमों पर निर्भर करेगा। इसलिए नई दर जानने के साथ-साथ यह समझना भी ज़रूरी है कि गणना का आधार क्या है और इस बढ़ोतरी का आपकी तनख्वाह पर कैसा असर होगा।

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